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इन २१ कामों को रोजाना करने से खुश होती हैं माता लक्ष्मी, बरसाती हैं खास कृपा

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Mata Lakshmi ko Khus karne ke upay

Mata Lakshmi ko Khus karne ke upay :- आज हम आपको बताएंगे की क्या कारण है जो हमारे घर में धन आता तो है ,पर बचता नहीं है ,किस वास्तु दोष के कारण घर में बरकत नहीं हो पा रही है ,धन टिक रहा नहीं है |

सबसे पहले हम ये जानते है की धन बचाने का करक ग्रह कौन सा है? इसके अलावा अगर आपके घर में धन नहीं बचता है या नहीं आता है तो इसके लिए कई ऐसे चीज़ है जिसका हमे ध्यान रखना चाहिए |

क्योकि बहुत बार ऐसा होता है,की हमारे घर में धन की आगमन तो होती है पर वो कई व्यर्थ जगह खर्च हो जाता है या कोई ऐसी दिक्कत का सामना करना पड़ता है जहा हमारे पैसे पानी की तरह फिजूल खर्ची में चली जाती है तो आज हम आपको कुछ ऐसे वास्तु से सम्बंधित उपाय बताएंगे जिसे आपके घर में धन की बरसात हो और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहे |

Mata Lakshmi ko Khus karne ke upay :- २१ काम माता लक्ष्मीजी जी को ख़ुश करने के उपाए कुछ इस प्रकार है

१. धन को सही जगह नहीं रखना :- अगर आप अपने धन को या अपने तिजोरी को सही जगह नहीं रखते है तो इसे भी धन की बचत नहीं हो पाती है |

२. कभी कभी बिना सलाह के पन्ना या पीला पुखराज को पहना जिसे हमे धन की हानि का सामना करना पड़ता है |

३. हमे वास्तु के अनुसार पानी का निकासी हमेसा पूर्व या उत्तर की तरफ से करना चाहिए अगर दक्षिण या पश्चिम से होता है तो ये भी कारण धन हानि का होता है |

४. Mata Lakshmi ko Khus karne ke upay :- यदि घर में नल से अपनी टपकता है तो धन भी पानी की तरह बह जायेगा |

५. अगर घर में कोई टूटे हुए बरतन और शिशा हो तो उसे निकल देना चाहिए उसे रखने से भी धन की हानि होती है | और नकारात्मक ऊर्जा भी घर में प्रवेश करती है |

६. धन का सम्मान करना चाहिए जितनी जरुरत हो उतनी ही खर्च करना चाहिए नहीं तो धन हवा के साथ उड़ने वाली धूल की भांति उड़ जाएगी |

७. हमे कभी भी सूर्य उदय होने के देर बाद भी नहीं सोना चाहिए | कई लोग सूर्य उदय होने बाद भी सोते रहते है चाहे स्त्री हो या पुरुष दोनों को सुबह जल्दी उठ कर सूर्य देव का स्वागत करना चाहिए अगर आप जल्दी नहीं उठ सकते तो आप एक नियम बना ले की सूर्य निकलने के पहले उठे | क्योकि देखा गया है जो व्यक्ति सुबह जल्दी उठता उसे लक्ष्मी माँ उस पर बहुत प्रसन्न रहती है |

८. हम जिस पर्स में पैसे रखते है चाहे स्त्री हो या पुरुष उन्हें अपने पर्स को हमेसा साफ सुथरा जो कटा फटा न हो वैसा रखना चाहिए और हर दीपावली को अपना पर्स बदलना चाहिए |

९. नारद पुराण में लिखा हुआ है की जहाँ साफ सफाई नहीं होती है वह लक्ष्मी निवास नहीं करती है तो हमे अपने घर को हमेसा साफ सुथरा रखना चाहिए |

१०. Mata Lakshmi ko Khus karne ke upay :- गुरुवार और मंगलवार के दिन कभी भी किसी को पैसा न किसी को दें न खुद कभी कर्ज ले या कोई भी घर का सामान नहीं देना चाहिए मन जाता है की गुरुवार का दिन लक्ष्मी जी का दिन होता है|

११. जब हम शाम को पूजा करते है या दिया बत्ती करते है तो भी कभी किसी को पैसे नहीं देना चाहिए न खुद को कभी खर्च करना चाहिए|

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१२. मंगलवार को स्त्री बाल नहीं धोना चाहिए ना कटवाना चाहिए या पुरुष को हजामत कभी भी नहीं करवाना चाहिए |

१३. जब भी सुबह रोटी बनाये तो पहली रोटी गाय को जरूर देना चाहिए रात की जो अंतिम रोटी होती है उसे कुत्ते को और थोड़ा सा चावल या रोटी छत्त पर जरूर रख दें ताकि चिड़िया या कौवा खा सके ऐसा इसलिए हमे करना चाहिए क्योकिं ऐसा करने से परमात्मा खुश होते है और ये कहना भी है उनका की जो मनुष्य बेजुबान जीव जंतु का पेट भरता है उस पर मेरी कृपा हमेसा बनी रहती है हमे हमेसा ये काम जरूर करना चाहिए |

१४. Mata Lakshmi ko Khus karne ke upay :- अमवश्या,पूर्णिमा,या शनिवार के दिन माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने का दिन कहा जाता है इस दिन घर के मुख्य द्वार को अच्छे से साफ करके दरवाजे के दोनों तरफ चन्दन से या रोली स्वस्तिक का चिन्ह बनाये इसे माँ लक्ष्मी का आगमन होता ही होता है | और घर के मुख्या द्वार पर एक ताम्बे के लोटे में जल भर कर जरूर रखना चाहिए और शाम को मुख्या द्वार पर दिया अवश्य जलना चाहिए |

१५.हमे अपने रसोई घर को रात में साफ सुथरा रखना चाहिए कोई भी टूटे बरतन का इस्तमाल नहीं करना चाहिए |जूठे बरतन कभी भी रसोई घर में नहीं रखना चाहिए रत को धो कर ही सोये | रसोई घर में पिले कपडे में थोड़ी सी हल्दी को बांध कर रख से धन की बचत होती है |

१६.कुंडली में बुध ग्रह और बृहस्पति ग्रह को मजबूत बनाये | धन बचत के कारक ग्रह है बुध और बुध ग्रह ही हमारे धन के आने खर्च को नियंत्रित करता है और इसके साथ-साथ शुक्र बृहस्पति और मंगल ग्रह भी धन के लिए कारक ग्रह है

१७.बिना किसी सलाह के कोई भी पन्ना या पीला पुखराज का पत्थर नहीं धारण करना चाहिए|

१८. Mata Lakshmi ko Khus karne ke upay :- अपने धन रखने वाली तिजोरी या अलमीरा को हमेसा उत्तर या पूर्व की तरफ खुलने वाली दिशा में रखना चाहिए | क्योकि इस दिशा में भगवान कुबेर जी का वास होता है|

१९.तिजोरी के ऊपर कोई भी भारी भरकम सामान नहीं रखना चाहिए या तिजोरी में कोई भी डब्बा नहीं रखना चाहिए | क्योकि ऐसा करने से वास्तु के अनुसार घर की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है |

२०.यदि आप अपने धन को बढ़ाना चाहते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार अपने तिजोरी के सामने एक शिशा लगवा दे ऐसा करने से जब भी आप तिजोरी खोलेंगे तो आपको धन हमेसा दोगुना ही दिखेगा और ऐसा करना हमेसा कारीगर साबित हुआ हैं |

२१. Mata Lakshmi ko Khus karne ke upay :- अगर कभी आपको लगे की घर में धन की परेशानी होनी शुरु हो रही है तो आप अपने घर या अपने कार्य स्थान के उत्तर दिशा पर एक बार जरूर नजर डाल क्योकी अगर उत्तर दिशा में कोई कूड़ा या बिना वजह के कोई वास्तु पड़ी हुई मिले तो उसे तुरंत हटाना चाहिए क्योकी इसका सीधा असर धन पे जाता है | न कभी उत्तर दिशा में सीढ़ियां बनवाना चाहिए ऐसा करने से हमारे घर के धन संपत्ति पर असर पड़ता है तथा आर्थिक तंगी होनी शुरू हो जाती है |

Written By :- Priya Mishra

दैनिक दिनचर्या के 16 नियम कौनसे है ? और हिन्दू धर्म में मानव दिनचर्या में इसका क्या महत्व है?

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दैनिक दिनचर्या के 16 नियम

नियम क्या है?

