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2nd Wave of Coronavirus:- कैसे भारत में जारी Wuhan-Virus की दूसरी लहर, पहली लहर से ज़्यादा ख़तरनाक और संक्रामक है?

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2nd Wave of Coronavirus

2nd Wave of Coronavirus:- आज हमारा देश Virus की चपेट में पूरी तरह से फसता नज़र आ रहा है।  इसके फैलने की रफ़्तार का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते है की आज दुनिया में Wuhan -virus के हर पाँच में से एक रोगी हमारे देश का है।  

2nd Wave of Coronavirus पहली लहर से ज्यादा संक्रमण करी है, इसकी पुष्टि आप निचे दिए गए ग्राफ में आसानी से कर सकते है।

2nd Wave of Corona Virus

विशेषज्ञों की मानें तो इस बार की लेहेर में संक्रमण के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण coronavirus में पाए जाने वाला Indian Strain है।  इसके फैलने की दर पिछली लेहेर से बहुत ज्यादा मणि जा रही है।  

महाराष्ट्र जो की इस लेहेर में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक है, इनके 61% नमूनों में Indian Strain पाया गया।  लेकिन सिर्फ यही एक कारन को मने तो सही नहीं होगा।  जनता और सरकार द्वारा दिखाई गई लापरवाही को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता जो की इस वायरस के फैलने के प्रमुख कारन है।  

2nd wave of Coronavirus में युवा ज्यादा संक्रमित हो रहे है?

यह महामारी जब से शुरू हुई है तबसे दिसंबर महीने तक के आकड़ों को देखे तो 60% से ज्यादा मामले ऐसे लोगो के थे जिनकी उम्र 45 वर्ष से कम थी(केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मृत्यु दर के आंकड़ों पर रिपोर्ट)।  लेकिन उसके विपरीत मृत्यु दर के आकड़ों में सबसे ज्यादा संख्या इन लोगों बल्कि उन लोगो की है जिनकी उम्र 60 वर्ष से ज्यादा थी।  

इस बार की अगर बात  सटीक तौर  नहीं जा सकता, क्योंकि सरकार आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किये है बात की पुष्टि कर सके। और रही बात  सरकारों की तो  हमे कोई ऐसे आंकड़े देखने नहीं मिल रहे जो इस बात का समर्थन की इस बार की लेहेर युवाओं  को अपने चपेट में ज्यादा  है।  

हमारे देश की मीडिया की खबरों में जाये तो ऐसा कोई भी खबरे सामने नहीं आती जो पक्के तौर पे ये चीज़ बता सके की युवाओ पर महामारी का ज़्यादा असर। 

 हमारी राजधानी की बात की जाये तो 13 April को अपने सम्बोधन में केजरीवाल जी ने  पुष्टि की है की 60%  से अधिक मामले उन लोगों के  45 साल से काम है।  उन्होंने इस बात की पुष्टि के लिए कोई आधिकारिक आंकड़े पेश।   

हम बात करे डॉक्टर्स की जो प्रतिदिन इस महामारी से लड़ रहे है, उनके अनुसार इस लेहेर में उनके पास ऐसे मरीज ज्यादा आ रहे है जिनकी उम्र 30 से 45 वर्ष हैं। जो पिछले बार आने वाले मरीजों की संख्या से कही ज्यादा है।  

बहुत सारे डॉक्टर्स की माने तो 45 साल  से कम मरीजों के मिलने का सबसे बड़ा कारण Vaccination हो सकता है।  ऐसा इसलिए मानना है क्युकी vaccination से उन्हें 2nd Wave ऑफ़ Coronavirus से लड़ने में एक सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा है।  

क्या बच्चे इस Indian Variant से आने वाले समय में ज्यादा होंगे?

इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि क्या बच्चे उच्च दर पर संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे डॉक्टर्स जो लगातार 2nd  Wave  of  Coronavirus से लगातार लड़ रहे है , उनका कहना ये है की न की सिर्फ बच्चे जल्दी संक्रमित हो रहे है बल्कि इस बार वह पिछली बार से भी ज्यादा गंभीर रूप से संक्रमित हो रहे है।  

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार तक़रीबन 80000 से ज्यादा बच्चे 1 March से लेकर 4 April तक 2nd Wave of Coronavirus से संक्रमित हो चुके है।  यह आकड़ा पुरे देश का नहीं बल्कि सिर्फ  Maharashtra, Chhattisgarh, Uttar Pradesh, Karnataka and Delhi का है।  

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार तक़रीबन 80000 से ज्यादा बच्चे 1 March से लेकर 4 April तक 2nd Wave of Coronavirus से संक्रमित हो चुके है।  यह आकड़ा पुरे देश का नहीं बल्कि सिर्फ  Maharashtra, Chhattisgarh, Uttar Pradesh, Karnataka and Delhi का है।  

इसमें 60000 तो सिर्फ महाराष्ट्र  से ही हैं।  

क्या संक्रमण के कारण अधिक गंभीर बीमारी होती है?

अगर वर्त्तमान स्थिति की बात की जाये तो कुछ ठोस तथ्य या आकड़े अभी तक हमारे पास नहीं है परन्तु पिछली बार से इस बार संक्रमण कुछ ज्यादा खतरनाक जरूर है और ह्रदय घात और फेफड़ो में छति के भी  मामले सामने आ रहे है।  

डॉक्टरों की मानें तो इस बार की लहर में फेफड़ों  संक्रमण ५ दिनों में उस प्रकार का हो रहा है जो पिछली बार के संक्रमण में २-3 हफ्तों में हुआ करता था।

इस बार बुखार भी पिछली बार से कही जल्दी और तेज़ी से आ रहा है।  इस बार के संक्रमण में oxygen   बहुतायत मात्रा में लग रही है, यही कारण है की हर जगह से Oxygen की कमी की खबरे भी आ रही है।  

ऑक्सीजन की कमी का कारण यह भी है की इस बार संक्रमण बहुत तेज़ी से फैला है पिछली बार की तुलना में।  

Indian Express में छपी एक  खबर के अनुसार डॉ का कहना है की इस बार मरीजों में 90 Liter/Min ऑक्सीजन की मात्रा की जरूरत पड़ रही है जबकि एक आम मरीजों  में ये मात्रा औसतन 15 Litre/Min हुआ करती है।  

क्या कम मौतें हो रही हैं?

जैसे-जैसे यह संक्रामिन आगे बढ़ रहा है भारत में मृत्यु-दर बहुत ही तेज़ी से निचे आ रहा है।  जहा पिछली बार मृत्यु दर 3.01% हुआ करती थी वह इस बार की 2nd Wave of Coronavirus में घटकर 1.01% पर आ गयी है।  

परन्तु जानकारों की माने तो इस आकड़ो से कुश नहीं होना चहिये क्योंकि मामले जिस हिसाब से बढ़  रहे है १% की मृत्यु दर भी  हुई मौतों  को पीछे छोड़  सकती है।  

NOTE :- ऊपर दिए गए सभी तथ्य Internet और आया स्रोतों से जानकारी प्राप्त कर लिखे।  

Gold या Fixed Deposit:- निवेश के लिए कौनसा विकल्प सही है?

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GoldVsFD

Gold Investment या Fixed Deposit:-हमने नए साल का स्वागत किया और बीते हुए साल से बहुत कुछ सीखा । हमे मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक Wuhan-Virus जैसी चीज़ भी देखि।

लेकिन जो सबसे बड़ी सिख हमने सीखी वह थी की बुरे वक़्त में बचाएँ हुए पैसे ही काम आते है।  इसलिए हमे हमेशा ही अपने पैसों को बचाना और सही जगह में निवेश करना चाहिए।  

परन्तु बोलना जितना आसान है, निवेश के लिए सही विकल्प चुनना उतना ही कठिन। एक भारतीय हर चीज़ बहुत ही सोच-समझकर चुनता है। आज हर व्यक्ति के सामने निवेश के बहुत से विकल्प है, और रही-सही कसर विज्ञापन  पूरी कर देते है, जिससे सही क्या है गलत समझना मुश्किल हो जाता है।  

आज के समय में सबसे सुरक्षित और ऐसा विकल्प जो आपके निवेशित पुँजी को सुरक्षित तो रखता ही है साथ-साथ उसे एक निश्चित दर से बढ़ाता हैं।  

हम बात कर रहे है, Gold और Fixed Deposit की।  यह दोनों ही विकल्प आपको बाजार के जोखिम और Savings Account के कम ब्याज दरों के सामने एक अच्छाऔर सुरक्षित निवेश का विकल्प प्रदान करता है।  

आइये इन दोनों विकल्पों के बारे में तुलना करते है और जानते है किस्मे निवेश करना किसमे निवेश करना आपके लिए ज्यादा फयदेमंद रहेगा

Gold Investment : सोने में निवेश:-

हमारे भारतीय समाज में सोने को एक विशेष स्थान प्राप्त है। साल में ऐसे कई विशेष मौके आते है जैसे अक्षय तृतीया, धनतेरस, दिवाली, जब सोना खरीदना निवेश का एक विकल्प मात्र न रहकर उत्सव बन जाता है। 

इसी दिन का इंतज़ार करते हुए कई नागरिक पुरे साल इंतज़ार करते है सोने में निवेश करने का या यूँ कहे की कई भारतीय पुरे साल का सोना इसी दिन खरीदना पसंद करते है।  

संस्कृति और परंपरा की बात अगर न भी करे तो भी सोने में निवेश करना बहुत ही अच्छा माना जाता है। 

कई दिग्गज निवेशक सोने में निवेश करने की राय आवश्य देते है, उनके अनुसार सोने में निवेश करने से आप बाजार की उथल-पुथल से अपने निवेशित Portfolio को स्थिरता प्रदान करते है।    

