हिंदू शास्त्रों के अनुसार 8 अमर कौन हैं | Who are 8 immortals according to Hindu scriptures

0
35

       अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः

इस श्लोक का अर्थ है :- अश्वस्थामा, बलि, व्यास , हनुमान जी , विभीषण, कृपाचार्य, और भगवन परशुराम , ये सातों महामानव चिरंजीवी अर्थात अमर है।  

हमारे हिन्दू धर्म के अनुसार इस संसार में आज भी 7 महामानव ऐसे है जिन्हे अमृत्व यानि अमरता का वरदान प्राप्त है . इनका अनादि काल से अबतक जीवित रहने के अलग-अलग कारण है।

 कुछ इस धरती में किसी को दिए वचन के कारण इस धरती पर है तो कुछ को मिले अभिशाप की वजह से यहाँ मौजूद है।  

हमारा मानना है की आप इन नमो में से 2 या 3 नामों को तो जानते होंगे लेकिन सभी को जानते हो इसकी सम्भावना कम ही है।  आज इस Article में हम उन्ही महामानवों के ऊपर विस्तार से चर्चा करेंगे।  

गवान परशुराम

1 भगवान परशुराम / Bhagwan Parshuram

इन 7 महामानवों में सबसे पहला नाम जो आता है वो है विष्णु जी के छटवें अवतार भगवान परशुराम जी है।  इनके पिता थे ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका। इन्हे मिलाकर ये कुल 5 भाई थे जिनमे ये सबसे छोटे थे।  जन्म समय इनका नाम राम था।  

परन्तु इन्होने शिवजी की कठोर जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने इन्हे फरसा वरदान में दिया।  यही वजह है की राम से इनका नाम परशुराम पड़ा।  

एक मान्यता अनुसार भगवन परशुराम ने 21 बार छत्ररीयो का वध किया था।  भगवन परशुराम राम से पहले जन्मे थे परन्तु अमर होने की वजह से वे राम युग और  महाभारत युग में भी मौजूद थे।  

2. राजा बलि / Raja Bali

इस सूची में दूसरा नाम आता है राजा बलि का, यह सत्युग के समय के थे। जिन्होंने तीनो लोको में विजय प्राप्त कर लिया था। तब विष्णु भगवान ने वामन अवतार लिया था और एक भिक्षु के रूप में राजा बलि के समक्ष आ गए थे। 

राजा बलि अपने दान के लिए बहुत ज्यादा प्रचलित थे कोई भी उनके दरवाजे से खली हाथ नहीं जाता था।  इसी तरह उन्होंने वामन को भी कुछ भी मांगने को कहा, तब श्री हरी के अवतार ने तीन कदम बराबर जगह मांगी।  

 बलि ने हरी को न पहचानते हुए इस भिक्षा के लिए हामी भर दी  है बोल दिया तब वामन ने २ कदम पे दोनों लोको को नाप  तीसरे कदम से राजा ऊपर पैर रखकर उन्हें पाताललोक पंहुचा दिया।  

एक मान्यता अनुसार भक्त प्रहलाद बलि के वंशज थे।  

हनुमान जी

3. हनुमान जी / Hanuman ji

इस सूचि में अगला नाम आता है राम जी के परम भक्त हनुमान जी का, यह राम युग में जन्मे उनके सबसे बड़े भक्त है।  अन्जीनी पुत्र हनुमान जी रामायण काल में भी थे और उसके हज़ारो वर्ष बाद महाभारत काल में भी उनके और भीम के बिच हुए प्रसंग आते है।  

 हनुमान जी को अमरता का वरदान माता सीता  जब वह श्री राम का सन्देश लेकर माता सीता के पास अशोक वाटिका गए थे और उन्हें राम जी का पूर्ण सन्देश सुनाया था।  

4. अगले महामानव का नाम है राजा  विभीषण। वह राम जी के अनन्य भक़्त थे। उन्होंने भगवान श्री राम जी की मदद रावण को परास्त करने में की थी।  जब श्री राम ने रावण का वध किया था और विभीषण को लंका का राजा बनाया था।  