दैनिक दिनचर्या के 16 नियम :- पहले हम ये जानते है किसी साधारण इंसान को संस्कृत करना या शुद्ध करना किसी भी सधारण व्यक्ति विशेष क्रियाओं द्वारा उत्तम बनाना ही संस्कार कहलाता है |

संस्कृत भाषा का शब्द है संस्कार मन ,वचन, कर्म और शरीर को पवित्र करना ही संस्कार है |   संस्कार मनुष्यों के लिए परम आवश्यक है संस्कार ही एक साधारण मनुष्य के लिए शास्त्रों के अनुसार कुछ आवश्यक नियम बनाया गया है जिसका पालन कारना आवशयक है |

हम अपने जीवन में पूजा पाठ  तो  करते ही है  पर वह फल हमे तभी प्राप्त होगा जब हम अपने जीवन के दैनिक कार्य में ये १६ संस्कारो का पालन करेंगे जो सभी को अपनाना चाहिए |

तो आइये जानते है की कौन कौन से है वो १६ संस्कार जिसका हमे पालन करना चाहिए 

पहला नियम (दैनिक दिनचर्या के 16 नियम)

घर में हमेशा ताम्बूल अथवा पान का सेवन खासकर घर की स्त्रियां आवश्यक रूप से इसका सेवन करे क्युकी ताम्बूल के प्रयोग से घर में सदा श्री और सौभाग्य का वास बना रहे | 

दूसरा नियम

शौच के बाद बिना पाँव धोए घर में प्रवेश या पूजा पथ नहीं करना चाहिए क्युकी शौच के बाद पाँव नहीं धोने से घर में कलयुग का प्रभाव होने से दुर्दिन का आंरभ होता  है | 

तीसरा नियम

कभी गीले पाँव  ले कर कभी अपने बिस्तर पर सोने के लिए नहीं जाना चाहिए क्युकी ऐसा करने से कुविचारों को प्रोत्साहन और  दरिद्रता को आमंत्रण प्राप्त  है | 

चौथा नियम

कभी भी सुनसान जगह में नहीं सोना चाहिए क्युकी अगर ऐसे जगह पर सोये तो शत्रु घात का भय बना रहता है |

पाचवाँ नियम

 घर में सेवक प्रहरी छात्र को आवश्यकता से अधिक  नहीं सोना चाहिए खास कर घर की स्त्रियों को तो पूर्ण रूप से वर्जित है ऐसे करने से अगर सेवक और प्रहरी सोये रहेंगे तो घर की सुरक्षा क्षीण होगी |

कार्य पूर्ण नहीं होंगे  , और छात्र अगर सोयेंगे तो वो विद्या अर्जित नहीं कर पाएंगे | स्त्रियां अगर अत्यधिक सोयेंगी तो घर में लक्ष्मी का वास नहीं होगा | 

छठा नियम

16 संस्कार का क्या मतलब है
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पूर्ण रूप से अंधेरे वाले कमरे में नहीं सोना चाहिए ऐसा करने से अंधकारी शक्तियो का प्रभाव नहीं होता | 

नौवां नियम

कभी निवस्त्र नहीं सोना चाहिए ऐसा करने से भगवान शिव को अपमानित करना होता है | 

दसवां नियम

भोजन करने बाद से हमे अपना मुँह जरूर धोना क्युकि ऐसा नहीं करने से बीमार करने वाले कीटाणु और जीवाणु सरीर में प्रवेश करते हैं | 

ग्यारहवां नियम

उत्तर दिशा में शीश करके कभी नहीं सोना चाहिए ऐसा करने से चरण दक्षिण दिशा में पेअर करके सोने से काल भैरों और हमारे पूर्वजों का अपनमान होता है जिसका परिणाम अगर मृत्यु नहीं हुआ तो मानसिक संतुलन जरूर व्यक्ति  अपना खो देता है |  

बारहवा नियम

अपना शीश कभी भी पश्चिम डिसा में करके नहीं सोना चाहिए क्युकी पंश्चिम दिशा में शीश करके सोने से चिंताओं में वृद्धि होती हैं | 

तेरहवाँ नियम

छात्रों को हमेसा पूर्व दिशा में ही शीश करके सोना चाहिए क्युकी पूर्व दिशा में शीश करके सोने से ज्ञान और विद्या सहज प्राप्त हो जाते है | 

चौदहवाँ नियम

छात्रों के अतिरिक्त अन्य सभी को  दक्षिण में ही शीश करके सोये क्युकी दक्षिण में शीश करके सोने वालों को धन विद्या यश स्वस्थ दीर्ध आयु सभी प्राप्त हो जाते है | 

पंद्रहवा नियम

सोते समय काम से काम एक प्रहर सबसे पहले दाहिनी और मुख करके अवश्य सोना चाहिए  ऐसा करने से गहरी निद्रा प्राप्त होता है और जो व्यक्ति गहरी निद्रा लेता है वो सदा सुखी रहता है | 

सोलहवा नियम

सभी किसी को ब्रम्हामुहुर्त में जागना चाहिए क्युकी ब्रम्हा मुहूर्त में प्राण वायु का प्रवाह होता है इसलिए ब्रम्हा मुहूरत में जागने से व्यक्ति निरोगी और दीर्घायु बनता है |

Sindoor Lagane ka Mahatva || हिन्दू धर्म में सिंदूर लगाने के कुछ महत्वपूर्ण नियम , जिसका पालन शादीशुदा स्त्रियों को अवश्य करना चाहिए।

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Sindur lagane ka mahatva

Sindoor Lagane ka Mahatva :- आज का हम जानेंगे की सिंदूर कब लगाए ,कब ना लगाए , कितने बार लगाए , और अगर गलती से सिंदूर गिर जाये तो क्या करे , सिंदूर लगाने में कितनी खर्च करे काम / ज्यादा और सिंदूर लगते समय कौन – कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए | एक सुहागन औरत के लिए सिंदूर कितनी आवश्यक है | वो हमे समझाने की जरुरत नहीं है वो भी अगर आप हिन्दू है तो | आज हम इसी बिंदु पर बात करते हैं | सिंदूर की लगाने के कुछ नियम होते है जो इस प्रकार है ,

1. कितना खर्च करें सिन्दूर? Sindoor Lagane ka Mahatva

जब-जब हम कंघी करेंगे तब-तब हमे सिंदूर सीधे मांग में लगाना चाहिए और जितना हो सके हमे कम से कम उसे खर्च करना चाहिए | क्योंकि हमारे बड़े बुजुर्गों का कहना रहा है ,और हमारे लोक-कथाओ में भी कहा गया है की, जितना हम सिंदूर कम खर्च करेंगे उतना वह लम्बे समय तक चलता है और हमारा सौभाग्य बना रहता है | इसलिए हमे सिंदूर थोड़ा – थोड़ा खर्च करना चाहिए | 

2. सिन्दूर लगाने के पहले क्या करें?

 जब बाल धो कर आते हैं तो,ध्यान रखिये की ज्यादा चौखट हमे लांघना न पड़े चौखट आप समझते होंगे जो हमारे दरवाजे होते है | वही बहुत लोगो के घर में बाथरूम थोड़े दूर में होता जिसे उन्हें अपने रूम में जाने में बहुत चौखट से हो कर जाना पड़ता हैं तो इस बात का ध्यान रखे और सिंदूर लगाने के पहले कुछ मीठा जरूर खाये कुछ लोगो को आदत होती है की वो बिना पूजा किये कुछ नहीं कहते तो वह शक्कर ,गुड़ या काजू ,किशमिश यानि फलाहारी वाला कुछ मीठा खा सकते हैं | 

3. सिन्दूर लगाने समय की सावधानियाँ

Sindoor Lagane ka Mahatva
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 जब हम बाल धो कर सिंदूर लगते हैं तो हमे सिंदूर के साथ कभी सिर पर तेल नहीं लगाना चाहिए नहीं कभी बाल धो कर तुरंत पैर में  ना आलता लगाना चाहिए ,ना नाखून काटना चाहिए  वैसे आज के टाइम में बहुत कम स्त्रियां ये सब नियम का पालन करती हैं पर कुछ हैं अभी भी ये सारी नियम को मानती हैं और ये सब बातों का ध्यान रखते हैं जब हम कुवांरे होते है तो इतना इन सब बातों को ध्यान में नहीं रखते पर शादी होने के बाद हमे इस सब बातों का ध्यान रखना चाहिए | 

4. सिंदूर लगाने से पहले सर ढ़के या नहीं |

हमे सिंदूर कभी भी बिना सिर ढँके नहीं लगाना चाहिए जब भी लगाए दुपट्टे से या किसी भी कपडे से  सिर ढक लें फिर सिंदूर लगाए और कभी भी खड़े हो कर श्रृंगार नहीं करना चाहिए और श्रृंगार जब भी करें पूर्व दिशा के तरफ अपना मुँह करके लगाना चाहिए | 

यह भी पढ़ें :- हिंदू शास्त्रों के अनुसार 8 अमर कौन हैं

5. मासिक धर्म में सिंदूर लगाए या नहीं?

हमे अपने मासिक धर्म में सिंदूर नहीं लगाना चाहिए या कोई भी श्रृंगार नहीं करना चाहिए यह पूर्णतः वर्जित होता है | जब तक हम अपना बाल ना धो ले मासिक धर्म के तीसरे या पांचवे  दिन हम बल धो कर हमे सिंदूर या श्रींगार करना चाहिए  | 

6. सिन्दूर गिर जाए तो क्या सावधानियाँ बरतें?

 अगर हमसे गलती से सिंदूर गिर जाये जमीन पर तो हमे आँचल से साफ करके हाथ जोड़ कर प्रणाम कर लेना चाहिए और माफ़ी मांग लेनी चाहिए भगवान से | 

7. श्रृंगार की चीज़े दुसरो के साथ बांटे या नहीं?

