10 Unknown facts about Independence of India every proud citizen should know : भारत की आजादी के बारे में 10 अज्ञात तथ्य जो हर गर्वित नागरिक को जानना चाहिए

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happy independence day

आज हम आपको भारतीय स्वतंत्रता के बारे में कुछ ऐसे तथ्य बताएँगे जिसे आप शायद ही जानते होंगे। हम भारतीय ही थे, जिन्होंने इस दुनिया को Algebra, zero आदि का तोहफ़ा दिया था।  लेकिन आज जिस आज़ाद हवा में हम सांस ले पा रहे है, उसके लिए न जाने कितनी माताओं ने अपने बच्चों की कुर्बानी दी है, इसलिए इस स्वतंत्रता दिवस के दिन जानते है कुछ अनकहे अंसुले तथ्य हमारी आज़ादी से जुड़े हुए

Bhartiya swatantra ke bare me tathya : Facts about Indian Independence :- भारत एक ऐसा राष्ट्र है जो पूरी दुनिया में , अनेकता में एकता का सन्देश देता है। परन्तु इस पहचान को पाने में हमें बहुत सी कुर्बानी दी थी।  इस आज़ादी को पाने के लिए लोगो ने रास्ते अलग-अलग चुने, परन्तु मंज़िल सिर्फ एक थीं, ‘आज़ादी’.  किसी ने हिंसा को सही मन किसी ने अहिंसा का रास्ता चुना।  

आज हम आपको भारतीय स्वतंत्रता के बारे में कुछ ऐसे तथ्य बताएँगे जिसे आप शायद ही जानते होंगे। हम भारतीय ही थे, जिन्होंने इस दुनिया को Algebra, zero आदि का तोहफ़ा दिया था।  लेकिन आज जिस आज़ाद हवा में हम सांस ले पा रहे है, उसके लिए न जाने कितनी माताओं ने अपने बच्चों की कुर्बानी दी है, इसलिए इस स्वतंत्रता दिवस के दिन जानते है कुछ अनकहे अंसुले तथ्य हमारी आज़ादी से जुड़े हुए

राष्ट्रगान किसने और किसके लिए लिखा था? 

King George V
Credit – Internet

इस सवाल का पहला भाग तो आप बता देंगे की इस राष्ट्रगान को लिखने वाले है ‘गुरूदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर जी ‘.परन्तु इस सवाल का दूसरा भाग बहुत ही आचम्भित और दुःख पहुंचाने वाला है। राष्ट्रगान सबसे प्रथम हमारे देश के ऊपर नहीं लिखा गया था।

 यह उस समय राष्ट्रगान नहीं था बल्कि सिर्फ एक गीत था जिसे Britain के King George V के लिए लिखा गया था .यह बात बहुत दुःख पहुँचती है।  इसलिए हमारे यहाँ चाहिए की हम अपने इतिहास को पढ़े और सजग रहे। Bhartiya swatantra ke bare me tathya को जानकर आपको हैरानी जरूर हुई होगी.

क्या आप जानते है नेहरू जी को नहीं चुना गया था देश का पहला प्रधानमंत्री ?तो वह भारत के प्रथम प्रधानमंत्री कैसे बन गए?

Nehru, Gandhji and Sardar Patel Ji
Credit – Internet

यह एक बहुत ही रोचक बात हैं की जब हमारा देश आज़ाद हुआ तो उसके और कांग्रेस के सामने ये सवाल था की इस महान देश का प्रथम प्रधानमंत्री कौन बनेगा?  तब कांग्रेस की congress committee में वोट किया गया।  तब सरदार पटेल और नेहरू में वोट कराया गया ।तब सरदार पटेल जी को एक तरफ़ा बहुमत मिला।  

कई जानकार बताते है की इस वाकये के बाद नेहरू ने गाँधीजी  से कांग्रेस तोड़ने की बात कही थी अगर उन्हें प्रधानमंत्री न बनाया गया।  नेहरू जी गाँधीजी के ज्यादा करीब थे इसलिए उन्होंने सरदार पटेल जी से पीछे हटने को कहा जिसे सरदार पटेल जी ने स्वीकार कर लिया।और इस तरह जवाहर लाल नेहरू हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने।    

Bhartiya swatantra ke bare me tathya कुछ ऐसे भी है जो राजनेताओ के असली चेहरे सामने लाते है

हमारे देश का राष्ट्रीय ध्वज किसके द्वारा बनाया गया था?

जिस ध्वज को आज आप और हम देखते है वो बहुत से परिवर्तनों से गुजरा है। भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज 7 August 1906 को Parsee Bagan Square(Greeen Park) तब के Calcutta और आज के Kolkata में फहराया गया था। Bhartiya swatantra ke bare me tathya बड़े ही हैरान कर देने वाले है .