इसलिए हर व्यक्ति को अपने Portfolio का 10-15% सोने में या सोने में निवेश के अलग-अलग विकल्प जो आज बाजार में उपलब्ध हैं जैसे Gold Bond, Digital Gold, Gold ETF इत्यादि में  निवेशित रहना चाहिए।  

आज के समय में जो सोने में निवेश करने को सबसे ज्यादा आकर्षक बनता है, वो है Liquidity 

आज का समय अनिश्चिताओं का समय है और Wuhan-Virus ने इस चीज़ को बहुत ही अच्छी तरह से समझाया है। 

इसलिए आज का युवा ऐसे विकल्पों की तलाश में रहता है जहा वह जब चाहे आसानी से आपने पैसे निकल सके और बुरे समय में अपनी जरूरते पूरी कर सके।

 और हम सब जानते है बुरे समय में हम अपने पास रखे सोने के सिक्कें, आभूषण एवं बिस्कुट को जब चाहे सोनार के पास गिरवी अथवा बेचकर तुरन्त ही अपनी आवश्यकता पूरी कर सकते है।  

आज के बदलते दौर में बैंक और अन्य कई संस्थान सोने के बदले कम ब्याज दरों में रीढ़ उपलब्ध कराते है। जिससे सोने में निवेश करना आसान और आकर्षक हो गया है।

Investment in Fixed Deposit:-

Fixed Deposit(FD) एक ऐसा वित्तीय साधन है जो हमे एक पूर्व निर्धरित समय के अंतर्गत एक निश्चित ब्याज दरों से आपके द्वारा निवेशित पैसों को संभल के रखता है। 

इसमें निवेशित पैसे बाज़ार जोखिम के अंतर्गत नहीं आते इसलिए यह बहुत ही सुरक्षित विकल्प है पैसो को निवेश करने हेतु।  

यह उन निवेशकों की पहली पसंद है जो जोखिम काम उठाना चाहते है और आपने Savings Account के ब्याज से कुछ ही अधिक ब्याज़ की अपेक्शा रखते है।  

यह हम किसी भी बैंक, सरकारी संसथान, स्व साहयता समूह या गैर-सरकारी संस्थानों में जाकर खुलवा सकते है।

Gold या Fixed Deposit :- एक तुलनात्मक विश्लेषण

निवेश के जोख़िम : Risk Involvement :-

जैसे की हमने पहले भी बताया हैं की FD और Gold Investment दोनों ही निवेश के मामले में कम जोख़िम रखते हैं। 

इसमें एक बात ध्यान रखने वाली जरूर है की निकट भविष्य में सोने के दामों में थोड़ी बहुत उथल-पुथल हो सकती है लेकिन लम्बे समय तक निवेशित होने से यह आपको अच्छा मुनाफा ही प्रदान करेगी।  

जहाँ तक बात है FD(Fixed Deposit) की तो यह पूर्व आधारित ब्याज दर की जमानत देता है। और यह किसी भी अन्य कारको जैसे बाजार में उतार-चढ़ाव से पूर्णतः अछूता।

Rate of Return: प्रतिफल दर:-

 प्रतिफल दर की बात करे तो सोने में निवेश करना आपको ज्यादा मुनाफा देगा बशर्ते आप इसमें लम्बे समय तक निवेशित रहे।  

एक बहुप्रचलित अख़बार में छपी एक रिपोर्ट अनुसार पिछले पांच वर्षों से हर धनतेरस पर सोना खरीदने वाले निवेशकों ने 10 और 15 साल की अवधि में 17.9% सीएजीआर रिटर्न कमाया है, निवेशकों ने क्रमशः 10.7% और 11.9% रिटर्न अर्जित किया है। 

पिछले पांच वर्षों में उच्च रिटर्न को पिछले वर्ष की तुलना में सोने की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। पिछले धनतेरस के दिन सोने की कीमतों में 34% की बढ़ोतरी हुई है।

वही बात करें Fixed-Deposit की तो उसकी अच्छी बात यह हैं की इसके ब्याज पूर्वनिर्धारित होता है जिससे की निवेशक के सामने तस्वीर साफ़-साफ़ रहती है।  

Liquidity Or या कितनी जल्दी उसे बेचकर पैसा लाया जा सकता है:-

इस पैमाने में गोल्ड में निवेश करना ज्यादा सही मन जाता है, क्युकी हम सोने को बेचकर या उसे गिरवी रखकर तत्काल पैसो को पा सकते है।  

लेकिन हमे ये बात ध्यान में रखनी चाहिए की सोने का भाव बाजार के आधीन होता है यानि बाजार में जो सोने का भाव उस वक़्त का होगा उसी की कीमत आपको मिलेगी चाहे फिर वो कीमत आपके ख़रीद से निचे ही क्यों न हो।  

इसलिए सोने में निवेश करते वक़्त हमेश लम्बी अवधि का ही इरादा रखें वर्ण जल्दी के चक्कर में नुकसान हो सकता है।  आजकल सोने में निवेश के जो नए-नए तरीके सामने आये है उससे इसमें निवेश करना और भी आकर्षक हो गया है. 

बात करे FD की तो इसे भी हम अपनी तय अवधि से पहले भी निकल सकते है परन्तु ऐसा करने पर बैंक या जिस जगह से आपने अपना FD करवाया है वह कुछ शुल्क लगा सकता है और आपके पैसों की ताक़त काम कर सकता है।  

इसलिए जब भी निवेश करे तो लम्बी अवधि को ही ध्यान में रखें।  

Loan Against Investment : निवेश के खिलाफ ऋण

सोने और एफडी के मुकाबले मूल्य का लगभग 80% ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

आप आसानी से अपने संबंधित सावधि जमा और बैंकों, एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों), और कई अन्य वित्तीय संस्थानों से प्रतिस्पर्धात्मक ब्याज दरों पर ऋण का लाभ उठा सकते हैं, जो आमतौर पर व्यक्तिगत ऋणों पर लगाए गए ब्याज दरों से कम होते हैं।

इस वर्ष लॉकडाउन के कारण, सोने के मूल्य में भारी वृद्धि हुई और RBI ने भी LTV या ऋण को मूल्य अनुपात में 90% तक बढ़ा दिया। 

इसलिए 1 लाख रुपये का सोना जो आपको पहले 60,000-75,000 रुपये का ऋण प्रदान करता है, अब आपको 90,000 रुपये का ऋण मिलेगा।

जोखिमगोल्ड और एफडी दोनों ही कम जोखिम वाले निवेश हैं।
बाजार की प्रकृतिहालांकि सोने की कीमत प्रकृति में थोड़ी अस्थिर है क्योंकि यह मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों पर निर्भर करता है, एफडी शून्य आय वाले अस्थिरता वाले निश्चित आय वाले साधन हैं। हालांकि, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भी अधिक रिटर्न मिल सकता है और इसने हमेशा लंबे समय तक अपना मूल्य बनाए रखा है।
निवेश से फ़ायदापिछले 30 वर्षों में गोल्ड ने 9.8% का सीएजीआर प्रदान किया है। दूसरी ओर, एफडी ने लगभग 8% का सीएजीआर प्रदान किया है।
जल्द से जल्द नगद मिलने में सहूलियतचयनित अवधि के आधार पर FD लचीली हो सकती हैं। गोल्ड ईटीएफ जैसे सोने के निवेश के अन्य रूपों की शुरुआत के साथ, सोने के निवेश ने लचीलेपन में भी काफी वृद्धि की है। दोनों में से किसी को भी तरल करने का समय संस्थान और छुटकारे की प्रकृति पर निर्भर करेगा।
आये का श्रोतसोने के निवेश को आय उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है। सोना एक संपत्ति है और आपको समय के साथ धन पैदा करने में मदद कर सकता है और मुख्य रूप से अस्थिरता के खिलाफ बचाव का काम करता है। हालांकि, एफडी के मामले में, यदि आप आवधिक भुगतान चुनते हैं, और मासिक आवृत्ति का चयन करते हैं, तो आप मासिक रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं
कर की दरेंगोल्ड से मिलने वाले रिटर्न को ‘कैपिटल गेन्स’ के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा और इंडेक्सेशन से किसी को फायदा हो सकता है। हालांकि, एफडी से मिलने वाले ब्याज पर आयकर की मौजूदा स्लैब दरों पर कर लगता है।

Conclusion:-

एफडी और गोल्ड दोनों निवेश कम जोखिम वाले होते हैं और लंबी अवधि में एक अच्छा कोष बनाने में आपकी मदद कर सकते हैं। संक्षेप में, यदि आप गोल्ड में लंबी अवधि के निवेश की तलाश कर रहे हैं, तो आप उच्च रिटर्न के साथ-साथ टैक्स पर भी बचत कर सकते हैं; कभी-कभी बाजार की अस्थिरता का एक सा उल्लेख करने के लिए नहीं। दूसरी ओर, एफडी आपको तुलनात्मक रूप से कम लेकिन गारंटीड रिटर्न दे सकते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होते हैं। हालाँकि, उपरोक्त कारकों पर विचार करने के बाद, आप उचित परिश्रम का संचालन कर सकते हैं और अपनी जोखिम भूख और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार इस दिवाली निवेश कर सकते हैं।

Interesting facts about Subhas Chandra Bose : सुभाष चंद्र बोस जी से जुड़ी अनसुनी अनकही बातें

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23 January को हमारा देश की मिट्टी से जन्मे एक महान क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस जन्म हुआ था।  वर्ष 2021 में सुभाष चंद्र बोस जी के 124th (Subhash Chandra Bose Birthday) जन्म दिवस मनाएंगे।

 आइए जानते है उस महँ व्यक्ति  अनकही अनसुनी बात्तें (Interesting Facts about Subash Chandra Bose)।  Subhas Chandra Bose Birthday : सुभाष चंद्र बोस जी का जन्मदिवस :-

Subhash Chandra Bose का जन्म 23 January 1897 को ओड़िसा में  हुआ था।स्कूल और विश्वविद्यालय में अपने पूरे अध्ययन में शीर्ष रैंक हासिल की. 