हमे अपने श्रृंगार की कुछ चींज़े कभी किसी के साथ नहीं बाँटना चाहिए जैसे सिंदूर जिसे हमारी सदी हुई होती है  , हमे अपने माथे की बिंदी निकल कर नहीं लगाना चाहिए , काजल , बिछिया | 

8. देव स्थान से आते वक़्त सिन्दूर क्यों लाना जरुरी है? Sindoor Lagane ka Mahatva

 जब भी हम देव स्थान पर जाते है तो हमे सिंदूर ले कर आना चाहिए और उसे हम किसी पीतल की डिब्बी में रख सकते है और इस सिंदूर को हम जो भी घर में मेहमान आते हैं जो शादीशुदा होती हैं (ननद , भाभी, देवरानी ,सास, माँ ) उन्हें दे सकते है |  पर याद  रखे आप जो लगाए रहते हैं या पहने होते है उन्हें कभी उतर कर न दे| 

Writer : Priya Mishra

5 Most powerful demons in Hindu Scriptures? | हिन्दू संस्कृति के अनुसार, कौन है सबसे शक्तिशाली राक्षस?

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Most powerful demon in hindu Mythology

5 Most Powerful Demons in Hindu Scriptures :- आज आपके सामने जिस सूची को लेके आपके समक्ष हम आये हैं उसका मक़सद किसी राक्षस को कम शक्तिशाली या किसी को ज्यादा शक्तिशाली दिखाने के लिए नहीं बनाई गई है।

 यह तो हमारे ग्रंथो में से 5  ऐसे राक्षसों के बारें में आपको अवगत कराने और उनसे जुडी पौरणिक मान्यताओं को बताने की हमारी एक छोटी सी कोशिश हैं।  

चलिए पढ़ते है ऐसे ही  5 असुरों और राक्षसों के बारे में कुछ तथ्य।  

1. Shumbh-Nishumbh : शुम्भ-निशुम्भ (5 Most powerful demons in Hindu Scriptures)

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यह दो दैत्य अपने बहुत बलशाली थे। इनका उल्लेख देवी भागवत के स्कन्द 5 के अनुसार यह दोनों पाताल से भूलोक में आ गए थे और जब वह अपनी व्यस्क अवस्था में आये तब वह दोनों ब्रह्मा जी की नगरी पुष्कर में जाकर बिना अन्न और जल के कठोर तपस्या की।  

यह तपस्या लगभग 10000 साल तक चली। इनकी कठोर तपस्या देख ब्रह्मा जी बहुत प्रसन्न हुए और कुछ भी माँगने का वरदान माँगा।  यह दोनों भाई बहुत बदमाश थे उन्होंने अमरता का वरदान माँगा।  

ब्रह्मा जी बोले जिस मनुष्य ने जन्म लिया है वह अवश्य ही मरेगा इसलिए यह वरदान नहीं देख सकते।  दोनों भाइयों ने विचार किया और माँगा की हमारी मृत्यु किसी भी पुरूष जाती से  यानि कोई भी देवता, मृग, पक्षी और कोई भी ऐसा जिव जो पुरुष हो हमारा वध न कर पाए।  

यह दो दैत्य अपने बहुत बलशाली थे। इनका उल्लेख देवी भागवत के स्कन्द 5 के अनुसार यह दोनों पाताल से भूलोक में आ गए थे और जब वह अपनी व्यस्क अवस्था में आये तब वह दोनों ब्रह्मा जी की नगरी पुष्कर में जाकर बिना अन्न और जल के कठोर तपस्या की।  

यह तपस्या लगभग 10000 साल तक चली। इनकी कठोर तपस्या देख ब्रह्मा जी बहुत प्रसन्न हुए और कुछ भी माँगने का वरदान माँगा।  यह दोनों भाई बहुत बदमाश थे उन्होंने अमरता का वरदान माँगा।  

ब्रह्मा जी बोले जिस मनुष्य ने जन्म लिया है वह अवश्य ही मरेगा इसलिए यह वरदान नहीं देख सकते।  दोनों भाइयों ने विचार किया और माँगा की हमारी मृत्यु किसी भी पुरूष जाती से  यानि कोई भी देवता, मृग, पक्षी और कोई भी ऐसा जिव जो पुरुष हो हमारा वध न कर पाए।  

वरदान प्राप्त करने के बाद वह खुद को अमर मानने लग गए थे। उनका मानना था की कोई भी स्त्री जाती उनका वध नहीं कर सकती। परन्तु आगे चलकर देवी चंडिका के हाथों निशुम्भ का वध हुआ और शुम्भ को माँ काली ने मृत्यु प्रदान की थी।

ये भी पढ़े :- हिंदू शास्त्रों के अनुसार 8 अमर कौन हैं?

2. Narkasur : नरकासुर

नरकासुर की बात की जाये तो भागवत पुराण के अनुसार वह भू देवी व् भगवान विष्णु का वारह अवतार का पुत्र था।  विष्णु जी ने उसे प्राग्ज्योतिषपुर का राजा बना दिया था। 

 इतने तेजस्वी माता-पिता सन्तान होने के बावजूद वह अत्यंत ही क्रूर प्रवत्ति का इंसान। था।  

उसे यह प्रवत्ति बाणासुर नामक रक्षक की संगत की वजह से मिली थी।  उसे यह प्रवत्ति बाणासुर नामक रक्षक की संगत की वजह से मिली थी और उसी के कहने से उसने ब्रहमा जी की तपस्या की सलाह दी। 

 नरकासुर ने तुरंत ही ब्रह्मा    जी की कठिन तपस्या की और ब्रह्मा  प्रसन्न किया।  ब्रह्मा जी ने  वरदान मांगने को कहाँ , तब उसने माँगा की इस दुनिया में मेरी मृत्यु केवल मेरी  हाथों ही हो और दूसरा कोई भी मुझे  मार न सके।  

ब्रह्मा जी ने जब  सुनी तो उन्होंने तथास्तु का आशीर्वाद देकर अंतर्धान हो गए।  

वरदान  पाते ही वह ताकत के मद में पागल हो गया।  उसने धरती ही नहीं अपितु स्वर्गलोक  में भी अपने आतंक से त्राहिमाम मचा रखा था।  

उसने देवराज इंद्रा को स्वर्गलोक से निकालकर वहाँ अपना शासन चल्या और माता अदिति के दिव्या कुण्डल को भी चीन ले गया।  

इस क्रूर राक्षस का वध माता सत्यभामा के हाथो एक भीषण युद्ध के बाद हुआ था। असल में माता सत्यभामा भू माता अवतार थी जो सिर्फ इस राक्षस का वध करने जन्मी थी।

3. Andhaka : अन्धक

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अन्धक  का जन्म माता पार्वती के पसीने से ही हुआ था। इस बच्चें को भगवान शंकर ने दैत्य राज हरिण्याक्ष को दे दिया था।  इस  कथन का उल्लेख शिव पुराण के रूद्र सहिता के युद्ध खण्ड में पाया जाता है।  

इसके अनुसार वह भ्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए हजारों वर्षो तक घोर तप किया, जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे वरदान मांगने के लिए कहाँ परन्तु उसने कुछ ऐसा मांगे जिससे वह अमरता को प्राप्त  हो जाता 

 तब ब्रह्मा जी ने उसे अपने विनाश के लिए कुछ उपाए बताने को कहा क्योकि जो इस धरती में आया है  उसे एक न एक दिन काल के गर्त में जाना ही होता है।  

इस  कथन का उल्लेख शिव पुराण के रूद्र सहिता के युद्ध खण्ड में पाया जाता है।  इसके अनुसार वह भ्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए हजारों वर्षो तक घोर तप किया, जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे वरदान मांगने के लिए कहाँ परन्तु उसने कुछ ऐसा मांगे जिससे वह अमरता को प्राप्त  हो जाता 

तब ब्रह्मा जी ने उसे अपने विनाश के लिए कुछ उपाए बताने को कहा क्योकि जो इस धरती में आया है  उसे एक न एक दिन काल के गर्त में जाना ही होता है।  

तब वह माता पार्वती पर ही मोहित हो गया था। और विनाश का कारण बना भगवान शंकर ने उसका वध अपने त्रिशूल से किया था।

4. Bhasmasur or Vrikasur : भस्मासुर / वृकासुर .

इस राक्षस का उल्लेख श्रीमद महापुराण में आता है, इसे वृकासुर भी कहते है।  ग्रंथो में उल्लेख कथा अनुसार एक बार इसने नारद जी से पूछा की सबसे जल्दी खुश होने वाले भगवान तीनों देवो में कौन है? इसके जवाब में नारद जी ने उसे भगवान शंकर आराधना का जुझाव दिया।  

यह सुनकर वह भगवान शंकर की घोर तपस्या में लग गया और भगवान शंकर जी भी प्रसन्न हो गए और कोई भी मनवांक्षित वरदान मांगने कहाँ।  

इसपर उसने कहाँ की मैं जिस भी चीज़ या मनुष्य के सर पर हाथ रख दू वह भस्म हो जाए।  भगवान शंकर तो भोले भण्डारी है उन्होंने भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर तथास्तु का वरदान दे दिया।  

यह सुनते ही वह ताकत के मद में चूर हो गया और माता पार्वती को ही भगवान शंकर से छीन लेता हु सोचकर उनके ही सर में हाथ रखने का प्रयोजन बनाने लगा था।  

इस कठिन परिस्थिति हुए विष्णु जी ने अपनी योग-माया का उपयोग कर एक सुन्दर स्त्री का रूप ले लिया था। जिसे देख भस्मासुर उसपर मोहित हो गया और अनजाने में अपने ही सिर पर हाथ रख भस्म हो गया।

5. Vritrasura / वृत्रासुर

इसका उल्लेख महाभारत शांतिपर्व के अंतर्गत भीष्म द्वारा दिया जाता है।  उनके कथन के अनुसार वह आकर में वह 500 योजन लम्बा और 300 योजन लगभग उसकी मोटाई थी। 

