दैनिक दिनचर्या के 16 नियम कौनसे है ? और हिन्दू धर्म में मानव दिनचर्या में इसका क्या महत्व है?

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दैनिक दिनचर्या के 16 नियम

नियम क्या है?

दैनिक दिनचर्या के 16 नियम :- पहले हम ये जानते है किसी साधारण इंसान को संस्कृत करना या शुद्ध करना किसी भी सधारण व्यक्ति विशेष क्रियाओं द्वारा उत्तम बनाना ही संस्कार कहलाता है |

संस्कृत भाषा का शब्द है संस्कार मन ,वचन, कर्म और शरीर को पवित्र करना ही संस्कार है |   संस्कार मनुष्यों के लिए परम आवश्यक है संस्कार ही एक साधारण मनुष्य के लिए शास्त्रों के अनुसार कुछ आवश्यक नियम बनाया गया है जिसका पालन कारना आवशयक है |

हम अपने जीवन में पूजा पाठ  तो  करते ही है  पर वह फल हमे तभी प्राप्त होगा जब हम अपने जीवन के दैनिक कार्य में ये १६ संस्कारो का पालन करेंगे जो सभी को अपनाना चाहिए |

तो आइये जानते है की कौन कौन से है वो १६ संस्कार जिसका हमे पालन करना चाहिए 

पहला नियम (दैनिक दिनचर्या के 16 नियम)

घर में हमेशा ताम्बूल अथवा पान का सेवन खासकर घर की स्त्रियां आवश्यक रूप से इसका सेवन करे क्युकी ताम्बूल के प्रयोग से घर में सदा श्री और सौभाग्य का वास बना रहे | 

दूसरा नियम

शौच के बाद बिना पाँव धोए घर में प्रवेश या पूजा पथ नहीं करना चाहिए क्युकी शौच के बाद पाँव नहीं धोने से घर में कलयुग का प्रभाव होने से दुर्दिन का आंरभ होता  है | 

तीसरा नियम

कभी गीले पाँव  ले कर कभी अपने बिस्तर पर सोने के लिए नहीं जाना चाहिए क्युकी ऐसा करने से कुविचारों को प्रोत्साहन और  दरिद्रता को आमंत्रण प्राप्त  है | 

चौथा नियम

कभी भी सुनसान जगह में नहीं सोना चाहिए क्युकी अगर ऐसे जगह पर सोये तो शत्रु घात का भय बना रहता है |

पाचवाँ नियम

 घर में सेवक प्रहरी छात्र को आवश्यकता से अधिक  नहीं सोना चाहिए खास कर घर की स्त्रियों को तो पूर्ण रूप से वर्जित है ऐसे करने से अगर सेवक और प्रहरी सोये रहेंगे तो घर की सुरक्षा क्षीण होगी |

कार्य पूर्ण नहीं होंगे  , और छात्र अगर सोयेंगे तो वो विद्या अर्जित नहीं कर पाएंगे | स्त्रियां अगर अत्यधिक सोयेंगी तो घर में लक्ष्मी का वास नहीं होगा | 

छठा नियम

16 संस्कार का क्या मतलब है
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पूर्ण रूप से अंधेरे वाले कमरे में नहीं सोना चाहिए ऐसा करने से अंधकारी शक्तियो का प्रभाव नहीं होता | 

नौवां नियम

कभी निवस्त्र नहीं सोना चाहिए ऐसा करने से भगवान शिव को अपमानित करना होता है | 

दसवां नियम

भोजन करने बाद से हमे अपना मुँह जरूर धोना क्युकि ऐसा नहीं करने से बीमार करने वाले कीटाणु और जीवाणु सरीर में प्रवेश करते हैं | 

ग्यारहवां नियम

उत्तर दिशा में शीश करके कभी नहीं सोना चाहिए ऐसा करने से चरण दक्षिण दिशा में पेअर करके सोने से काल भैरों और हमारे पूर्वजों का अपनमान होता है जिसका परिणाम अगर मृत्यु नहीं हुआ तो मानसिक संतुलन जरूर व्यक्ति  अपना खो देता है |  

बारहवा नियम

अपना शीश कभी भी पश्चिम डिसा में करके नहीं सोना चाहिए क्युकी पंश्चिम दिशा में शीश करके सोने से चिंताओं में वृद्धि होती हैं | 

तेरहवाँ नियम

छात्रों को हमेसा पूर्व दिशा में ही शीश करके सोना चाहिए क्युकी पूर्व दिशा में शीश करके सोने से ज्ञान और विद्या सहज प्राप्त हो जाते है | 

चौदहवाँ नियम

छात्रों के अतिरिक्त अन्य सभी को  दक्षिण में ही शीश करके सोये क्युकी दक्षिण में शीश करके सोने वालों को धन विद्या यश स्वस्थ दीर्ध आयु सभी प्राप्त हो जाते है | 

पंद्रहवा नियम

सोते समय काम से काम एक प्रहर सबसे पहले दाहिनी और मुख करके अवश्य सोना चाहिए  ऐसा करने से गहरी निद्रा प्राप्त होता है और जो व्यक्ति गहरी निद्रा लेता है वो सदा सुखी रहता है | 

सोलहवा नियम

सभी किसी को ब्रम्हामुहुर्त में जागना चाहिए क्युकी ब्रम्हा मुहूर्त में प्राण वायु का प्रवाह होता है इसलिए ब्रम्हा मुहूरत में जागने से व्यक्ति निरोगी और दीर्घायु बनता है |

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