Subhas Chandra Bose Education : सुभाष चंद्र बोस जी की शिक्षा :-

उन्होंने 1918 में प्रथम श्रेणी के स्कोर के साथ दर्शनशास्त्र में B.A पूरा किया। उन्होंने 1920 में इंग्लैंड में भारतीय सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की। 

बाद में, उन्होंने स्वतंत्रता के लिए भारत के संघर्ष के बारे में सुनकर, 23 अप्रैल, 1921 को अपनी सिविल सेवा नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

Subhas Chandra Bose Political carrier  : सुभाष चंद्र बोस जी का राजनैतिक सफ़र :- 

सुभास चंद्र बोस जी 1920 और 1930 के दशक के उत्तरार्ध में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के युवा, कट्टरपंथी, विंग के नेता थे, 1938 और 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए उठे। 

1939 में मोहन करमचंद गांधी के साथ मतभेदों के कारण उन्हें कांग्रेस के नेतृत्व के पदों से हटा दिया गया। और कांग्रेस आलाकमान ने कांग्रेस की विदेश और आंतरिक नीतियों पर खुलकर हमला किया।

Subhas Chandra Bose thinking about freedom : सुभाष चंद्र बोस जी की आज़ादी को लेकर सोच :-

सुभाष चंद्र बोस भले ही कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके थे लेकिन उनकी सोच गांधजी की विचार धरा से एकदम अलग थी और इसी वजह से उन्होंने गांधीजी से मतभेद होने की वजह से अपने पद का त्याग़ कर दिया था।

 उनका मानना था की गांधीजी के अहिंसा के तरीके से आज़ादी मिलना नामुमकिन है।  अपनी इसी सोच की वजह से ब्रिटिश सर्कार ने उन्हें 1921-1941 तक 11 बार गिरफ़्तार किया गया।  

Subhas Chandra Bose’s INA(Indian National Army) : सुभाष चंद्र बोस का आई.एन.ए(आज़ाद हिन्द फ़ौज) :-

द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में, उन्होंने सोवियत संघ, नाजी जर्मनी और इंपीरियल जापान सहित कई देशों की यात्रा की थी, ताकि प्रत्येक के साथ गठबंधन की तलाश की जा सके और भारत में ब्रिटिश सरकार पर हमला किया जा सके।

 बाद में, उन्होंने इंपीरियल जापानी सहायता के साथ फिर से संगठित किया और ब्रिटिश मलाया, सिंगापुर और दक्षिण पूर्व एशिया के अन्य हिस्सों से ब्रिटिश कैदियों के खिलाफ भारतीय कैदियों के युद्ध और वृक्षारोपण श्रमिकों के साथ गठित आजाद हिंद फौज या भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) का नेतृत्व किया।

When Was Indian National Army Founded:- August 1942, South East Asia

1st Head of Indian National Army’s:- आज़ाद हिन्द फ़ौज के पहले अध्यक्ष मोहन सिंह थे।  

When was Subhas Chandra Bose take’s over Indian National Army:-  Subhas Chandra Bose (1943-1945)

सुभाष चंद्र बोसे जी की प्रेरणा का श्रोत:- 

सुभाष चंद्र बोस का मानना ​​था कि भगवत गीता उनके लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत थी। स्वामी विवेकानंद की सार्वभौमिक भाईचारे, उनके राष्ट्रवादी विचारों और सामाजिक सेवा और सुधार पर उनके जोर ने उन्हें एक दृष्टि दी है।

यह भी पढ़ें:- Swami Vivekananda:- Top 12 unknown facts about Swami Vivekananda in Hindi

Subhas Chandra Bose’s Famous Slogan ‘Jai Hind’:-

‘जय हिन्द‘ सुभाष चंद्र बोस द्वारा दिया गया सबसे मशहूर और गौरवान्वित करने वाला नारा पुरे देश को दिया। 

‘जय हिन्द’ का नारा आबिद हसन ने दिया था। यह नारा सुभाष चंद्र बोस ने अपनी आज़ाद हिन्द फ़ौज को दिया था। 

Indian National Army’s Radio Station : आज़ाद हिन्द फ़ौज की रेडियो स्टेशन :-

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी ने जर्मनी में आज़ाद हिन्द फ़ौज का Radio Station की स्थापना की थीं।

सुभाष चंद्र बोस जी की मृत्यु का राज़ : Subhash Chandra Bose’s Death Mystery:-

सुभाष चंद्र बोसे जी की मृत्यु दुनिया के लिए आज भी एक रहस्य बानी हुई है।  नेताजी की मृत्यु की बात की जाए तो उनकी मृत्यु ‘3rd Degree’ जलने से हुई थी।  

उनके जलने कहानी  प्रकार है, जब उनका विमान जब जापान से उड़ा जो की जरुरत से ज्यादा भरा हुआ था वह taiwan के पास जाकर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।  

इसके बाद उनके समर्थकों ने इस बात को पूरी तरह झुठला दिया और इसके बाद से ही अनेक ‘Conspiracy Theory’ शुरू की , जो आज  रही थी।   

Conclusion:- 

नेताजी की मृत्यु कब हुई ये जानने की जरुरत नहीं है हमे।  नेताजी ने जो सन्देश हमे अपने जीवन से दिया है, उससे हमारे ज़हन में हमेश ज़िंदा रहेंगे।  उनका जीवन हमे  की हमे अपनी मातृभूमि की सेवा में आपने जीवन बिता देना चाहिए।  

परिस्तिथिया कितनी भी कठिन हो कभी भी हार नहीं मन्ना चाहिए।  ऐसे महँ इंसान को हमारी तरफ से प्रणाम। 

Swami Vivekananda:- Top 12 unknown facts about Swami Vivekananda in Hindi

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Swami Vivekananda Unknown Facts

Swami Vivekananda जी ऐसा नाम है जिन्होंने पूरे दुनिया के सामने भारत को विश्व गुरु बनाया था।

वह स्वामी जी ही थे जिन्होंने विश्व के समक्ष दुनिया को असल मायनों में समझा-या था की  हिंदुत्व क्या है?(What is Hinduism?) 

स्वामी विवेकानंद जी की ऐसी कई बातें जिसे हम नहीं जानते , या जिसे हम गलत समझते है। 

आज हम आपको स्वामी विवेकानंद जी से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताएँगे (Facts About Swami Vivekananda) जिसे आप  शायद ही जानते होंगे।

ये ऐसी बातें है जिसे जाने के बाद आप Swami Vivekananda जी से प्रेरित और प्रोत्साहित होंगे

1. Who is Swami Vivekananda?

Swami Vivekananda जी का जन्म January 12, 1863 को एक कुलीन परिवार में हुआ था। उनका असली नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। आज उन्ही महान संत के जन्म दिवस के उपलक्ष में पूरा देश ‘National Youth Day’ मनाता है।

2. विश्व को हिन्दू वेदांत का दर्शन समझाना :-

Swami Vivekananda जी ने ही पाश्यात समाज को ‘Hindu Vedanta Philosophy’ से अवगत कराया।

स्वामी जी अपने जीवन के बहुत कठिन समय से गुजर रहे थे जब उनकी मुलाकात, उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस जी से हुई थी

स्वामी जी ने आपने गुरु के शरीर त्यागने के बाद पूरे देश की यात्रा का मन बनाया।  उनका मानना था की एक सन्यासी को एक स्थान में कभी भी नहीं रहना चाहिए क्योंकि इससे समाज में मौजूद कुरीतिया उससे जुड़ने लगती है।  

स्वामी जी ने अपने गुरु के शरीर त्यागने के 15 दिनों बाद अपनी यात्रा की शुरुआत की थी।

3. स्वामी जी का परिवार; Swami Vivekananda’s Family :-

स्वामी विवेकानंद जी एक समृद्ध परिवार में पैदा हुए थे। उनके पिता श्री विश्वनाथ दत्ता एक Attorney थे।  उनकी माता जी का नाम भुवनेश्वरी देवी था। उन्हें मिलाकर वह 3 भाई थे।  उनकी एक बेहेन भी थी।  

उनके दोनों भाइयों का नाम क्रमशैः भूपेंद्र-नाथ दत्ता (1880-1961) और महेंद्र-नाथ दत्ता था।  उनकी बेहेन का नाम स्वर्णमोयी देवी (16 फरवरी 1932 को मृत्यु) था।  

उनके पिता की अचानक मृत्यु होने से उनका समस्त परिवार घोर गरीबी की चपेट में आ गया था।

गरीबी कुछ इस प्रकार बढ़ चुकी थी की स्वामी जी रात को यह बहाना बनाते थे की उनके दोस्त उन्हें खाने में बुलाया है ताकि उनका परिवार पेट भर खाना खा सके।  

परन्तु इस कारण उन्हें भूख की अत्यंत तेज़ पीड़ा से गुज़ारना पड़ता था।

यह भी पढ़े :- 16 Interesting Facts about Mahatma Gandhi : महात्मा गांधी से जुडी 16 रोचक बातें

4. विवेकानंद जी का पढ़ाई में रुझान :-

जब शिक्षाविदों की बात आई, तो नरेंद्र नाथ दत्त अंक पाने में महान नहीं थे। उन्होंने तीन विश्वविद्यालय परीक्षाएं लीं – प्रवेश परीक्षा, प्रथम कला मानक (एफए, जो बाद में इंटरमीडिएट आर्ट्स या IA) और बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) बन गया। अंग्रेजी भाषा में उनका स्कोर प्रवेश स्तर पर 47 प्रतिशत, एफए में 46 प्रतिशत और बीए में 56 प्रतिशत था।

5. स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहँस मुलाक़ात :-

एक वक़्त ऐसा भी था जब Swami Vivekananda जी spiritual crisis से गुज़र रहे थे।ऐसा इसलिए हो रहा था क्योंकि वह लम्बे समय से बेरोज़गार चल रहे थे।

तब उनकी मुलाकात 1881 में उनके गुरु श्री राम कृष्ण परमहंस जी से हुईं। उनकी यह मुलाकात उनके English Professor ने करवाई थीं।  

वह रामकृष्ण परमहँस ही थे जिन्होंने विवेकानंद जी को आध्यात्मिक स्पष्टता प्रदान की थी। वह रामकृष्ण जी से इतने प्रभावित हुए की वह उनके शिष्य बन गए।

विवेकानंद जी से जुड़े कुछ आया रोचक तथ्य :-

6. कैसे पड़ा नाम Swami Vivekananda?