उसने लगभग 60 हज़ार वर्ष ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने उसे  को कहा था।  उसने मायावी विद्याओं में सबसे गुणि, योग विद्या में सबसे आगे, उससे अधिक तेज़ और किसी के  साथ ही उसने हमेशा गमन करने का बल इत्यादि मानेगा।  ब्रह्मा  उसे  वरदान दे दिया।  

इसका वध आगे चलकर देवराज इंद्रा ने अपने महान अस्त्र वज्र से किया था।

ये हमारी सबसे शक्तिशाली राक्षस की श्रृंखला भाग-1 हैं। हम आगे भी इस श्रंखला में सामने कई और शक्तिशाली राक्षसों के बारे में बताएँगे जिनका नाम आपने इससे पहले शायद न सुना हो।

11 Amazing Facts about Indian Armed Forces भारतीय सशस्त्र बल के बारे में 11 आश्चर्यजनक तथ्य ||

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Facts about Indian Armed Forces

11 Amazing Facts about Indian Armed Forces: भारतीय सशस्त्र बल हमारी सरहदों की रक्षा करने वाली एक ऐसी शक्ति है जिसके कारण जम और आप रात को अपने परिवारों के साथ सुकून से सो पाते है।  

भारतीय सशस्त्र बल के अंदर जो सेनाएँ आती है वो है भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल भारत की ढाल और तलवार हैं, जो हमारे हितों को सुरक्षित रखते हैं, हमारे दुश्मन के सामने हमारी ढ़ाल बनकर खड़ी है।  

यहीं कारण है की हमारे देश में हमारी सेनाओं की इतनी इज़्ज़त और सम्मान किया जाता है।  परन्तु यह बहुत ही दुःखद है की हम हमारी सेनाओं के बारे में ऐसी कई रोचक बातें और तथ्य है जो हम नहीं जानते है।  

यह Article आपको हमारे सशत्र सेनाओं के बारे में ऐसे ही तथ्यों के बारे में बताएगा।  आइये जानते है कुछ ऐसे ही  Facts about Indian Armed Forces.

1.भारत दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र, सियाचिन ग्लेशियर को Mean Sea Level(MSL) से 5000 मीटर ऊपर नियंत्रित करता है।

11 Amazing Facts about Indian Armed Forces
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 2. भारतीय सैनिकों को ऊंचाई और पर्वतीय युद्ध में सबसे अच्छा माना जाता है।

भारतीय सेना का हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल (HAWS) दुनिया के सबसे विशिष्ट सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों में से एक है और इसमें यू.एस., यूके और रूस की विशेष ऑप्स टीमें अक्सर आती रहती हैं। अमेरिकी विशेष बलों ने अफगानिस्तान पर आक्रमण के दौरान अपनी तैनाती से पहले HAWS में प्रशिक्षित किया. 

3. जासूसी और पता लगाने में CIA की सबसे बड़ी विफलता।

भारत ने 1970 के दशक की शुरुआत में और 1990 के दशक के अंत में सीआईए के बिना अपने परमाणु शस्त्रागार का गुप्त रूप से परीक्षण किया, यहां तक ​​कि यह जाने बिना कि क्या हो रहा था।

4. जाति या धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।

कड़े परीक्षणों और परीक्षणों के आधार पर सैनिकों की भर्ती उनकी समग्र योग्यता और फिटनेस के आधार पर की जाती है। और एक बार जब भारत का नागरिक सेना में शामिल हो जाता है, तो वह एक सैनिक बन जाता है। और कुछ नहीं।

यह भी पढ़े : परमवीर चक्र सम्मानित Capt. Vikram Batra की शौर्य की कहानी।

5. भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी “स्वैच्छिक” सेना है।

सभी सेवारत और रिजर्व कर्मियों ने वास्तव में सेवा के लिए “चुना” है। संविधान में जबरन भर्ती (जबरन भर्ती) का प्रावधान है, लेकिन इसका इस्तेमाल कभी नहीं किया गया।

6. The Great Battle of Longewala / लोंगेवाला की महान लड़ाई

लोंगेवाला की लड़ाई दिसंबर 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ी गई थी, जिसमें सिर्फ 120 भारतीय सैनिकों ने 1 जीप माउंटेड M40 रिकॉइललेस राइफल के साथ 45 टैंकों और 1 मोबाइल इन्फैंट्री ब्रिगेड द्वारा समर्थित 2000 पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ किले पर कब्जा कर लिया था। भारी संख्या में होने के बावजूद, भारतीय सैनिकों ने रात भर अपना मैदान संभाला और वायु सेना की मदद से हमलावरों को पूरी तरह से खदेड़ने में सफल रहे।

7. ऑपरेशन राहत (2013) दुनिया में अब तक किए गए सबसे बड़े नागरिक बचाव अभियानों में से एक था।

यह भारतीय वायु सेना द्वारा 2013 में उत्तराखंड में बाढ़ से प्रभावित नागरिकों को निकालने के लिए किया गया था। यह किसी भी वायु सेना द्वारा हेलीकॉप्टरों का उपयोग करके किया गया दुनिया का सबसे बड़ा नागरिक बचाव अभियान था। 17 जून 2013 से ऑपरेशन के पहले चरण के दौरान, IAF ने कुल लगभग 20,000 लोगों को एयरलिफ्ट किया; कुल 2,140 उड़ानें भरीं और कुल 3,82,400 किलोग्राम राहत सामग्री और उपकरण गिराए।

8. केरल में एझिमाला नौसेना अकादमी एशिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी है।

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9. भारतीय सेना ने एशिया का सबसे ऊंचा पुल बनाया।

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भारतीय सेना ने लद्दाख में भारत-चीन सीमा या वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर एशिया के सबसे ऊंचे पुल का निर्माण किया है। सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित, कर्नल चेवांग रिनचेन ब्रिज पूर्वी लद्दाख में दुरबुक और दौलत बेग ओल्डी को जोड़ता है।

10. 1971 का भारत पाकिस्तान युद्ध लगभग 93,000 लड़ाकों और पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों के आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुआ।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से हिरासत में लिए गए युद्धबंदियों की यह सबसे बड़ी संख्या है। युद्ध के परिणामस्वरूप बांग्लादेश के स्वतंत्र राज्य का निर्माण हुआ।

 11. भारतीय सेना के पास घुड़सवार रेजिमेंट है। यह दुनिया की अंतिम 3 ऐसी रेजिमेंटों में से एक है।

वैसे तो हमारी सेनाओं के बारे में लिखने बैठे तो एक जीवन भी काम पड़ेगा लेकिन हमारी तरफ से ये थे 11 ऐसे Facts about Indian Armed Forces जिसे हर भारतीय को पढ़ने से गर्व महसूस होता है।  

हिंदू शास्त्रों के अनुसार 8 अमर कौन हैं | Who are 8 immortals according to Hindu scriptures

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       अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः

इस श्लोक का अर्थ है :- अश्वस्थामा, बलि, व्यास , हनुमान जी , विभीषण, कृपाचार्य, और भगवन परशुराम , ये सातों महामानव चिरंजीवी अर्थात अमर है।  

हमारे हिन्दू धर्म के अनुसार इस संसार में आज भी 7 महामानव ऐसे है जिन्हे अमृत्व यानि अमरता का वरदान प्राप्त है . इनका अनादि काल से अबतक जीवित रहने के अलग-अलग कारण है।

 कुछ इस धरती में किसी को दिए वचन के कारण इस धरती पर है तो कुछ को मिले अभिशाप की वजह से यहाँ मौजूद है।  

हमारा मानना है की आप इन नमो में से 2 या 3 नामों को तो जानते होंगे लेकिन सभी को जानते हो इसकी सम्भावना कम ही है।  आज इस Article में हम उन्ही महामानवों के ऊपर विस्तार से चर्चा करेंगे।  

गवान परशुराम

1 भगवान परशुराम / Bhagwan Parshuram

इन 7 महामानवों में सबसे पहला नाम जो आता है वो है विष्णु जी के छटवें अवतार भगवान परशुराम जी है।  इनके पिता थे ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका। इन्हे मिलाकर ये कुल 5 भाई थे जिनमे ये सबसे छोटे थे।  जन्म समय इनका नाम राम था।  

परन्तु इन्होने शिवजी की कठोर जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने इन्हे फरसा वरदान में दिया।  यही वजह है की राम से इनका नाम परशुराम पड़ा।  

एक मान्यता अनुसार भगवन परशुराम ने 21 बार छत्ररीयो का वध किया था।  भगवन परशुराम राम से पहले जन्मे थे परन्तु अमर होने की वजह से वे राम युग और  महाभारत युग में भी मौजूद थे।  

2. राजा बलि / Raja Bali

इस सूची में दूसरा नाम आता है राजा बलि का, यह सत्युग के समय के थे। जिन्होंने तीनो लोको में विजय प्राप्त कर लिया था। तब विष्णु भगवान ने वामन अवतार लिया था और एक भिक्षु के रूप में राजा बलि के समक्ष आ गए थे। 

राजा बलि अपने दान के लिए बहुत ज्यादा प्रचलित थे कोई भी उनके दरवाजे से खली हाथ नहीं जाता था।  इसी तरह उन्होंने वामन को भी कुछ भी मांगने को कहा, तब श्री हरी के अवतार ने तीन कदम बराबर जगह मांगी।  

 बलि ने हरी को न पहचानते हुए इस भिक्षा के लिए हामी भर दी  है बोल दिया तब वामन ने २ कदम पे दोनों लोको को नाप  तीसरे कदम से राजा ऊपर पैर रखकर उन्हें पाताललोक पंहुचा दिया।  