आज जिस ध्वज को हम देखते है उसका निर्माण किया था, पिंगली वेंकैया नामक क्रन्तिकारी जो की माछिलीपट्नम नामक जगह से थे।ऐसी शक्शियत को हमारा प्रणाम।

भारत की आज़ादी के लिए 15 August की तारीख ही क्यों चुनी गई?

लॉर्ड माउंटबेटन, जो की भारत के अंतिम वायसराय और पहले गवर्नर जनरल थे। उन्होंने 15 अगस्त की तारीख को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में इसलिए चुना, क्योंकि इसी तारीख को जापान ने मित्र राष्ट्रों के समक्ष आत्मसमर्पण किया था और 15 August1947 उनके आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगांठ थी।

Bhartiya swatantra ke bare me tathya आपको द्वितीय विश्व युद्ध से भी सम्बन्ध स्थापित कर देता है.

हमारे देश का नाम India क्यों रखा गया?

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इस विषय को लेकर सब जगह अलग-अलग और गलत बाते फैली हुई है।कई लोग कहते है हमारे देश का नाम India अंग्रेजों ने अमेरिका के ‘Red Indians’ जो वहा के मूल निवासी है उनके नाम पर रखा था। और भी बहुत सी बाते होती है।  

यह सब बातों के विपरीत अगर सच्चाई की बात करे तो पाएंगे की हमारे देश का नाम India ‘Indus’ नदी से लिया गया है।  यह नदी ‘Indus Valley’ जो की विश्व की सबसे पुरानी और विकसित प्रजातियों में से एक है वह बहती थी।  इसी नदी के नाम से हमारे देश का नाम India पड़ा था.  

Bhartiya swatantra ke bare me tathya अपने देश के और भी करीब लाकर खड़ा कर देता है

जब देश स्वतंत्रता का जश्न मन रहा था तब गाँधीजी कहा थे?

यह दिल को झकझोर देने वाला है की जब दिल्ली आज़ादी का जश्न मना रही थी, तब पूरा देश हिन्दू-मुस्लिम दंगो से जूझ रहा था। इस कत्लेआम को देखते हुए महात्मा गाँधीजी कोलकाता में अनशन कर रहे थे जिससे यह कत्ले आम रुक जाये । ऐसा हुआ भी, गाँधीजी के अनशन के कुछ दिनों में ही दंगे थम गए और चारो ओर शांति फैलने लगी।   

Bhartiya swatantra ke bare me tathya कभी-कभी आपको कुछ सवालो के सामने खड़े कर देते है जिनका कोई भी सटीक जवाब शायद मौजूद नहीं है.

जन-गण-मन हमारा राष्ट्रीय गान कब बना?

यह जानकर आपको हैरानी होंगी की जब हमारा देश आज़ाद हुआ तब हमारा कोई भी राष्ट्रीय गान नहीं था।  इसका मतलब यह है की जब हमारा देश आज़ाद हुआ, उस समय कोई आधिकारिक राष्ट्रगान नहीं था। वैसे हमारे आज का जो राष्ट्रगान है, वो 1911 को लिखा गया था।  लेकिन इसे हमारे राष्ट्रगान के रूप में स्वीकृति 24 January 1911 को मिली।   

कौन-कौन से और देश है जिनको 15 August के दिन स्वतंत्रता मिली थी?

हमारे देश के अलावा बहुत से और भी देश है जिन्हे 15 August को आज़ादी मिली थी। साल भले ही अलग-अलग क्यों न हो, दिन एक ही है।  ऐसे देश जिनका स्वतंत्रता दिवस 15 August है उनके नाम है , Bahrain, North Korea, Congo, Liechtenstein और South Korea. Bhartiya swatantra ke bare me tathya आपको दूसरे देशों से भी जोड़ते है

क्या Goa भी 1947 को आज़ाद हुआ था?

यह एक हैरान कर देने वाली बात है की Goa जैसा राज्य 1947 को आज़ाद नहीं हुआ था। यह एक Portuguese Colony थी।  आज़ादी के कई साल बाद भी पुर्तगाल ने इस राज्य से अपना दावा छोड़ने से मन कर दिया था। तब वर्ष 1961 में भारत सरकार ने अपनी सेना भेजकर वर्ष 1961 में गोवा को आज़ाद करवाया। 

इस देश को बाटने का काम अंग्रेजी सरकार ने किसे दिया था?

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आज जिस विभाजित देश को हम देखते है इस काम का ज़िम्मा British सरकार ने जिस इंसान को दिया था उसका नाम था ‘Cyril John Radcliffe.’ इसी के नाम से पाकिस्तान और भारत के बीच जो रेखा खींची गई उसका नाम पड़ा Radcliffe Line. 

इस पुरे कार्य की सबसे शर्मनाक बात यह है की जिस आदमी को यह कठिन और नाज़ुक  कार्य सौपा गया था वह कभी भी भारत नहीं आया था।अपने कार्य के बाद हुए विध्वंश को देखकर Radcliffe अपनी तनख्वा INR 40,000 छोड़ दी थी।  

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