वर्ष 886 में उन्होंने और रामकृष्ण जी के अन्य शिष्यों ने अपने गुरु के समान जीवन जीने की शपथ ली।और नरेंद्र नाथ दत्ता बन गए Swami Vivekananda .

7. बंगाली गीतों का संकलन :-

स्वामी जी वर्ष १८८७ में एक बंगाली गीतों को संकलित कर एक album निकला था जिसका नाम था ‘‘संगीत कालपतरू”। ऐसा वह जिस व्यक्ति की मदद उनका नाम था वैष्णव चरण बसक।

8. स्वामी विवेकानंद जी का ऐतिहासिक भाषण ; Swami Vivekananda Speech :-

11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद जी का शिकागो में बोला गया भाषण। (11 September 1893 Vivekananda Chicago speech) . जिसमें उन्होंने “शिव महिमा स्त्रोतम” के आधार पर मनुष्य के विभिन्न मार्गों की तुलना की है, आज भी याद किया जाता है .

9. स्वामी जी ने मठ कब छोड़ा?

स्वामी जी ने 1888 को मठ छोड़ कर सन्यासी जीवन को चुना। यही कारण रहा की अगले 5 सालों तक जीवन एक सन्यासी की तरह भिक्षा माँगकर व्यतीत किया था। इस यात्रा में उन्होंने बहुत सारे शिक्षक संस्थानों, मंदिरों और अन्य बड़े साधुओं से भेट की।

10. वेदांता सोसाइटी की स्थापना :-

स्वामी विवेकानंद जी ने जून 1899 में उन्होंने न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिसको में Vedanta Society की स्थापना की।

11. विवेकानंद जी की प्रमुख साहित्यिक रचना :-

संगीत कालपतरू’ (1887), ‘कर्म योग’ (1896), ‘राजा योग’ (1896), ‘वेदांता दर्शन’ (1897), ‘जनाना योग’ (1899), ‘माई मास्टर’ (1901), ‘वेदांता दर्शन: जनाना योग व्याख्यान’ (1902) और ‘वर्तमान भारत’ जो बंगाली भाषा में हैं।

12. स्वामी विवेकानंद जी ने कब शरीर त्यागा ? Swami Vivekananda Death :-

स्वामी विवेकानंद जी ने अपना शरीर 4 जुलाई 1902 को त्यागा था। शाम करीब 7 बजे वह अपने सहयोगियों समक्ष वैदिक कॉलेज की स्थापना के बारे में चर्चा करने के बाद अपने कमरे में गए। वह जाकर उन्होंने ध्यान मुद्रा लगाई और शरीर त्याग दिया।

How to invest money wisely? : समझदारी से पैसा कैसे निवेश करें?

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How to invest money

How to Invest Money Wisely? या अपने पैसों को सही जगह कैसे invest करे? ये ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर इंसान जानना चाहता है। Wuhan Virus के पूरी दुनिया को हिला ने के बाद हमे इस सवाल का जवाब जानने की व्याकुलता और भी बढ़ गई हैं।  

 हमारा भारतीय समाज पैसों को लेकर बहुत ही संकोची हैं। उसे सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं में  निवेश करना ज्यादा पसंद है।  परन्तु उनसे प्राप्त return आज की मेहंगाई को भी मात नहीं दे पा रहे  है। इसका मतलब यह है की वक़्त के साथ-साथ आपके पैसे की असल कीमत भी काम होती जाएगी।  

ऐसे में जो निवेश के अन्य साधन है उसमे ध्यान दे तो वह पैसों को दुगना तो करते है लेकिन बाजार जोखिमों के आधीन होने के अन्तर्गत उनमे जोख़िम बहुत ज्यादा होता है।  

ऐसे में हर इंसान  कुछ ऐसी स्कीम्स और तरीकों को तलाशते है जहाँ जोख़िम बहुत कम हो और मुनाफ़ा कई गुना हो।  परन्तु अफ़सोस की बात यह है की 25 दिन में पैसे डबल करने की कोई स्कीम्स नहीं होती। और कोई आपको ऐसे फंड या स्कीम बताता है, तो वह आपके पैसे को बहुत ही जोख़िम में डालने वाला होगा।   

आज की बढ़ती आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए सबके सामने एक ही सवाल खड़ा है, पैसों को निवेश किस तरह करें (How to invest Money). इस आर्टिकल में हम आपके सामने इसी सवाल का जवाब समझाने की कोशिश करेंगे।  

एक भारतीय होने के कारण अब तक कइयों के दिमाग में यह बात जरूर आ गई होगी की सोने में निवेश(Gold Investment) सबसे अच्छा और सबसे सुरक्षित होता है। आपके सवाल का जवाब भी आपको इस लेख में प्राप्त होगा।  

आइए जानते है TOP 5 INVESTMENT PLANS इसे पढ़कर आप अपने जोखिम के अनुसार अपने पैरो को सही तरीके से निवेश में लगा सकते है और एक  अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं।  

1. Direct Equity Investment or दलाल स्ट्रीट में सीधा निवेश |

सबसे पहले बात करते है share bazar में सीधे निवेश करने के तरीके पर। जब आप शेयर बाजार में निवेश करते है तब आप किसी कंपनी में हिस्सेदारी खरीद लेते है। अपने पैसों को सीधे बाज़ार में निवेशित करने से return तो बहुत ज्यादा मिलता है लेकिन जोखिम भी बहुत होता है।  

बाजार में निवेश करना आम आदमी के लिए आसान नहीं है। वह अपने दिनचर्या के काम में इतना फसा रहता है की शेयर मार्किट की बारीकियों को पढ़ सके और किस कंपनी में कब निवेश करना है यह जानकारी इकट्ठा कर सके, ये उसके लिए नामुमकिन सी बात है।  |

शेयर बाजार भी इस बात की guarantee नहीं देता की वह आपके पैसों को दुगना करेगा वह कभी-कभी इतना खतरनाक हो सकता है की वह आपके principal amount(जितनी निवेश राशि आपने डाली थी) को भी खा सकता है। इसलिए बाजार में निवेश करने के लिए एक इंसान को  बाजार के expert की मदद ले, न की सीधा निवेश करे।   

यह भी पढ़ें -: Mutual Fund में निवेश क्यों करना चाहिए ? 2021 के best mutual-fund कौन-कौन से हो सकते हैं?

2. Equity Linked Mutual Fund या इक्विटी लिंक्ड म्यूचुअल फंड |

Equity Mutual Fund वह फंड होते है जिसमे आपके द्वारा निवेशित फंड बाजार में सीधा निवेश करते है।  अगर बात करे SEBI (Securities and Exchange Board of India) के नियम अनुसार equity linked mutual fund में 65% हिस्से को सीधे बाजार में या उससे जुड़ीं किसी schemes में निवेश किया जायेगा।  

Equity linked fund की बात कहे तो यह 2 प्रकार के होते है, 1. Active Fund  2 Passive Fund. 

इनमें से Active Fund ऐसे होते है जो उस fund manager की काबिलियत पर बहुत हद तक मायने रखता है क्योंकि ऐसे funds का return मुख्यतः fund manager द्वारा चयनित stocks और उन stocks का stock market में उनका performance . 

और बात करे passive fund की तो ये ऐसे फंड होते है जो index में trade किये जाते है। यानि आप nifty 50 या BSE 500 के index में किसी भी index में invest कर सकते है।  यानि ऐसे फंड fund manager से ज्यादा बाजार की चल से ज्यादा प्रभावित होता है।  

3. Debt Mutual Fund या डेट म्यूचुअल फंड |

इस प्रकार के Mutual Fund उन लोगो के लिए सबसे अच्छे होते है, जो अपने पैसों के साथ जोख़िम नहीं उठाना चाहते है।  ये ऐसे फंड होते है जो बाज़ार के उतार-चढ़ाव से आपके पैसों में ज्यादा फर्क नहीं पड़ने देते।  इन फंड में निवेश करने से आपके पैसे धीरे-धीरे बढ़ते है और जोखिम भी काम होता है।  

इन फंड में जोख़िम काम होने का कारण है इन फंड में निवेश का तरीका।  इन फंड में जो भी पैसे आते है उसे निश्चित-ब्याज पैदा करने वाली प्रतिभूतियाँ में निवेश किया जाता है , जैसे – कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियां, ट्रेजरी बिल, वाणिज्यिक पत्र और अन्य मुद्रा बाजार साधन।

ऐसा नहीं है की ये फंड बाज़ार जोखिमों से बिलकुल नहीं जुड़े होते। ऐसे फंड से जुड़े कुछ जोख़िम इस प्रकार है – : ब्याज दर जोखिम और ऋण जोखिम ऐसे है।  

इसलिए किसी भी फंड में निवेश करने से पहले उनसे जुड़े जोखिम अच्छे से जरूर पढ़ ले।  

4. Public Provident Fund या सामान्य भविष्य निधि |

सामान्य भविष्य निधि सामान्य भारतीयों में सबसे ज्यादा प्रचलित निवेशित करने की व्यवस्थाओं में से एक है। PPF की सबसे आकर्षक बात है इसकी 15 साल लंबी अवधि में निवेश करने से इसमें Taxfree Compound Interest लगने से आपने निवेश के अंतिम 3-4 सालों में अच्छे पैसे बनाने का मौका।  और यह योजना सरकार द्वारा प्रायोजित होने के कारण सुरक्षा की संपूर्ण guarantee . 