एक मान्यता अनुसार भक्त प्रहलाद बलि के वंशज थे।  

हनुमान जी

3. हनुमान जी / Hanuman ji

इस सूचि में अगला नाम आता है राम जी के परम भक्त हनुमान जी का, यह राम युग में जन्मे उनके सबसे बड़े भक्त है।  अन्जीनी पुत्र हनुमान जी रामायण काल में भी थे और उसके हज़ारो वर्ष बाद महाभारत काल में भी उनके और भीम के बिच हुए प्रसंग आते है।  

 हनुमान जी को अमरता का वरदान माता सीता  जब वह श्री राम का सन्देश लेकर माता सीता के पास अशोक वाटिका गए थे और उन्हें राम जी का पूर्ण सन्देश सुनाया था।  

4. अगले महामानव का नाम है राजा  विभीषण। वह राम जी के अनन्य भक़्त थे। उन्होंने भगवान श्री राम जी की मदद रावण को परास्त करने में की थी।  जब श्री राम ने रावण का वध किया था और विभीषण को लंका का राजा बनाया था।  

 राजा बनाते समय उन्होंने सत्य की जीत के लिए निस्वार्थ भाव से अपने भाई के विरुद्ध  खड़े रहे ,उन्होंने विभीषण  का वरदान दिया था।  

5. Maharishi Vyas / महर्षि व्यास

5. वें महापुरुष है महर्षि व्यास जिन्हे वेदव्यास  भी जाना जाता है।  इन्होने ही  चारों वेद यानि ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद लिखें थे। इसके अलावा इन्होने ही महाभारत और श्रीमाद भागवत पुराण भी लिखी थी।  

ये ऋषि पराशर और सत्यवती के पुत्र थे।  इनका रंग सावला था इसलिए यह कृष्ण द्वैपायन कहलाए।  इनकी माता ने आगे चलकर शांतनु से विवाह किया जिनसे उनको दो पुत्र हुए और बड़े का नाम चित्रांगद जो युद्ध  और छोटे बेटे विचित्रवीर्य संतानहीन मर गए।  इसके सबसे बाद कृष्णद्वैपायन ने धार्मिन और वैराग्य का जीवन चुना।  

लेकिन अपनी माता के आग्रह पर इन्होने दोनों  संतानहिन् रानीयों को नियोग के नियम से दो पुत्र दिए जिनका नाम धृतराष्ट्र और पांडू कहलाए।  इसमें तीसरे पुत्र विदुर भी शामिल हुए।  

अश्वस्थामा

6.अश्वस्थामा / Ashvasthama

इस सूचि में अगला नाम आता है अश्वश्थामा का।  यह द्रोणाचार्य के पुत्र है और भगवन शंकर के ऐसे अवतार है जो आज भी मुक्ति के लिए इस ब्रम्हांड में  भ्रमड कर रहे है।  

इस सूचि में अगला नाम आता है अश्वश्थामा का।  यह द्रोणाचार्य के पुत्र है और भगवन शंकर के ऐसे अवतार है जो आज भी मुक्ति के लिए इस ब्रम्हांड में  भ्रमड कर रहे है।  

महाभारत काल में इन्होने कोरवो का साथ दिया था।  इन्हे अनंत काल तक भटकने का श्राप श्री कृष्ण जी ने दिया था क्योकि इन्होने पांडवो पे ब्रम्हास्त्र चलाया था।  

7.कृपाचार्य / Kripacharya

यह कृपाचार्य अश्वस्थामा के मामा और कौरवो के कुल गुरु थे। राजा शांतनु को जंगल में दो बच्चे मिले, और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। तब वह उन्हें अपने साथ ले गया, और लड़के का नाम कृपा रखा, क्योंकि यह राजा के लिए प्रभु की कृपा थी, और लड़की का नाम कृपी रखा गया था, और परिवार के पुजारी को उनकी जिम्मेदारी दी।

परिवार के पुजारी ने अपना ज्ञान लड़के कृपा को दिया, उसे कृपाचार्य के पास भेज दिया, और उसे अपना प्रवेश दिया। लड़की का विवाह एक महान और प्रसिद्ध व्यक्तित्व द्रोणाचार्य से हुआ था। और इस प्रकार कृपाचार्य गुरु द्रोणाचार्य के साले थे, जिन्हें बाद में पांडवों और कौरवों को पढ़ाने के लिए गुरु के रूप में नियुक्त किया गया था।

कृपाचार्य भी उन कुछ योद्धाओं में से एक थे जो महाभारत युद्ध के बाद जीवित थे और यहां तक ​​कि हारने वाले कौरव पक्ष से भी।    

8. ऋषि मार्कण्डेय / Rishi Markandey

इस सूचि में अंतिम नाम है ऋषि मार्कण्डेय जी का। यह भगवन शंकर के बहुत बड़े भक्त है और इन्होने अपने तप के बल से महामृन्तुन्जय के मंत्र को सिद्ध कर लिया था।  

हम सब जानते है की महामृन्तुन्जय का जाप मृत्यु को दूर रखने के लिए किया जाता है।  इन्होने ने इस मंत्र को सिद्ध कर लिया था इसलिए यह भी सतो महामानवों की तरह है अमर है।  

यह थी सूचि उन 8 महामानवों की जो आज भी इस धरती पर विचरण कर रहे है।  

        

2nd Wave of Coronavirus:- कैसे भारत में जारी Wuhan-Virus की दूसरी लहर, पहली लहर से ज़्यादा ख़तरनाक और संक्रामक है?

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2nd Wave of Coronavirus

2nd Wave of Coronavirus:- आज हमारा देश Virus की चपेट में पूरी तरह से फसता नज़र आ रहा है।  इसके फैलने की रफ़्तार का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते है की आज दुनिया में Wuhan -virus के हर पाँच में से एक रोगी हमारे देश का है।  

2nd Wave of Coronavirus पहली लहर से ज्यादा संक्रमण करी है, इसकी पुष्टि आप निचे दिए गए ग्राफ में आसानी से कर सकते है।

2nd Wave of Corona Virus

विशेषज्ञों की मानें तो इस बार की लेहेर में संक्रमण के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण coronavirus में पाए जाने वाला Indian Strain है।  इसके फैलने की दर पिछली लेहेर से बहुत ज्यादा मणि जा रही है।  

महाराष्ट्र जो की इस लेहेर में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक है, इनके 61% नमूनों में Indian Strain पाया गया।  लेकिन सिर्फ यही एक कारन को मने तो सही नहीं होगा।  जनता और सरकार द्वारा दिखाई गई लापरवाही को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता जो की इस वायरस के फैलने के प्रमुख कारन है।  

2nd wave of Coronavirus में युवा ज्यादा संक्रमित हो रहे है?

यह महामारी जब से शुरू हुई है तबसे दिसंबर महीने तक के आकड़ों को देखे तो 60% से ज्यादा मामले ऐसे लोगो के थे जिनकी उम्र 45 वर्ष से कम थी(केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मृत्यु दर के आंकड़ों पर रिपोर्ट)।  लेकिन उसके विपरीत मृत्यु दर के आकड़ों में सबसे ज्यादा संख्या इन लोगों बल्कि उन लोगो की है जिनकी उम्र 60 वर्ष से ज्यादा थी।  

इस बार की अगर बात  सटीक तौर  नहीं जा सकता, क्योंकि सरकार आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किये है बात की पुष्टि कर सके। और रही बात  सरकारों की तो  हमे कोई ऐसे आंकड़े देखने नहीं मिल रहे जो इस बात का समर्थन की इस बार की लेहेर युवाओं  को अपने चपेट में ज्यादा  है।  

हमारे देश की मीडिया की खबरों में जाये तो ऐसा कोई भी खबरे सामने नहीं आती जो पक्के तौर पे ये चीज़ बता सके की युवाओ पर महामारी का ज़्यादा असर। 

 हमारी राजधानी की बात की जाये तो 13 April को अपने सम्बोधन में केजरीवाल जी ने  पुष्टि की है की 60%  से अधिक मामले उन लोगों के  45 साल से काम है।  उन्होंने इस बात की पुष्टि के लिए कोई आधिकारिक आंकड़े पेश।   

हम बात करे डॉक्टर्स की जो प्रतिदिन इस महामारी से लड़ रहे है, उनके अनुसार इस लेहेर में उनके पास ऐसे मरीज ज्यादा आ रहे है जिनकी उम्र 30 से 45 वर्ष हैं। जो पिछले बार आने वाले मरीजों की संख्या से कही ज्यादा है।  

बहुत सारे डॉक्टर्स की माने तो 45 साल  से कम मरीजों के मिलने का सबसे बड़ा कारण Vaccination हो सकता है।  ऐसा इसलिए मानना है क्युकी vaccination से उन्हें 2nd Wave ऑफ़ Coronavirus से लड़ने में एक सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा है।  

क्या बच्चे इस Indian Variant से आने वाले समय में ज्यादा होंगे?

इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि क्या बच्चे उच्च दर पर संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे डॉक्टर्स जो लगातार 2nd  Wave  of  Coronavirus से लगातार लड़ रहे है , उनका कहना ये है की न की सिर्फ बच्चे जल्दी संक्रमित हो रहे है बल्कि इस बार वह पिछली बार से भी ज्यादा गंभीर रूप से संक्रमित हो रहे है।  

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार तक़रीबन 80000 से ज्यादा बच्चे 1 March से लेकर 4 April तक 2nd Wave of Coronavirus से संक्रमित हो चुके है।  यह आकड़ा पुरे देश का नहीं बल्कि सिर्फ  Maharashtra, Chhattisgarh, Uttar Pradesh, Karnataka and Delhi का है।  

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार तक़रीबन 80000 से ज्यादा बच्चे 1 March से लेकर 4 April तक 2nd Wave of Coronavirus से संक्रमित हो चुके है।  यह आकड़ा पुरे देश का नहीं बल्कि सिर्फ  Maharashtra, Chhattisgarh, Uttar Pradesh, Karnataka and Delhi का है।  

इसमें 60000 तो सिर्फ महाराष्ट्र  से ही हैं।  

क्या संक्रमण के कारण अधिक गंभीर बीमारी होती है?

अगर वर्त्तमान स्थिति की बात की जाये तो कुछ ठोस तथ्य या आकड़े अभी तक हमारे पास नहीं है परन्तु पिछली बार से इस बार संक्रमण कुछ ज्यादा खतरनाक जरूर है और ह्रदय घात और फेफड़ो में छति के भी  मामले सामने आ रहे है।  

डॉक्टरों की मानें तो इस बार की लहर में फेफड़ों  संक्रमण ५ दिनों में उस प्रकार का हो रहा है जो पिछली बार के संक्रमण में २-3 हफ्तों में हुआ करता था।

इस बार बुखार भी पिछली बार से कही जल्दी और तेज़ी से आ रहा है।  इस बार के संक्रमण में oxygen   बहुतायत मात्रा में लग रही है, यही कारण है की हर जगह से Oxygen की कमी की खबरे भी आ रही है।  

ऑक्सीजन की कमी का कारण यह भी है की इस बार संक्रमण बहुत तेज़ी से फैला है पिछली बार की तुलना में।  

Indian Express में छपी एक  खबर के अनुसार डॉ का कहना है की इस बार मरीजों में 90 Liter/Min ऑक्सीजन की मात्रा की जरूरत पड़ रही है जबकि एक आम मरीजों  में ये मात्रा औसतन 15 Litre/Min हुआ करती है।  

क्या कम मौतें हो रही हैं?

जैसे-जैसे यह संक्रामिन आगे बढ़ रहा है भारत में मृत्यु-दर बहुत ही तेज़ी से निचे आ रहा है।  जहा पिछली बार मृत्यु दर 3.01% हुआ करती थी वह इस बार की 2nd Wave of Coronavirus में घटकर 1.01% पर आ गयी है।  

परन्तु जानकारों की माने तो इस आकड़ो से कुश नहीं होना चहिये क्योंकि मामले जिस हिसाब से बढ़  रहे है १% की मृत्यु दर भी  हुई मौतों  को पीछे छोड़  सकती है।  

NOTE :- ऊपर दिए गए सभी तथ्य Internet और आया स्रोतों से जानकारी प्राप्त कर लिखे।  

Gold या Fixed Deposit:- निवेश के लिए कौनसा विकल्प सही है?

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GoldVsFD

Gold Investment या Fixed Deposit:-हमने नए साल का स्वागत किया और बीते हुए साल से बहुत कुछ सीखा । हमे मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक Wuhan-Virus जैसी चीज़ भी देखि।

लेकिन जो सबसे बड़ी सिख हमने सीखी वह थी की बुरे वक़्त में बचाएँ हुए पैसे ही काम आते है।  इसलिए हमे हमेशा ही अपने पैसों को बचाना और सही जगह में निवेश करना चाहिए।  

परन्तु बोलना जितना आसान है, निवेश के लिए सही विकल्प चुनना उतना ही कठिन। एक भारतीय हर चीज़ बहुत ही सोच-समझकर चुनता है। आज हर व्यक्ति के सामने निवेश के बहुत से विकल्प है, और रही-सही कसर विज्ञापन  पूरी कर देते है, जिससे सही क्या है गलत समझना मुश्किल हो जाता है।  

आज के समय में सबसे सुरक्षित और ऐसा विकल्प जो आपके निवेशित पुँजी को सुरक्षित तो रखता ही है साथ-साथ उसे एक निश्चित दर से बढ़ाता हैं।  

हम बात कर रहे है, Gold और Fixed Deposit की।  यह दोनों ही विकल्प आपको बाजार के जोखिम और Savings Account के कम ब्याज दरों के सामने एक अच्छाऔर सुरक्षित निवेश का विकल्प प्रदान करता है।  

आइये इन दोनों विकल्पों के बारे में तुलना करते है और जानते है किस्मे निवेश करना किसमे निवेश करना आपके लिए ज्यादा फयदेमंद रहेगा

Gold Investment : सोने में निवेश:-

हमारे भारतीय समाज में सोने को एक विशेष स्थान प्राप्त है। साल में ऐसे कई विशेष मौके आते है जैसे अक्षय तृतीया, धनतेरस, दिवाली, जब सोना खरीदना निवेश का एक विकल्प मात्र न रहकर उत्सव बन जाता है। 

इसी दिन का इंतज़ार करते हुए कई नागरिक पुरे साल इंतज़ार करते है सोने में निवेश करने का या यूँ कहे की कई भारतीय पुरे साल का सोना इसी दिन खरीदना पसंद करते है।  

संस्कृति और परंपरा की बात अगर न भी करे तो भी सोने में निवेश करना बहुत ही अच्छा माना जाता है। 

कई दिग्गज निवेशक सोने में निवेश करने की राय आवश्य देते है, उनके अनुसार सोने में निवेश करने से आप बाजार की उथल-पुथल से अपने निवेशित Portfolio को स्थिरता प्रदान करते है।    

इसलिए हर व्यक्ति को अपने Portfolio का 10-15% सोने में या सोने में निवेश के अलग-अलग विकल्प जो आज बाजार में उपलब्ध हैं जैसे Gold Bond, Digital Gold, Gold ETF इत्यादि में  निवेशित रहना चाहिए।  

आज के समय में जो सोने में निवेश करने को सबसे ज्यादा आकर्षक बनता है, वो है Liquidity 

आज का समय अनिश्चिताओं का समय है और Wuhan-Virus ने इस चीज़ को बहुत ही अच्छी तरह से समझाया है। 

इसलिए आज का युवा ऐसे विकल्पों की तलाश में रहता है जहा वह जब चाहे आसानी से आपने पैसे निकल सके और बुरे समय में अपनी जरूरते पूरी कर सके।

 और हम सब जानते है बुरे समय में हम अपने पास रखे सोने के सिक्कें, आभूषण एवं बिस्कुट को जब चाहे सोनार के पास गिरवी अथवा बेचकर तुरन्त ही अपनी आवश्यकता पूरी कर सकते है।  

आज के बदलते दौर में बैंक और अन्य कई संस्थान सोने के बदले कम ब्याज दरों में रीढ़ उपलब्ध कराते है। जिससे सोने में निवेश करना आसान और आकर्षक हो गया है।

Investment in Fixed Deposit:-

Fixed Deposit(FD) एक ऐसा वित्तीय साधन है जो हमे एक पूर्व निर्धरित समय के अंतर्गत एक निश्चित ब्याज दरों से आपके द्वारा निवेशित पैसों को संभल के रखता है। 

इसमें निवेशित पैसे बाज़ार जोखिम के अंतर्गत नहीं आते इसलिए यह बहुत ही सुरक्षित विकल्प है पैसो को निवेश करने हेतु।  

यह उन निवेशकों की पहली पसंद है जो जोखिम काम उठाना चाहते है और आपने Savings Account के ब्याज से कुछ ही अधिक ब्याज़ की अपेक्शा रखते है।  

यह हम किसी भी बैंक, सरकारी संसथान, स्व साहयता समूह या गैर-सरकारी संस्थानों में जाकर खुलवा सकते है।

Gold या Fixed Deposit :- एक तुलनात्मक विश्लेषण

निवेश के जोख़िम : Risk Involvement :-

जैसे की हमने पहले भी बताया हैं की FD और Gold Investment दोनों ही निवेश के मामले में कम जोख़िम रखते हैं। 

इसमें एक बात ध्यान रखने वाली जरूर है की निकट भविष्य में सोने के दामों में थोड़ी बहुत उथल-पुथल हो सकती है लेकिन लम्बे समय तक निवेशित होने से यह आपको अच्छा मुनाफा ही प्रदान करेगी।  

जहाँ तक बात है FD(Fixed Deposit) की तो यह पूर्व आधारित ब्याज दर की जमानत देता है। और यह किसी भी अन्य कारको जैसे बाजार में उतार-चढ़ाव से पूर्णतः अछूता।

Rate of Return: प्रतिफल दर:-

 प्रतिफल दर की बात करे तो सोने में निवेश करना आपको ज्यादा मुनाफा देगा बशर्ते आप इसमें लम्बे समय तक निवेशित रहे।  

एक बहुप्रचलित अख़बार में छपी एक रिपोर्ट अनुसार पिछले पांच वर्षों से हर धनतेरस पर सोना खरीदने वाले निवेशकों ने 10 और 15 साल की अवधि में 17.9% सीएजीआर रिटर्न कमाया है, निवेशकों ने क्रमशः 10.7% और 11.9% रिटर्न अर्जित किया है। 

पिछले पांच वर्षों में उच्च रिटर्न को पिछले वर्ष की तुलना में सोने की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। पिछले धनतेरस के दिन सोने की कीमतों में 34% की बढ़ोतरी हुई है।

वही बात करें Fixed-Deposit की तो उसकी अच्छी बात यह हैं की इसके ब्याज पूर्वनिर्धारित होता है जिससे की निवेशक के सामने तस्वीर साफ़-साफ़ रहती है।  

Liquidity Or या कितनी जल्दी उसे बेचकर पैसा लाया जा सकता है:-

इस पैमाने में गोल्ड में निवेश करना ज्यादा सही मन जाता है, क्युकी हम सोने को बेचकर या उसे गिरवी रखकर तत्काल पैसो को पा सकते है।  

लेकिन हमे ये बात ध्यान में रखनी चाहिए की सोने का भाव बाजार के आधीन होता है यानि बाजार में जो सोने का भाव उस वक़्त का होगा उसी की कीमत आपको मिलेगी चाहे फिर वो कीमत आपके ख़रीद से निचे ही क्यों न हो।  

इसलिए सोने में निवेश करते वक़्त हमेश लम्बी अवधि का ही इरादा रखें वर्ण जल्दी के चक्कर में नुकसान हो सकता है।  आजकल सोने में निवेश के जो नए-नए तरीके सामने आये है उससे इसमें निवेश करना और भी आकर्षक हो गया है. 

