5 Most powerful demons in Hindu Scriptures? | हिन्दू संस्कृति के अनुसार, कौन है सबसे शक्तिशाली राक्षस?

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Most powerful demon in hindu Mythology

5 Most Powerful Demons in Hindu Scriptures :- आज आपके सामने जिस सूची को लेके आपके समक्ष हम आये हैं उसका मक़सद किसी राक्षस को कम शक्तिशाली या किसी को ज्यादा शक्तिशाली दिखाने के लिए नहीं बनाई गई है।

 यह तो हमारे ग्रंथो में से 5  ऐसे राक्षसों के बारें में आपको अवगत कराने और उनसे जुडी पौरणिक मान्यताओं को बताने की हमारी एक छोटी सी कोशिश हैं।  

चलिए पढ़ते है ऐसे ही  5 असुरों और राक्षसों के बारे में कुछ तथ्य।  

1. Shumbh-Nishumbh : शुम्भ-निशुम्भ (5 Most powerful demons in Hindu Scriptures)

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यह दो दैत्य अपने बहुत बलशाली थे। इनका उल्लेख देवी भागवत के स्कन्द 5 के अनुसार यह दोनों पाताल से भूलोक में आ गए थे और जब वह अपनी व्यस्क अवस्था में आये तब वह दोनों ब्रह्मा जी की नगरी पुष्कर में जाकर बिना अन्न और जल के कठोर तपस्या की।  

यह तपस्या लगभग 10000 साल तक चली। इनकी कठोर तपस्या देख ब्रह्मा जी बहुत प्रसन्न हुए और कुछ भी माँगने का वरदान माँगा।  यह दोनों भाई बहुत बदमाश थे उन्होंने अमरता का वरदान माँगा।  

ब्रह्मा जी बोले जिस मनुष्य ने जन्म लिया है वह अवश्य ही मरेगा इसलिए यह वरदान नहीं देख सकते।  दोनों भाइयों ने विचार किया और माँगा की हमारी मृत्यु किसी भी पुरूष जाती से  यानि कोई भी देवता, मृग, पक्षी और कोई भी ऐसा जिव जो पुरुष हो हमारा वध न कर पाए।  

यह दो दैत्य अपने बहुत बलशाली थे। इनका उल्लेख देवी भागवत के स्कन्द 5 के अनुसार यह दोनों पाताल से भूलोक में आ गए थे और जब वह अपनी व्यस्क अवस्था में आये तब वह दोनों ब्रह्मा जी की नगरी पुष्कर में जाकर बिना अन्न और जल के कठोर तपस्या की।  

यह तपस्या लगभग 10000 साल तक चली। इनकी कठोर तपस्या देख ब्रह्मा जी बहुत प्रसन्न हुए और कुछ भी माँगने का वरदान माँगा।  यह दोनों भाई बहुत बदमाश थे उन्होंने अमरता का वरदान माँगा।  

ब्रह्मा जी बोले जिस मनुष्य ने जन्म लिया है वह अवश्य ही मरेगा इसलिए यह वरदान नहीं देख सकते।  दोनों भाइयों ने विचार किया और माँगा की हमारी मृत्यु किसी भी पुरूष जाती से  यानि कोई भी देवता, मृग, पक्षी और कोई भी ऐसा जिव जो पुरुष हो हमारा वध न कर पाए।  

वरदान प्राप्त करने के बाद वह खुद को अमर मानने लग गए थे। उनका मानना था की कोई भी स्त्री जाती उनका वध नहीं कर सकती। परन्तु आगे चलकर देवी चंडिका के हाथों निशुम्भ का वध हुआ और शुम्भ को माँ काली ने मृत्यु प्रदान की थी।

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2. Narkasur : नरकासुर

नरकासुर की बात की जाये तो भागवत पुराण के अनुसार वह भू देवी व् भगवान विष्णु का वारह अवतार का पुत्र था।  विष्णु जी ने उसे प्राग्ज्योतिषपुर का राजा बना दिया था। 

 इतने तेजस्वी माता-पिता सन्तान होने के बावजूद वह अत्यंत ही क्रूर प्रवत्ति का इंसान। था।  

उसे यह प्रवत्ति बाणासुर नामक रक्षक की संगत की वजह से मिली थी।  उसे यह प्रवत्ति बाणासुर नामक रक्षक की संगत की वजह से मिली थी और उसी के कहने से उसने ब्रहमा जी की तपस्या की सलाह दी। 

 नरकासुर ने तुरंत ही ब्रह्मा    जी की कठिन तपस्या की और ब्रह्मा  प्रसन्न किया।  ब्रह्मा जी ने  वरदान मांगने को कहाँ , तब उसने माँगा की इस दुनिया में मेरी मृत्यु केवल मेरी  हाथों ही हो और दूसरा कोई भी मुझे  मार न सके।  