PPF की सबसे आकर्षक बात है इसकी 15 साल लंबी अवधि में निवेश करने से इसमें Taxfree Compound Interest लगने से आपने निवेश के अंतिम 3-4 सालों में अच्छे पैसे बनाने का मौका। और यह योजना सरकार द्वारा प्रायोजित होने के कारण सुरक्षा की संपूर्ण guarantee देती है . 

इसमें निवेश करने से पहले एक बात समझ ले की सरकार इसमें मिलने वाले ब्याज दर को हर तिमाही की समीक्षा की जाती है।  

5. Gold Investment is the answer of How to invest Money?

Credit – Pixabay

सोने में निवेश करना हमारे भारत देश में हमेशा से बहुत प्रचलित रहा है।  हमारे देश की महिलाओं का सोने से लगाओ किसी से छुपा नहीं है। पुराने समय में सोने में निवेश करने के लिए ज्यादा विकल्प नहीं था। हमारे देश की महिलाएँ सोने के आभूषण से बहुत ज्यादा प्रभावित रहती है।  

सोने के आभूषण में निवेश करने से एक घाटा ये होता है की Making Charges के नाम से 10-12% काट लिया जाता है और अगर आप कोई आकर्षक कलाकारी के आभूषण बनवाना चाहते है तो यह 25 से 30% तक जा सकता है।  

आज कल सोने में निवेश करने के बहुत सरे विकल्प मौजूद है। आज कल बहुत सारे बैंक सोने के सिक्के बेचना शुरू किये है, बैंकों का सोने के निवेश को बढ़ावा देने से उसकी शुद्धता की गारंटी भी सुनिश्चित हो जाती है।  

आज कल सोने में निवेश के आधुनिक तरीके भी बाजार में मौजूद है। आप आज ऑनलाइन भी सोने में निवेश कर सकते है। आप सोने में ETF के द्वारा भी निवेश कर सकते है।  आप online जा कर भी सोने के तात्कालिक कीमत में निवेश कर सकते है।

यह सोने जो आप ऑनलाइन निवेश करते है बाजार की कीमत के साथ जुड़ जाता है और उस सोने की कीमत के साथ बढ़ता और घटता रहता है।  और यह आपको यह सुविधा भी प्रदान करता है की आप इसी gold bar में बदलवा कर आपने घर में सुरक्षित तरीके से मंगवा भी सकते है, उसके लिए आपको ३००-४०० रुपया तक खरचने हो सकते है।  

सोने में निवेश का एक और तरीका होता है जिसे हम Sovereign Gold Bond कहते है। इसके बारे में हम अपने अगले विशेषांक में विस्तार से लिखेंगे।  

इस तरह आज हम आपसे कुछ ऐसे फंड और योजनाओं के बारे में चर्चे किये जिसमे निवेश करने से आपके पैसों को आपके जोख़िम के हिसाब से निवेशित कर अपना भविष्य सुनिश्चित कर सकते है।  

Kartik Purnima 2020 :- Kartik Purnima कब है? क्यों मनाया जाता है ये त्यौहार?पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त कब है?

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Kartik Purnima kab hai

Kartik Purnima 2020 -: हमारे हिन्दू धर्म को अगर त्योहारों को धर्म कहा जाये तो गलत नहीं होगा।  हमारे धर्म के अनुसार हर साल में 12 पूर्णिमा होती है। परन्तु सभी पूर्णिमाओं में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। 

Kartik Purnima में गंगा में डुबकी या अन्य किसी भी पवित्र नदियों में डुबकी लगाने में विशेष महत्व है।  सिर्फ ये ही नहीं वस्त्र दान करना या कोई भी अच्छे काम को करने में कई गुना ज्यादा पुण्य प्राप्त होता है।  

आइये जानते है कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ी कुछ प्रचलित कथाएँ जानते है।  

वैष्णव मत के अनुसार कथा -:

वैष्णव समाज के लोगों के लिए Kartik Purnima का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि उनके अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने १० अवतारों में से पहला अवतार जो की मतस्य था . 

 प्रलय काल में वेदों की रक्षा के लिए इसी कार्तिक मास में लिया था। और वेदों की मानें तो इसी कार्तिक पूर्णिमा के दिन विष्णु जी अपने मत्स्य अवतार को त्याग कर बैकुंठ धाम वापस जाते है।  

इसलिए वैष्णव पंथ को मानने वालों के लिए कार्तिक  विशेष महत्व है।  

यह भी पढ़े -: Gandhi Jayanti – 16 Interesting Facts about Mahatma Gandhi : महात्मा गांधी से जुडी 16 रोचक बातें

शैव मत के लोगों के अनुसार कथा -:

Kartik Purnima का महत्व शैव भक्तों के लिए विशेष महत्व इसलिए रखता है , क्योंकि कथाओं के अनुसार इस दिन शिवजी ने तीनों लोकों में हाहाकार मचाने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था।  

इसी राक्षस के वध के बाद तीनो लोकों में धर्म की स्थापना एक बार फिर से की जा सकी।

इसी असुर के वध के बाद ही शिबजी को त्रिपुरारी के नाम से जाना जाने लगा।  

महाभारत  कथा के अनुसार Kartik Purnima का महत्व –

जब महाभारत के समाप्त होने के बाद पांडव बहुत दुखी हो गए थे।  उनके दुःख का कारण महाभारत के युद्ध में उनके रिश्तेदारों की असमय मृत्यु हो जाना था।  

उनके अनुसार अब उनके परिवार वालों की आत्मा को शांति कैसे मिलेगी? यह सब देखकर श्री कृष्ण जी ने उन सब को पितरों की शांति के लिए एक उपाय सुझाया।  

उन्होंने उन्हें एक विधि बताई जिसे कार्तिक शुक्ल अष्टमी  से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक करनी थी।  पांडवों ने उसे पूरी विधि को नियम अनुसार पूरा किया और कार्तिक पूर्णिमा के दिन गढ़ मुक्तेश्वर में तर्पण और दीप दान किया। 

यही कारण है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन से गढ़मुक्तेश्वर में तर्पण और दीप दान की परंपरा प्रचलित है। 

सिख धर्म के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा का महत्व।  

कार्तिक पूर्णिमा सिखों के लिए एक विशेष स्थान इसलिए रखता है क्योंकि इस दिन सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु गुरु नानक जी का जन्मदिन होता है।  

इसलिए सिख धर्म में इस दिन को प्रकाश पर्व के नाम से मनाया जाता है।  

२०२० में कब है Kartik Purnima का पर्व?

इस बार कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 30 नवंबर को पड़ रहा है।  इस दिन आप गंगा में डुपकी लगा कर विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है।  

इस दिन गुरु नानक जी का जन्मदिन होने के कारण यह दिन विशेष महत्व रखता है।  

कब है स्नान का शुभ मुहूर्त 

जैसा की हमने पहले ही चिन्हित किया है, इस बार पूर्णिमा ३० को है परन्तु इसमें एक बात ध्यान में रखने योग्य है की इसकी तिथि 29 तारीख को ही शुरू हो रही है और समाप्ति 30 को है।  

प्रारम्भ तिथि- 29 नवंबर रात 12 बजकर 47 मिनट से

समाप्त तिथि- 30 नवंबर रात 02 बजकर 59 मिनट तक 

गंगा स्नान – 30 नवंबर 

Mutual Fund में निवेश क्यों करना चाहिए ? 2021 के best mutual-fund कौन-कौन से हो सकते हैं?

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mutual fund

आज के इस दौर में जब चारों  तरफ Covid-19 नाम की महामारी फैली हुई है।  ऐसे में एक आम आदमी के सामने सबसे बड़ा सवाल जो सामने आता है वो है अपनी नौकरी और फिर है पैसों को सही जगह कैसे इन्वेस्ट करे।  

आज जो निवेश के पारंपरिक तरीका है जैसे कि Fixed Deposit(FD), Recurring Deposit(RD), या अपने पैसों को Savings Account में जमा रखना।  परंतु पिछले कुछ सालों में सरकारी और निजी बैंकों ने अपनी ब्याज दरों  में इतनी गिरावट ले आई है की उनकी ब्याज डरे तो Inflation Rate(महंगाई दर) से भी बहुत नीचे आ गई है।  

महंगाई दर से भी नीचे आने का मतलब है आपके पैसों की ताकत हर गुजरते दिन के साथ काम होती जा रही है।  

यानि की मान लीजिये आज जो चीज़ Rs १००/- में मिलती है वो आज से ५ साल बाद 5% की महँगाई दर से Rs 127.628   की मिलेंगी जबकि आज की तारीख़ में जितने बड़े Banks है उनकी Savings Account की Interest Rate 2.5-3.5% से दे रहे है यानि आपका Rs 100/- 5 साल बाद 3.5% की इंट्रेस्ट रेट के साथ Rs 118.75 हो जाएँगी।  यानि हर Rs 100/- में आपको लगभग Rs 9/- का घाटा।  

Fixed Deposit जो की हर आम आदमी की महँगाई से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार थी उनमे भी Interest Rate अधिकतम 5.5-6% चल रही है।  यानि की महंगाई से लड़ने और आपने पैसो की ताकत को बरक़रार रखने का सबसे कारगर तरीका भी खत्म। 

ऐसा नहीं है की ब्याज़ देर ज्यादा और कही नै मिलते परन्तु बाक़ी जगहों मेँ risk भी ज्यादा होता है जिससे एक आम नागरिक बचना चाहता है। 

आखिर में आता है Share Market जिसकी मदद से आप न सिर्फ महँगाई दरों की चिंता से मुक्त हो सकते है बल्कि अपनी पूँजी(Principal Amount) को कई गुना बढ़ा सकते है।  

परन्तु Share Market कोई बच्चो का खेल नहीं है।  इसके लालच के चक्कर में अच्छे-अच्छे डूब गए।  

तो क्या एक Middle-Class आम आदमी के पास कोई ऐसा विकल्प मौजूद नहीं हैं।  जो आपके पैसो को सुरक्षित रखने के साथ-साथ आपको एक अच्छी ब्याज़ दर भी प्रदान करें?