बात करे FD की तो इसे भी हम अपनी तय अवधि से पहले भी निकल सकते है परन्तु ऐसा करने पर बैंक या जिस जगह से आपने अपना FD करवाया है वह कुछ शुल्क लगा सकता है और आपके पैसों की ताक़त काम कर सकता है।  

इसलिए जब भी निवेश करे तो लम्बी अवधि को ही ध्यान में रखें।  

Loan Against Investment : निवेश के खिलाफ ऋण

सोने और एफडी के मुकाबले मूल्य का लगभग 80% ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

आप आसानी से अपने संबंधित सावधि जमा और बैंकों, एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों), और कई अन्य वित्तीय संस्थानों से प्रतिस्पर्धात्मक ब्याज दरों पर ऋण का लाभ उठा सकते हैं, जो आमतौर पर व्यक्तिगत ऋणों पर लगाए गए ब्याज दरों से कम होते हैं।

इस वर्ष लॉकडाउन के कारण, सोने के मूल्य में भारी वृद्धि हुई और RBI ने भी LTV या ऋण को मूल्य अनुपात में 90% तक बढ़ा दिया। 

इसलिए 1 लाख रुपये का सोना जो आपको पहले 60,000-75,000 रुपये का ऋण प्रदान करता है, अब आपको 90,000 रुपये का ऋण मिलेगा।

जोखिमगोल्ड और एफडी दोनों ही कम जोखिम वाले निवेश हैं।
बाजार की प्रकृतिहालांकि सोने की कीमत प्रकृति में थोड़ी अस्थिर है क्योंकि यह मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों पर निर्भर करता है, एफडी शून्य आय वाले अस्थिरता वाले निश्चित आय वाले साधन हैं। हालांकि, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भी अधिक रिटर्न मिल सकता है और इसने हमेशा लंबे समय तक अपना मूल्य बनाए रखा है।
निवेश से फ़ायदापिछले 30 वर्षों में गोल्ड ने 9.8% का सीएजीआर प्रदान किया है। दूसरी ओर, एफडी ने लगभग 8% का सीएजीआर प्रदान किया है।
जल्द से जल्द नगद मिलने में सहूलियतचयनित अवधि के आधार पर FD लचीली हो सकती हैं। गोल्ड ईटीएफ जैसे सोने के निवेश के अन्य रूपों की शुरुआत के साथ, सोने के निवेश ने लचीलेपन में भी काफी वृद्धि की है। दोनों में से किसी को भी तरल करने का समय संस्थान और छुटकारे की प्रकृति पर निर्भर करेगा।
आये का श्रोतसोने के निवेश को आय उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है। सोना एक संपत्ति है और आपको समय के साथ धन पैदा करने में मदद कर सकता है और मुख्य रूप से अस्थिरता के खिलाफ बचाव का काम करता है। हालांकि, एफडी के मामले में, यदि आप आवधिक भुगतान चुनते हैं, और मासिक आवृत्ति का चयन करते हैं, तो आप मासिक रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं
कर की दरेंगोल्ड से मिलने वाले रिटर्न को ‘कैपिटल गेन्स’ के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा और इंडेक्सेशन से किसी को फायदा हो सकता है। हालांकि, एफडी से मिलने वाले ब्याज पर आयकर की मौजूदा स्लैब दरों पर कर लगता है।

Conclusion:-

एफडी और गोल्ड दोनों निवेश कम जोखिम वाले होते हैं और लंबी अवधि में एक अच्छा कोष बनाने में आपकी मदद कर सकते हैं। संक्षेप में, यदि आप गोल्ड में लंबी अवधि के निवेश की तलाश कर रहे हैं, तो आप उच्च रिटर्न के साथ-साथ टैक्स पर भी बचत कर सकते हैं; कभी-कभी बाजार की अस्थिरता का एक सा उल्लेख करने के लिए नहीं। दूसरी ओर, एफडी आपको तुलनात्मक रूप से कम लेकिन गारंटीड रिटर्न दे सकते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होते हैं। हालाँकि, उपरोक्त कारकों पर विचार करने के बाद, आप उचित परिश्रम का संचालन कर सकते हैं और अपनी जोखिम भूख और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार इस दिवाली निवेश कर सकते हैं।

Interesting facts about Subhas Chandra Bose : सुभाष चंद्र बोस जी से जुड़ी अनसुनी अनकही बातें

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23 January को हमारा देश की मिट्टी से जन्मे एक महान क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस जन्म हुआ था।  वर्ष 2021 में सुभाष चंद्र बोस जी के 124th (Subhash Chandra Bose Birthday) जन्म दिवस मनाएंगे।

 आइए जानते है उस महँ व्यक्ति  अनकही अनसुनी बात्तें (Interesting Facts about Subash Chandra Bose)।  Subhas Chandra Bose Birthday : सुभाष चंद्र बोस जी का जन्मदिवस :-

Subhash Chandra Bose का जन्म 23 January 1897 को ओड़िसा में  हुआ था।स्कूल और विश्वविद्यालय में अपने पूरे अध्ययन में शीर्ष रैंक हासिल की. 

Subhas Chandra Bose Education : सुभाष चंद्र बोस जी की शिक्षा :-

उन्होंने 1918 में प्रथम श्रेणी के स्कोर के साथ दर्शनशास्त्र में B.A पूरा किया। उन्होंने 1920 में इंग्लैंड में भारतीय सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की। 

बाद में, उन्होंने स्वतंत्रता के लिए भारत के संघर्ष के बारे में सुनकर, 23 अप्रैल, 1921 को अपनी सिविल सेवा नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

Subhas Chandra Bose Political carrier  : सुभाष चंद्र बोस जी का राजनैतिक सफ़र :- 

सुभास चंद्र बोस जी 1920 और 1930 के दशक के उत्तरार्ध में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के युवा, कट्टरपंथी, विंग के नेता थे, 1938 और 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए उठे। 

1939 में मोहन करमचंद गांधी के साथ मतभेदों के कारण उन्हें कांग्रेस के नेतृत्व के पदों से हटा दिया गया। और कांग्रेस आलाकमान ने कांग्रेस की विदेश और आंतरिक नीतियों पर खुलकर हमला किया।

Subhas Chandra Bose thinking about freedom : सुभाष चंद्र बोस जी की आज़ादी को लेकर सोच :-

सुभाष चंद्र बोस भले ही कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके थे लेकिन उनकी सोच गांधजी की विचार धरा से एकदम अलग थी और इसी वजह से उन्होंने गांधीजी से मतभेद होने की वजह से अपने पद का त्याग़ कर दिया था।

 उनका मानना था की गांधीजी के अहिंसा के तरीके से आज़ादी मिलना नामुमकिन है।  अपनी इसी सोच की वजह से ब्रिटिश सर्कार ने उन्हें 1921-1941 तक 11 बार गिरफ़्तार किया गया।  

Subhas Chandra Bose’s INA(Indian National Army) : सुभाष चंद्र बोस का आई.एन.ए(आज़ाद हिन्द फ़ौज) :-

द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में, उन्होंने सोवियत संघ, नाजी जर्मनी और इंपीरियल जापान सहित कई देशों की यात्रा की थी, ताकि प्रत्येक के साथ गठबंधन की तलाश की जा सके और भारत में ब्रिटिश सरकार पर हमला किया जा सके।

 बाद में, उन्होंने इंपीरियल जापानी सहायता के साथ फिर से संगठित किया और ब्रिटिश मलाया, सिंगापुर और दक्षिण पूर्व एशिया के अन्य हिस्सों से ब्रिटिश कैदियों के खिलाफ भारतीय कैदियों के युद्ध और वृक्षारोपण श्रमिकों के साथ गठित आजाद हिंद फौज या भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) का नेतृत्व किया।

When Was Indian National Army Founded:- August 1942, South East Asia

1st Head of Indian National Army’s:- आज़ाद हिन्द फ़ौज के पहले अध्यक्ष मोहन सिंह थे।  

When was Subhas Chandra Bose take’s over Indian National Army:-  Subhas Chandra Bose (1943-1945)

सुभाष चंद्र बोसे जी की प्रेरणा का श्रोत:- 

सुभाष चंद्र बोस का मानना ​​था कि भगवत गीता उनके लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत थी। स्वामी विवेकानंद की सार्वभौमिक भाईचारे, उनके राष्ट्रवादी विचारों और सामाजिक सेवा और सुधार पर उनके जोर ने उन्हें एक दृष्टि दी है।