ब्रह्मा जी ने जब  सुनी तो उन्होंने तथास्तु का आशीर्वाद देकर अंतर्धान हो गए।  

वरदान  पाते ही वह ताकत के मद में पागल हो गया।  उसने धरती ही नहीं अपितु स्वर्गलोक  में भी अपने आतंक से त्राहिमाम मचा रखा था।  

उसने देवराज इंद्रा को स्वर्गलोक से निकालकर वहाँ अपना शासन चल्या और माता अदिति के दिव्या कुण्डल को भी चीन ले गया।  

इस क्रूर राक्षस का वध माता सत्यभामा के हाथो एक भीषण युद्ध के बाद हुआ था। असल में माता सत्यभामा भू माता अवतार थी जो सिर्फ इस राक्षस का वध करने जन्मी थी।

3. Andhaka : अन्धक

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अन्धक  का जन्म माता पार्वती के पसीने से ही हुआ था। इस बच्चें को भगवान शंकर ने दैत्य राज हरिण्याक्ष को दे दिया था।  इस  कथन का उल्लेख शिव पुराण के रूद्र सहिता के युद्ध खण्ड में पाया जाता है।  

इसके अनुसार वह भ्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए हजारों वर्षो तक घोर तप किया, जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे वरदान मांगने के लिए कहाँ परन्तु उसने कुछ ऐसा मांगे जिससे वह अमरता को प्राप्त  हो जाता 

 तब ब्रह्मा जी ने उसे अपने विनाश के लिए कुछ उपाए बताने को कहा क्योकि जो इस धरती में आया है  उसे एक न एक दिन काल के गर्त में जाना ही होता है।  

इस  कथन का उल्लेख शिव पुराण के रूद्र सहिता के युद्ध खण्ड में पाया जाता है।  इसके अनुसार वह भ्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए हजारों वर्षो तक घोर तप किया, जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे वरदान मांगने के लिए कहाँ परन्तु उसने कुछ ऐसा मांगे जिससे वह अमरता को प्राप्त  हो जाता 

तब ब्रह्मा जी ने उसे अपने विनाश के लिए कुछ उपाए बताने को कहा क्योकि जो इस धरती में आया है  उसे एक न एक दिन काल के गर्त में जाना ही होता है।  

तब वह माता पार्वती पर ही मोहित हो गया था। और विनाश का कारण बना भगवान शंकर ने उसका वध अपने त्रिशूल से किया था।

4. Bhasmasur or Vrikasur : भस्मासुर / वृकासुर .

इस राक्षस का उल्लेख श्रीमद महापुराण में आता है, इसे वृकासुर भी कहते है।  ग्रंथो में उल्लेख कथा अनुसार एक बार इसने नारद जी से पूछा की सबसे जल्दी खुश होने वाले भगवान तीनों देवो में कौन है? इसके जवाब में नारद जी ने उसे भगवान शंकर आराधना का जुझाव दिया।  

यह सुनकर वह भगवान शंकर की घोर तपस्या में लग गया और भगवान शंकर जी भी प्रसन्न हो गए और कोई भी मनवांक्षित वरदान मांगने कहाँ।  

इसपर उसने कहाँ की मैं जिस भी चीज़ या मनुष्य के सर पर हाथ रख दू वह भस्म हो जाए।  भगवान शंकर तो भोले भण्डारी है उन्होंने भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर तथास्तु का वरदान दे दिया।  

यह सुनते ही वह ताकत के मद में चूर हो गया और माता पार्वती को ही भगवान शंकर से छीन लेता हु सोचकर उनके ही सर में हाथ रखने का प्रयोजन बनाने लगा था।  

इस कठिन परिस्थिति हुए विष्णु जी ने अपनी योग-माया का उपयोग कर एक सुन्दर स्त्री का रूप ले लिया था। जिसे देख भस्मासुर उसपर मोहित हो गया और अनजाने में अपने ही सिर पर हाथ रख भस्म हो गया।

5. Vritrasura / वृत्रासुर

इसका उल्लेख महाभारत शांतिपर्व के अंतर्गत भीष्म द्वारा दिया जाता है।  उनके कथन के अनुसार वह आकर में वह 500 योजन लम्बा और 300 योजन लगभग उसकी मोटाई थी। 

उसने लगभग 60 हज़ार वर्ष ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने उसे  को कहा था।  उसने मायावी विद्याओं में सबसे गुणि, योग विद्या में सबसे आगे, उससे अधिक तेज़ और किसी के  साथ ही उसने हमेशा गमन करने का बल इत्यादि मानेगा।  ब्रह्मा  उसे  वरदान दे दिया।  

इसका वध आगे चलकर देवराज इंद्रा ने अपने महान अस्त्र वज्र से किया था।

ये हमारी सबसे शक्तिशाली राक्षस की श्रृंखला भाग-1 हैं। हम आगे भी इस श्रंखला में सामने कई और शक्तिशाली राक्षसों के बारे में बताएँगे जिनका नाम आपने इससे पहले शायद न सुना हो।

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