जी है ऐसा एक रास्ता है जो बाकि विकल्पों के मुकाबले सबसे सुरक्षित और सबसे अधिक ब्याज दर प्रदान करता है।  इसका नाम भी आप सबसे सुना ही होगा , म्यूचुअल फंड. 

म्यूचुअल फंड क्या है? What is a Mutual Fund ?

आज कल हर तरफ म्यूचुअल फंड सही है के कई विज्ञापन आपने आपने TV में देखे होंगे की आखिर क्या है म्यूचुअल फंड?

हम आपको इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते है।  वैसे हम अगर इसे सरल भाषा में  करे तो म्यूच्यूअल फण्ड निवेश करने का  तरीका है जहाँ एक कंपनी  अपने सभी ग्राहकों से उनकी निवेश की छमता अनुसार पैसे इकट्ठा करती है और इसे Stock Market चिन्हित कंपनियों के शेयर या सरकार द्वारा issue bonds में निवेश करती है।  

आपके पैसों को जो निवेश करता है उसे Fund Manager कहते है जो की Share Market का जानकार इंसान।   ऐसा नहीं है कि यह कोई एक ही व्यक्ति करता है , उनकी एक समिति सदस्यों  होती है   एक फण्ड मैनेजर  करता है।  

आपके द्वारा चुने गए निवेशित Fund में जो भी फायदा या नुकसान  वह सभी  सदस्यों  में बराबर बांटा जाता है। 

ऐसी सभी कंपनियां जो म्यूच्यूअल फंड्स चालत  भारत  सरकार की regulatory body SEBI(Securities and Exchange Board of India) के अंदर रजिस्टर्ड होती है।  

SEBI इस बात को सुनिश्चित करता  कंपनियां आपने खाता धारको न करे।  

मेरे  द्वारा दी गई जानकारी से आपको ये तो समझ आ गया होगा की आखिर म्यूचुअल फंड क्या है?

आपके मन में ये बात जरूर आ रही होंगी की म्यूचुअल फंड  के फायदे या नुकसान क्या-क्या है? आइये इसे एक-एक करके जानते है

Mutual Fund के फायदे क्या है? What are the benefits of Mutual Funds?

निवेश के लिए ज्यादा पैसो की जरुरत नहीं  -: म्यूच्यूअल फंड्स की बात जो मुझे व्यक्तिगत रूप से सबसे ज्यादा प्रभावित करती है वो है निवेश करने की राशि।  म्यूचुअल फंडs में कोई भी इंसान छोटी से छोटी रकम से शुरुआत कर सकता है।  यह राशि Rs 500 /- से शुरू होकर कितने ऊपर भी जा सकती है।  यह आम आदमी को ये ताकत देती है की वह आराम से अपनी Salary का एक सबसे छोटा हिस्सा निकल कर के भी म्यूच्यूअल फंड्स के फ़यदे बिना डरे उठा सकता है।  

निवेश करने की सरलता -: यह आपके पैसों को बाजार में निवेश करने का सबसे सरल और सुरक्षित तरीका है। आपके द्वारा निवेशित पैसे एक अनुभवी और बाजार के विश्लेषकों की देखरेख में होता है।  इन सबका मतलब यह है की बाजार को न जानने वाला भी एक साधारण व्यक्ति भी म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट कैसे करे? (How to invest in Mutual-Fund?) जैसे सवालों से घबराए बिना आसानी से निवेश कर सकता है।   

बाजार के जोख़िम से बचाव  -: जैसे हमने पहले भी बताया की जब आप अपने पैसो को म्यूचुअल फंडs के द्वारा निवेश करते है तो आपके पैसे एक बाजार जोखिम को समझने वाले Fund Managers के देख रेख में निवेशित किया जाता है।  यह आपको बाजार के उतार चढ़ाओ से बचने के लिए एक ढल की तरह काम आता है।  इसलिए अगर आप एक नए निवेशक है और बाजार में पैसे निवेश करना चाहते है तो म्यूचुअल फंड सबसे सरल और सुरक्षित विकल है।  

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश के तरीके बहुत आसान है  -: म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सबसे अच्छी बात यह है की इसमें कोई भी व्यवसाय वर्ग का व्यक्ति आसानी से निवेश कर सकता है।  इसमें निवेश आप दो तरह से कर सकते है। पहला होता है एक मुश्त राशि निवेशित करना या हर महीने एक निश्चित राशि निवेशित करते रहना।  इस तरह के आसान निवेश करने के विकल्प इसे निवेश करने का एक अच्छा तरीका मानते है।  

Types of Mutual Fund in India : Mutual Fund कितने टाइप के होते है?

आज बाजार में कई तरह के म्यूचुअल फंडs निवेश के लिए उपलब्ध है।  परन्तु मुख्यतः म्यूच्यूअल फंड्स के 5 प्रकार के होते है।  

Equity Fund (इक्विटी फण्ड) -: यह इस प्रकार के फंड्स होते है जिसमे फंड्स बाजार में निवेश करते है।  बाजार में निवेश करने का मतलब है की वह सीधे कम्पनीज के शेयर में निवेश करता है।  यह निवेश थोड़ा जोखिम भरा होता है।  इस प्रकार के फंड्स में लम्बी अवधि के लिए निवेश करना चाहिए।  इस फंड्स में एक व्यक्ति को काम से काम 5 से 10 साल के लिए निवेशित करना चाहिए। इस फंड के अंदर Large-Cap Fund, Mid-Cap Fund और Small-cap Funds आते है।  

Hybrid म्यूचुअल फंड (हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड) -: इस म्यूच्यूअल फंड्स में Fund Manager निवेशकों के पैसों को अलग -अलग categories में निवेशित करते है।  इस फंड्स में कुछ पैसे बाजार में चिन्हित कम्पनीज के शेयर में, कुछ सरकार द्वारा प्रायोजित स्कीम जिसे डेट भी कहते है , उसमे निवेश करता है।  इस प्रकार के फंड्स आपके निवेश में विविधता प्रदान करते है।  इस प्रकार के फंड में जोखिम कम होता है परन्तु return भी काम मिलते है।  इस फंड्स की विविधता को देखते हुए SEBI ने इसे 7 प्रकार के Hybrid Funds के तहत परिभाषित करने की कोशिश की है।  यह 7 प्रकार के फंड्स कुछ इस प्रकार है -:

  • Aggressive Hybrid Fund 
  • Conservative Hybrid Fund 
  • Balanced Hybrid Fund 
  • Multi-Asset Allocation
  • Balanced Advantage 
  • Arbitrage Fund
  • Equity Saving Scheme 

इस प्रकार के फंड्स की सबसे ाची बात ये होती है की ये आपके पैसो को बढ़ने के साथ-साथ एक स्थिरता भी प्रदान करते है।  

Solution Oriented म्यूचुअल फंड (सलूशन ओरिएंटेड म्यूच्यूअल फण्ड) -: यह स्कीम उन लोगों के लिए है जो किसी एक खास लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अपने पैसों को निवेशित करना चाहते है।  यह लक्ष्य बच्चे की शादी, उनकी पढ़ाई या अपने रिटायरमेंट को लक्ष्य मानते हुए निवेशित हो सकते है।  यह स्कीम Long-Term इन्वेस्टमेंट करने वाले लोगों के लिए बहुत ही आकर्षक स्कीम है।  इस स्कीम में आपके पास 3 साल का Lock-in period हुआ करता था जिसे अब SEBI ने ५ साल कर दिया है।  

Gilt म्यूचुअल फंड ( गिल्ट म्यूच्यूअल फण्ड) -: यह निवेश का सबसे सुरक्षित तरीका है।  इस फंड के अंदर सभी स्कीमो में निवेशक का पैसा सरकार द्वारा प्रायोजित स्कीम्स में लगाया जाता है। सरकार द्वारा प्रायोजित schemes में पैसा लगाने के कारण आपका पैसा पूर्णतः सुरक्षित रहता है।  यह फण्ड ‘धीरे चलो सुरक्षित पहुँचो’ की तर्ज पर काम करता है।  

Conclusion -: 

म्यूचुअल फंड उन लोगो के लिए एक सबसे ाचा और सुरक्षित विकल है जो बाजार में निवेश तो करना चाहता है परन्तु उसके पास बाजार को समझने और पढ़ने का समय नहीं है।  म्यूचुअल फंड किसी भी व्यक्ति की लम्बी अवधि के लक्ष्य को पूर्ण करने की एक बहुत ही अच्छी व्यवस्था है।  

Gandhi Jayanti – 16 Interesting Facts about Mahatma Gandhi : महात्मा गांधी से जुडी 16 रोचक बातें

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Mahatma Gandhi ji

Mahatma Gandhi ji जिनका असली नाम मोहन दास करम चंद गाँधी था। आज हम हमारे राष्ट्रपिता के बारे में कुछ अनसुनी और अन कही बातों के बारे में जानेंगे। 