 राजा बनाते समय उन्होंने सत्य की जीत के लिए निस्वार्थ भाव से अपने भाई के विरुद्ध  खड़े रहे ,उन्होंने विभीषण  का वरदान दिया था।  

5. Maharishi Vyas / महर्षि व्यास

5. वें महापुरुष है महर्षि व्यास जिन्हे वेदव्यास  भी जाना जाता है।  इन्होने ही  चारों वेद यानि ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद लिखें थे। इसके अलावा इन्होने ही महाभारत और श्रीमाद भागवत पुराण भी लिखी थी।  

ये ऋषि पराशर और सत्यवती के पुत्र थे।  इनका रंग सावला था इसलिए यह कृष्ण द्वैपायन कहलाए।  इनकी माता ने आगे चलकर शांतनु से विवाह किया जिनसे उनको दो पुत्र हुए और बड़े का नाम चित्रांगद जो युद्ध  और छोटे बेटे विचित्रवीर्य संतानहीन मर गए।  इसके सबसे बाद कृष्णद्वैपायन ने धार्मिन और वैराग्य का जीवन चुना।  

लेकिन अपनी माता के आग्रह पर इन्होने दोनों  संतानहिन् रानीयों को नियोग के नियम से दो पुत्र दिए जिनका नाम धृतराष्ट्र और पांडू कहलाए।  इसमें तीसरे पुत्र विदुर भी शामिल हुए।  

अश्वस्थामा

6.अश्वस्थामा / Ashvasthama

इस सूचि में अगला नाम आता है अश्वश्थामा का।  यह द्रोणाचार्य के पुत्र है और भगवन शंकर के ऐसे अवतार है जो आज भी मुक्ति के लिए इस ब्रम्हांड में  भ्रमड कर रहे है।  

इस सूचि में अगला नाम आता है अश्वश्थामा का।  यह द्रोणाचार्य के पुत्र है और भगवन शंकर के ऐसे अवतार है जो आज भी मुक्ति के लिए इस ब्रम्हांड में  भ्रमड कर रहे है।  

महाभारत काल में इन्होने कोरवो का साथ दिया था।  इन्हे अनंत काल तक भटकने का श्राप श्री कृष्ण जी ने दिया था क्योकि इन्होने पांडवो पे ब्रम्हास्त्र चलाया था।  

7.कृपाचार्य / Kripacharya

यह कृपाचार्य अश्वस्थामा के मामा और कौरवो के कुल गुरु थे। राजा शांतनु को जंगल में दो बच्चे मिले, और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। तब वह उन्हें अपने साथ ले गया, और लड़के का नाम कृपा रखा, क्योंकि यह राजा के लिए प्रभु की कृपा थी, और लड़की का नाम कृपी रखा गया था, और परिवार के पुजारी को उनकी जिम्मेदारी दी।

परिवार के पुजारी ने अपना ज्ञान लड़के कृपा को दिया, उसे कृपाचार्य के पास भेज दिया, और उसे अपना प्रवेश दिया। लड़की का विवाह एक महान और प्रसिद्ध व्यक्तित्व द्रोणाचार्य से हुआ था। और इस प्रकार कृपाचार्य गुरु द्रोणाचार्य के साले थे, जिन्हें बाद में पांडवों और कौरवों को पढ़ाने के लिए गुरु के रूप में नियुक्त किया गया था।

कृपाचार्य भी उन कुछ योद्धाओं में से एक थे जो महाभारत युद्ध के बाद जीवित थे और यहां तक ​​कि हारने वाले कौरव पक्ष से भी।    

8. ऋषि मार्कण्डेय / Rishi Markandey

इस सूचि में अंतिम नाम है ऋषि मार्कण्डेय जी का। यह भगवन शंकर के बहुत बड़े भक्त है और इन्होने अपने तप के बल से महामृन्तुन्जय के मंत्र को सिद्ध कर लिया था।  

हम सब जानते है की महामृन्तुन्जय का जाप मृत्यु को दूर रखने के लिए किया जाता है।  इन्होने ने इस मंत्र को सिद्ध कर लिया था इसलिए यह भी सतो महामानवों की तरह है अमर है।  

यह थी सूचि उन 8 महामानवों की जो आज भी इस धरती पर विचरण कर रहे है।  

        

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here