यह भी पढ़ें:- Swami Vivekananda:- Top 12 unknown facts about Swami Vivekananda in Hindi

Subhas Chandra Bose’s Famous Slogan ‘Jai Hind’:-

‘जय हिन्द‘ सुभाष चंद्र बोस द्वारा दिया गया सबसे मशहूर और गौरवान्वित करने वाला नारा पुरे देश को दिया। 

‘जय हिन्द’ का नारा आबिद हसन ने दिया था। यह नारा सुभाष चंद्र बोस ने अपनी आज़ाद हिन्द फ़ौज को दिया था। 

Indian National Army’s Radio Station : आज़ाद हिन्द फ़ौज की रेडियो स्टेशन :-

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी ने जर्मनी में आज़ाद हिन्द फ़ौज का Radio Station की स्थापना की थीं।

सुभाष चंद्र बोस जी की मृत्यु का राज़ : Subhash Chandra Bose’s Death Mystery:-

सुभाष चंद्र बोसे जी की मृत्यु दुनिया के लिए आज भी एक रहस्य बानी हुई है।  नेताजी की मृत्यु की बात की जाए तो उनकी मृत्यु ‘3rd Degree’ जलने से हुई थी।  

उनके जलने कहानी  प्रकार है, जब उनका विमान जब जापान से उड़ा जो की जरुरत से ज्यादा भरा हुआ था वह taiwan के पास जाकर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।  

इसके बाद उनके समर्थकों ने इस बात को पूरी तरह झुठला दिया और इसके बाद से ही अनेक ‘Conspiracy Theory’ शुरू की , जो आज  रही थी।   

Conclusion:- 

नेताजी की मृत्यु कब हुई ये जानने की जरुरत नहीं है हमे।  नेताजी ने जो सन्देश हमे अपने जीवन से दिया है, उससे हमारे ज़हन में हमेश ज़िंदा रहेंगे।  उनका जीवन हमे  की हमे अपनी मातृभूमि की सेवा में आपने जीवन बिता देना चाहिए।  

परिस्तिथिया कितनी भी कठिन हो कभी भी हार नहीं मन्ना चाहिए।  ऐसे महँ इंसान को हमारी तरफ से प्रणाम। 

Swami Vivekananda:- Top 12 unknown facts about Swami Vivekananda in Hindi

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Swami Vivekananda Unknown Facts

Swami Vivekananda जी ऐसा नाम है जिन्होंने पूरे दुनिया के सामने भारत को विश्व गुरु बनाया था।

वह स्वामी जी ही थे जिन्होंने विश्व के समक्ष दुनिया को असल मायनों में समझा-या था की  हिंदुत्व क्या है?(What is Hinduism?) 

स्वामी विवेकानंद जी की ऐसी कई बातें जिसे हम नहीं जानते , या जिसे हम गलत समझते है। 

आज हम आपको स्वामी विवेकानंद जी से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताएँगे (Facts About Swami Vivekananda) जिसे आप  शायद ही जानते होंगे।

ये ऐसी बातें है जिसे जाने के बाद आप Swami Vivekananda जी से प्रेरित और प्रोत्साहित होंगे

1. Who is Swami Vivekananda?

Swami Vivekananda जी का जन्म January 12, 1863 को एक कुलीन परिवार में हुआ था। उनका असली नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। आज उन्ही महान संत के जन्म दिवस के उपलक्ष में पूरा देश ‘National Youth Day’ मनाता है।

2. विश्व को हिन्दू वेदांत का दर्शन समझाना :-

Swami Vivekananda जी ने ही पाश्यात समाज को ‘Hindu Vedanta Philosophy’ से अवगत कराया।

स्वामी जी अपने जीवन के बहुत कठिन समय से गुजर रहे थे जब उनकी मुलाकात, उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस जी से हुई थी

स्वामी जी ने आपने गुरु के शरीर त्यागने के बाद पूरे देश की यात्रा का मन बनाया।  उनका मानना था की एक सन्यासी को एक स्थान में कभी भी नहीं रहना चाहिए क्योंकि इससे समाज में मौजूद कुरीतिया उससे जुड़ने लगती है।  

स्वामी जी ने अपने गुरु के शरीर त्यागने के 15 दिनों बाद अपनी यात्रा की शुरुआत की थी।

3. स्वामी जी का परिवार; Swami Vivekananda’s Family :-

स्वामी विवेकानंद जी एक समृद्ध परिवार में पैदा हुए थे। उनके पिता श्री विश्वनाथ दत्ता एक Attorney थे।  उनकी माता जी का नाम भुवनेश्वरी देवी था। उन्हें मिलाकर वह 3 भाई थे।  उनकी एक बेहेन भी थी।  

उनके दोनों भाइयों का नाम क्रमशैः भूपेंद्र-नाथ दत्ता (1880-1961) और महेंद्र-नाथ दत्ता था।  उनकी बेहेन का नाम स्वर्णमोयी देवी (16 फरवरी 1932 को मृत्यु) था।  

उनके पिता की अचानक मृत्यु होने से उनका समस्त परिवार घोर गरीबी की चपेट में आ गया था।

गरीबी कुछ इस प्रकार बढ़ चुकी थी की स्वामी जी रात को यह बहाना बनाते थे की उनके दोस्त उन्हें खाने में बुलाया है ताकि उनका परिवार पेट भर खाना खा सके।  

परन्तु इस कारण उन्हें भूख की अत्यंत तेज़ पीड़ा से गुज़ारना पड़ता था।

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4. विवेकानंद जी का पढ़ाई में रुझान :-

जब शिक्षाविदों की बात आई, तो नरेंद्र नाथ दत्त अंक पाने में महान नहीं थे। उन्होंने तीन विश्वविद्यालय परीक्षाएं लीं – प्रवेश परीक्षा, प्रथम कला मानक (एफए, जो बाद में इंटरमीडिएट आर्ट्स या IA) और बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) बन गया। अंग्रेजी भाषा में उनका स्कोर प्रवेश स्तर पर 47 प्रतिशत, एफए में 46 प्रतिशत और बीए में 56 प्रतिशत था।

5. स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहँस मुलाक़ात :-

एक वक़्त ऐसा भी था जब Swami Vivekananda जी spiritual crisis से गुज़र रहे थे।ऐसा इसलिए हो रहा था क्योंकि वह लम्बे समय से बेरोज़गार चल रहे थे।

तब उनकी मुलाकात 1881 में उनके गुरु श्री राम कृष्ण परमहंस जी से हुईं। उनकी यह मुलाकात उनके English Professor ने करवाई थीं।  

वह रामकृष्ण परमहँस ही थे जिन्होंने विवेकानंद जी को आध्यात्मिक स्पष्टता प्रदान की थी। वह रामकृष्ण जी से इतने प्रभावित हुए की वह उनके शिष्य बन गए।

विवेकानंद जी से जुड़े कुछ आया रोचक तथ्य :-

6. कैसे पड़ा नाम Swami Vivekananda?

वर्ष 886 में उन्होंने और रामकृष्ण जी के अन्य शिष्यों ने अपने गुरु के समान जीवन जीने की शपथ ली।और नरेंद्र नाथ दत्ता बन गए Swami Vivekananda .

7. बंगाली गीतों का संकलन :-

स्वामी जी वर्ष १८८७ में एक बंगाली गीतों को संकलित कर एक album निकला था जिसका नाम था ‘‘संगीत कालपतरू”। ऐसा वह जिस व्यक्ति की मदद उनका नाम था वैष्णव चरण बसक।

8. स्वामी विवेकानंद जी का ऐतिहासिक भाषण ; Swami Vivekananda Speech :-

11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद जी का शिकागो में बोला गया भाषण। (11 September 1893 Vivekananda Chicago speech) . जिसमें उन्होंने “शिव महिमा स्त्रोतम” के आधार पर मनुष्य के विभिन्न मार्गों की तुलना की है, आज भी याद किया जाता है .

9. स्वामी जी ने मठ कब छोड़ा?

स्वामी जी ने 1888 को मठ छोड़ कर सन्यासी जीवन को चुना। यही कारण रहा की अगले 5 सालों तक जीवन एक सन्यासी की तरह भिक्षा माँगकर व्यतीत किया था। इस यात्रा में उन्होंने बहुत सारे शिक्षक संस्थानों, मंदिरों और अन्य बड़े साधुओं से भेट की।

10. वेदांता सोसाइटी की स्थापना :-

स्वामी विवेकानंद जी ने जून 1899 में उन्होंने न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिसको में Vedanta Society की स्थापना की।

11. विवेकानंद जी की प्रमुख साहित्यिक रचना :-

संगीत कालपतरू’ (1887), ‘कर्म योग’ (1896), ‘राजा योग’ (1896), ‘वेदांता दर्शन’ (1897), ‘जनाना योग’ (1899), ‘माई मास्टर’ (1901), ‘वेदांता दर्शन: जनाना योग व्याख्यान’ (1902) और ‘वर्तमान भारत’ जो बंगाली भाषा में हैं।

12. स्वामी विवेकानंद जी ने कब शरीर त्यागा ? Swami Vivekananda Death :-

स्वामी विवेकानंद जी ने अपना शरीर 4 जुलाई 1902 को त्यागा था। शाम करीब 7 बजे वह अपने सहयोगियों समक्ष वैदिक कॉलेज की स्थापना के बारे में चर्चा करने के बाद अपने कमरे में गए। वह जाकर उन्होंने ध्यान मुद्रा लगाई और शरीर त्याग दिया।

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