  1. Mahatma Gandhi ji का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था। यह दिन पूरी दुनिया में International Day of Non-Violence के तौर में मनाया जाता है।
  1. गाँधीजी को महात्मा की उपाधि 1914 में गुरूदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर ने दी थीं।  
  1. Mahatma Gandhi ji को कोई अगर सिर्फ आज़ादी और अहिंसा के लिए किये गए कार्य के लिए जनता है तो वह उनके बारे में अंश मात्र भी नहीं जनता है। गाँधीजी ने नागरिक अधिकार, छूट-अछूत, साफ़-सफाई और भी आया कई चीज़ो में भारत के उत्थान में अपना सहयोग किया था।   
  1. Mahatma Gandhi ji ने अपनी वक़ालत की पढ़ाई London से पूरी की थी।  वह आपने शिक्षकों के बीच अपनी ख़राब लिखाई को लेकर बहुत प्रसिद्ध थे।  
  1. गांधी और उनकी पत्नी की पहली संतान थी जब वह 16 साल के थे। कुछ दिनों बाद उस बच्चे की मृत्यु हो गई, लेकिन दंपति को ब्रह्मचर्य का पालन करने से पहले चार बेटे हुए।
  1. Mahatma Gandhi ji South Africa में भी 21 साल रहे।  वहाँ भी उन्हें कई बार नस्लवाद के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए कई बार जेल जाना पड़ा था।  
  1. भारत में 53 प्रमुख सड़कें (छोटे लोगों को छोड़कर) हैं, और भारत के बाहर 48 सड़कें हैं जो उनके नाम पर हैं. 
  1. Mahatma Gandhi ji को Nobel Peace Prize के लिए 5 बार नामाँकित किया गया था। लेकिन उन्हें कभी भी ये पुरस्कार प्रदान नहीं किया गया। उन्हें वर्ष 1937, 1938, 1939, 1947 में इस पुरस्कार के लिए नामाँकित किया गया था।
  2. आगे चलकर Nobel Peace Committee ने इस बात का खेद सार्वजनिक मंच पर किया की वह उन्हें इस पुरस्कार से वंचित रखा गया।   

यह पढ़े – भारत में किताब को Ban करने के पीछे क्या कारण है ?

  1. Mahatma Gandhi ji के अधिकांश अवशेषों को उनके द्वारा पहने गए कपड़ों के साथ ही गांधी संग्रहालय, मदुरै में संरक्षित रखा गया है. 
  1. 1927 में महात्मा गांधी की आत्मकथा ‘An Autobiography of My Experiments with Truth’, 1999 में हार्पर कॉलिंस पब्लिशर्स एलएलसी द्वारा ’20 वीं शताब्दी की 100 सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पुस्तकों’ में से एक घोषित की गई थी।
  2. गाँधीजी एक Irish उच्चारण के साथ अंग्रेजी बोलते हैं क्योंकि उनके पहले शिक्षकों में से एक एक आयरिश है।
  1. हमें लगता है, आप मुद्रा पर गांधी की छवि को देखकर मुस्कुराएंगे। हममें से अधिकांश मानते हैं कि चित्र खींचा या चित्रित किया गया है। लेकिन तथ्य यह है कि, यह 1946 में पूर्व वायसराय हाउस में एक गुमनाम फोटोग्राफर द्वारा ली गई एक मूल तस्वीर थी जो अब भारत के राष्ट्रपति भवन में स्थित है। छवि को दर्पण छवि में विकसित किया गया है और सभी भारतीय मुद्रा नोटों पर मुद्रित किया गया है।
  1. ग्रेट ब्रिटेन ने उनकी मृत्यु के 21 साल बाद उन्हें सम्मानित करते हुए एक डाक टिकट जारी किया। ग्रेट ब्रिटेन वह देश था जिसके खिलाफ उन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी थी।
  1. गांधी को फोटो लेने से नफरत है। दिलचस्प बात यह है कि वह उस दौरान सबसे ज्यादा फोटो खींचने वाले व्यक्ति हैं।
  2. सुभाष चंद्र बोस ने 1944 में गांधी को सिंगापुर रेडियो पर ‘देश पिता’ (राष्ट्रपिता) कहा। इसके बाद, सरोजिनी नायडू ने भी 1947 के सम्मेलन में इसी शीर्षक का उल्लेख किया। यह शीर्षक पूरे देश में बहुत लोकप्रिय है, हालांकि भारत सरकार ने कभी भी गांधी को आधिकारिक रूप से इस तरह का कोई उपाधि प्रदान नहीं की।

महात्मा गांधी द्वारा प्रसिद्ध उद्धरण -:

  • “आपको वह परिवर्तन होना चाहिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।”
  • “खुद को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप खुद को दूसरों की सेवा में खो दें”
  • “किसी राष्ट्र की महानता का अंदाजा उस तरह से लगाया जा सकता है जिस तरह से उसके जानवरों के साथ व्यवहार किया जाता है।”

 

Lachit Borphukan : The Hero of Saraighat Battle 1671.

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Lachit Borphukan

Lachit Borphukan एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही असम का कण-कण जोश और गर्व से झूम उठता है। यह हमारे भारत देश की बदकिस्मती ही कहेंगे की ऐसे महान और कुशल नेतृत्व करता को असम से बाहर बहुत काम लोग ही जानते है।

Lachit Borphokan को एक ऐसे महान योद्धा के रूप में याद किया जाता है। जिसने अपने कुशल और निडर नेतृत्व की बदौलत मुग़ल साम्राज्य को भी अपने सामने घुटने टेकने में मज़बूर कर दिया था। 

आइये जानते है इस महान योद्धा के बारे मे और उस ऐतिहासिक लड़ाई जिसके बाद Lachit Borphukan इतिहास में अमर हो गया।   

Lachit Borphukan जी का प्रारंभिक जीवन -:

Ahom Empire’s Symbol

Lachit Borphukan का जन्म 16वी शताब्दी के प्रारम्भ में हुआ था।उनका असली नाम Lachit Deca था। उनके पिताजी का नाम Momai Tamuli Borbarua था।

 इनके पिता Ahom साम्राज्य की सेना में Commander-in-Cheif के पद में तैनात थे। इनकी माता का नाम Kunti Moran था। जिस वक़्त यह पैदा हुए तब उस साम्राज्य के राजा Pratap Singha थे।  

Lachit Borphukan को मानविकी, स्वदेशी शास्त्र और सैन्य कौशल में शिक्षित किया गया था . उन्हें सेना प्रमुख बनाने से पहले बहुत से प्रमुख पद संभालने का मौका मिला जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।उनके द्वारा सुशोभित पद कुछ इस प्रकार है – :

  • उन्हें ‘Soladhara Barua’ का पदभार सम्भाले का मौका मिला जिसका मतलब होता है साम्राज्य का झण्डा पकड़कर चलने वाला। यह पद ‘निजी सचिव’ के बराबर का पद होता है। 
  • उन्हें Ghora Barua का अधीक्षक बनाया गया। जिसका मतलब होता है ‘Cheif of Stable of Royal Horses’.
  • रणनीतिक सिमुलगढ़ किले के कमांडर
  • उन्हें रणनीतिक सिमुलगढ़ किले के कमांडर के रूप में नियुक्त किया गया।  
  • उन्हें Chakradhwaj Singha.की सेना में Dolakaxaria Barua(Royal Household Guard) के अधीक्षक का पदभार दिया गया . 

इन सब पदों को सुशोभित करने के बाद ‘Raja Chakradwaj Singha’ ने Lachit Borphukan को Ahom सेना की कमान संभालने और Guwahati को मुग़ल साम्राज्य के चंगुल से आज़ाद करने का कार्य सौपा।  Ahom साम्राज्य की परंपरा अनुसार उनको सोने की तलवार भी भेट की गई।  

असम राज्य इस्लामिक शासन से क़रीब 1662 के आस-पास बहुत खतरा महसूस करने लगा था।  जब मुग़लों ने Ahom साम्राज्य की राजधानी Gargaon में आक्रमण किया।  तब उस आक्रमण का नेतृत्व Mir Jumla कर रहा था।  

उस वक़्त के राजा Jayadev Singha ये जानते थे की मुग़लों की विशाल सेना का सामना सीधी लड़ाई तो, वह ऊंची टीलों जाकर Gorilla Warfare शुरू करदी।  यह लड़ाई बहुत दिनों तक चलती  रहीं जो मुग़ल सोचकर नहीं आये थे।  

इस लड़ाई  परिणाम नहीं निकला और मुग़लों और Ahom राज्य के  बीच समझौता तय किया गया। इस समझौते के तहत Ahom राज्य को अपनी जमीन का हिस्सा मुग़लों को सौपना पड़ा।  यह Ahom राजा के लिए बहुत ही बड़ा झटका था।  

इस समझौते से राजा जयदेव सिंघा बहुत आहात हुए और बीमार पड़ गए।  अपनी मृत्यु से पहले आपने राज्य के होने वाले राजा यानि Chakradwaj Singha से Ahom राज्य पर हुए हमले का बदला लेने का वडा किया।  उनकी मृत्यु वर्ष 1662 को हो गई।   

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सेना प्रमुख बनने के बाद की चुनौतियाँ -:

 Lachit जब Borphokan बने तब Ahom सेना को मज़बूत बनाने की चुनौती उनके सामने खड़ी थी। उनके सामने मुग़ल साम्राज्य जैसी बड़ी सेना को हारने का ज़िम्मा था। मुगलो से हारी हताश सेना में जोश भरना और अंदर जीत की आग जलाना था।  

उन्होंने सारा ध्यान आपने किलों को मजबूत करने में लगाया। उन्होंने हथियार बनाने में भी बहुत ध्यान दिया।  

उनको यह पता था की अगर उनकी सेना को मुग़लों को हराना है तो अपने किलों और हथियार को पूर्ण तरीक़े से सशक्त करना होगा। उन्हें पता था की एक दिन मुग़लों के साथ निर्णायक युद्ध के समय यह तैयारियाँ उनके काम आएँगी।  

Saraighat का वो युद्ध जिसने Lachit Borphukan को इतिहास में अमर कर दिया।  

Lachit Borphukan ने अपने कुशल नेतृत्व से november 1667 तक मुग़लों को असम के बचें हुए हिस्सों से भी बाहर निकाल दिया।इस हार से दिल्ली में बैठा मुग़ल बादशाह आलमगीर तिल मिला उठा और अपनी एक बहुत बड़ी सेना जिसका नेतृत्व राजा Ram Singh Kachwaha कर रहा था, उसको असम भेजा।  

 राजा Ram Singh Kachwaha के साथ लगभग 71000 मुग़ल सैनिकों की विशाल सेना थी।  

इस सेना में 4000 सैनिक, 1500  सम्राट की गृहस्थी घुड़सवार सेना , 500 शाही बंदूक धार, 30000 की पैदल सैनिक, 15000 तीरंदाज और बाकि 15000 अतिरिक्त  घुड़सवार और पैदल सैनिक।  

वहीं दूसरी ओर Lachit जी की सेना मुग़लों के सामने बहुत ही छोटी दिखाई दे रही थी।  

Saraighat का युद्ध  Feb 1671  में शुरू हुआ यह दोनों प्रतिद्वंद्वी सेनाओं के बीच कई छोटे-मोटे झगड़ों की परिणति थी। जबकि मुग़ल सेना राजा Ram Singh के नेतृत्व में Ahom राज्य से युद्ध वर्ष Feb 1669 से लड़ रही थीं.   

Lachit Borphukan ने सेना का नेतृत्व लड़ाई में सबसे आगे रहकर किया। उन्होंने मुघलो को लगभग लड़ाई के हर छेत्र में धूल चटाया था।  अपनी हार को सामने देखते हुए मुग़ल राजा औरंगज़ेब में राजनैतिक रास्ता लेने का मन बनाया उसने अपने सेना प्रमुख से Ahom राज्य के साथ संधि कर लेने का प्रस्ताव भेजा। परन्तु मुग़ल शासक ये भूल गया की यह अब बदला हुआ और मजबूत Ahom राज्य है . 

Lachit Borphukan ने  आपने साथी Liutenent की बात मानते हुए मुग़लों से समझौते के सरे प्रस्तावों को सिरे से नकार दिया। Lachit और उनके सैनिकों का मानना था की समझौता मुग़लों का सिर्फ़ एक छल और दिखावा है. 

आख़िर Saraighat की लड़ाई का भी दिन आया , परन्तु उस दिन Lachit इतने बीमार थे की बिस्तर से उठ भी नै सकते थे।  परन्तु प्रणाम है उस महान योद्धा को जिसने अपनी धरती  रक्षा करने के लिए आपने वैध और आपने प्राणो की  बगैर सीधे मैदान  लोहा लिया।  

यह युद्ध  पूर्णतः पानी में लड़ा गया था।इस युद्ध में Lachit और उनकी सेना आंधी की तरह मुग़ल सेना पर टूट पडी।  सेना अध्यक्ष बनने के बाद की गई सारी तैयारी और अपने युद्ध कौशल को Ahom साम्राज्य ने इस एक युद्ध में लगा दिया।  लाचित Borphukan द्वारा किये गए नेतृत्व ने आग में घी का काम किया।  

Ahom सेना ने मुग़लों को बुरी तरह हरा दिया।  

इस युद्ध को जीतकर और Ahom साम्राज्य के वैभव को वापिस हासिल कर, Lachit Borphukan की बीमारी के कारण लगभग एक साल बाद मृत्यु हो गई।    

ऐसे महान योद्धा,नेतृत्वकर्ता और अपनी मातृभूमि में सर्वस्व निछावर  योद्धा को हमारा प्रणाम।  

Ganesh Chaturthi 2020 :- Kab hai Ganesh Chaturthi : कब है गणेश चतुर्थी.

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Ganesh Chaturthi 2020 : 21 August की रात 11 बजकर 02 मिनट से  चतुर्थ तिथि शुरू होकर 22 August  शाम 7 बजकर 57 मिनट में समाप्त हो जाएगा।हमारे शास्त्रों और पुराणों में यह उल्लेख है की गणेश जी का जन्म सुबह के समय हुआ था। इसलिए गणेश जी की पूजा चतुर्थी के दिन सुबह की जानी चाहिए।  

गणेश जी को हमारे हिन्दू धर्म में प्रथम पूज्य देव होने का दर्जा प्राप्त है।हमारे घरों या जहाँ हम काम करते है वहाँ जब भी कोई पूजा होती है वहाँ गणेश जी को सबसे पहले प्रणाम करतें है।जब गणेश चतुर्थी आती है, तो पूरा हिंदुस्तान ‘गणपती बाप्पा मोरया’ का जय कारा चारों ओर फ़ैला रहता है।  

वैसे हिन्दू धर्म में भाद्र मास व्रतों और त्योहारों का होता है।हमने अभी-अभी कान्हा जी के जन्मोत्सव को धूम-धाम से मनाया हैं और अब हम गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाने के लिए तैयार बैठे है,भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थ को मनाया जाता है।  

Ganesh Chaturthi इस साल कब पड़ रही है और शुभ मुहूर्त क्या है?

Ganesh Chaturthi
Credit – Internet

Ganesh Chaturthi 2020 में 22 August को पड़ रही है। इस पवित्र दिन ही नहीं विग्नहर्ता की पूजा हर तीझ-त्यौहार को सबसे पहले किया जाता है। क्योंकि गणेश जी विघ्नहर्ता है।हर शुभ कार्य को शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।  

21 August की रात 11 बजकर 02 मिनट से चतुर्थ तिथि शुरू होकर 22 August शाम 7 बजकर 57 मिनट में समाप्त हो जाएगा।हमारे शास्त्रों और पुराणों में यह उल्लेख है की गणेश जी का जन्म सुबह के समय हुआ था।इसलिए गणेश जी की पूजा चतुर्थी के दिन सुबह की जानी चाहिए।  

इस साल गणेश चतुर्थी में गणेश जी की पूजा का समय 11 बजकर 6 मिनट से लेकर 1 बजकर 42 मिनट तक का निकाला गया हैं।  

क्यों मनाया जाता है Ganesh Chaturthi का त्यौहार?

Ganesh Chaturthi का दिन गणेश जी के बाल्य रूप की पूजा की जाती है। यह मान्यता है की यहीं वो दिन हैं जिस दिन पार्वती जी के द्वारा गणेश जी की उत्पत्ति हुई थीं। इसलिए इस दिन गणेश जी के बाल्य रूप को घर में विराजमान कराना चाहिए।और भगवान श्री गणेश आपके सरे विघ्न हर लेंगे।  

Ganesh Chaturthi में कैसे करें गणेश जी की पूजा?

Ganesh Chaturthi के दिन भगवान श्री गणेश जी की नई प्रतीमा को अपने घर में विराजमान कराएं। उसके बाद गणेश जी  की 10 दिनों तक पूजा, आरती कीर्तन करते रहना चाहिए।सुबह स्नान करके गणेश जी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाना चाहिए। फूल और हार उनको अर्पण करे। एक दिन में तीन बार भगवन के सामने दीपक जलाये करे।  

भगवान गणेश जी को भोग बहुत प्रिय है ख़ासकर मोदक के लड्डू इसलिए भगवान गणेश को लड्डू जरूर चढ़ाइए।इन 10 दिनों तक गणेश जी की चालीसा पढ़ना चाहिए और आरती करनी चाहिए। 

Ganesh Chaturthi के दिन चाँद क्यों नहीं देखना चाहिए?

यह है प्रचलीत कथा।  

हमारे कथाओं के अनुसार एक बार श्री कृष्णा जी ने गणेश चतुर्थी की रात को गलती से रात को चाँद देख लिया। इस क़ीमत उन्हें ऊपर झूठे हत्या के आरोप से चुकानी पड़ी थी। इस आरोप को निराधार साबित करने के लिए श्री कृष्णा जी बहुत पड़ी थी। 

इस विषय में जब नारद जी से श्री कृष्णा जी ने पूछा तब नारद जी ने इस कथा का वर्णन किया – 

यह आरोप भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चांद को देखने के कारण गलत आरोप लगता है। उस दिन जो भी व्यक्ति चाँद देखता उसपे गलत आऱोप का कलंक लगता है।  ऐसा इसलिए है क्योकि एक बार चँद्रमा को अपने रूप में बड़ा अभिमान हुआ। गणेश जी एक बार जा रहे थे, चन्द्रमा ने उनके गजमुख और लबोदर रूप देखकर है  उनका मज़ाक उड़ाया था। इससे गणेश क्रोधित होकर चँद्रमा को श्राप दे दिया। उन्होंने कहा जो भी तुझे देखेगा  उसपे गलत आऱोप का कलंक लगेगा और धीरे-धीरे तेरी चमक ख़त्म हो जाएगी।  

इससे डरकर चँद्रमा शीग्र ही शिवजी के पास गए और विनती की,उन्हें इस श्राप से मुक्त किया जाए।तब शिवजी ने उन्हें करके प्रसन्न करने को कहा।चँद्रमा ने बहुत ही दिल से गणेश जी की तपस्या की जिससे गणेश जी प्रसन्न हुए और उन्होंने उनसे कहा की मई आपने श्राप पूरा तो ख़त्म नहीं कर सकता लेकिन तुम हर 15 दिन बाद पूर्ण रूप से जगमगाओगे ये आशीर्वाद देता हु।  

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