Dr. Bhimrao Ambedkar : भारत की मिट्टी मे जन्मा ,भारत का अन्मोल रत्न

0
1524
Babasaheb Bhimrao Ambedkar

Babasaheb Bhimrao Ambedkar जिन्हे भारतीय संविधान के रचइता भी कहा जाता है. जिन्होंने अपनी सरी ज़िन्दगी मानवाधिकारों की लड़ाई और शोषित वर्ग के उत्थान में लगा दी। इन्होने 1927 में Columbia University से अर्थशात्र से अपनी PhD की पढाई पूरी की थी। बाबासाहेब का जीवन हमे इस बात की प्रेरणा देता है की ज़िन्दगी में लोग आपकी रह में कितने भी रोड़े डालें अगर आप दृढ़ निश्चयी है तो ज़िन्दगी में फल होने से आपको कोई भी नहीं रोक सकता।

प्रारंभिक जीवन

डॉ भीमराव अंबेडकर जी का जन्म १४ अप्रैल १८९१ को महौ जिले मे हुआ जो उस वक़्त के सेंट्रल प्रोविन्सेस और आज के मध्य प्रदेश मे आता है. वह आपने १४ भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. बाबासाहेब का जन्म मराठी परिवार में हुआ था. उनका परिवार माहर जाति से आता था जिसकी वजह से उन्हें छोटी सी उम्र में ही छूत -अछूत का सामना करना पड़ा.

बचपन से ही बाबासाहेब पढ़ने में अपने सभी भाई-बहनो में सबसे अधिक प्रतिभावान थे. इनका परिवार कई पीढ़ियों से सेना में कार्यरत था. इनके पूर्वज ईस्ट इंडिया कंपनी के समय सेना में कार्य किया करते थे और इनके पिता ब्रिटिश इंडियन आर्मी में कार्य करते थे.

जब बाबासाहेब के पिता सेना से सेवानिवृत हुए उसके बाद वह  सतारा चले गए जहां कुछ ही समय में बाबासाहेब की माँ का निधन हो गया. माँ के निधन के बाद उनको और बाकि बच्चों को  उनकी चाची ने पाला | सभी बच्चो में केवल बाबासाहेब ही ऐसे थे जिन्होंने आगे पढाई की.बाबासाहेब का कुल नाम(surname) सकपाल था परन्तु उनके पिता ने पाठशाला में  उनका कुल नाम उनके पैतृक गाँव “अम्बाडावे” जो की रत्नागिरी में हैं उसके अनुरूप अंबडवेकर के नाम से दाखिला करवाया। आगे चलकर ब्राह्मण गुरु जिनका नाम कृष्णा केशव अम्बेडकर था उन्होंने बाबासाहेब को आपने कुल नाम से पाठशाला में दर्ज करवाई

बाबासाहेब की शिक्षा

जब बाबासाहेब का परिवार मुंबई आया तब Bhimrao ambedkar ji एक लौते ऐसे अछूत(यह शब्द केवल उस समय बाबासाहेब के संघर्ष को प्रस्तुत करने इस्तेमाल किया हैं) थे, जिनका दाख़िला Elphinstone high school में हुआ था. उन्होने मैट्रिक कि परीक्षा वर्ष १९०७ उत्तीर्ण की.उसके बाद Elphinstone college में दाख़िला लिया।

यह कहा जाता है की ऐसा करने वाले वह माहर जाति से संबंधित प्रथम व्यक्ति थे। १९१२ आते-आते  बाबासाहेब ने राजनीति विज्ञान और अर्थशात्र में Bombay university से अपनी डिग्री प्राप्त की।  

१९२२ को बाबासाहेब को USA जाकर पढ़ने का मौका मिला। यह मौका उन्हें बड़ौदा के गायकवाड़ सयाजीराव गायकवाड़ ||| द्वारा शुरी की गई योजना जिसका नाम Baroda State Scholarship था के तहत मिला | इस योजना के तहत विद्यार्थी को £११.५० की सहायता राशि हर महीने ,३ सालो तक प्रदान करने का प्रावधान था. इसी योजना का लाभ उठाते हुए बाबासाहेब ने स्नातकोत्तर की पढाई USA के Columbia University से पूरी की | १९५१ में उन्होंने अर्थशात्र व अन्य विषयों जैसे  समाजशास्त्र, इतिहास, दर्शनशास्त्र और नृविज्ञान में M.A की डिग्री हासिल की। उन्हें १९२७ को अर्थशत्र के विषय में कार्य के लिए PhD से नवाजा गया। 

उन्होंने अक्टूबर १९१६ में वकालत की पढाई के लिए Grey’s  Inn में दाखिला लिया और १९२३ में अपनी स्नातकोत्तर उपाधि पूरी की। 

अस्पृश्यता के खिलाफ बाबासाहेब Bhimrao Ambedkar जी का संघर्ष।  

बाबासाहेब का जीवन संघर्षो से से भरा हुआ रहा। बाबासाहेब जब अपनी पढाई पूरी कर विदेश से भारत आये तब उन्होंने बड़ोदरा में नौकरी करनी शुरू की , उन्हें गायकवाड़ सैन्य सचिव बनाया गया। यह कार्य उन्होंने जल्द ही छोड़ दिया और अपनी दिलचस्पी अनुसार अलग-अलग कार्य किये परन्तु हर जगह उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा। १९१८ मई उन्हें  Sydenham College of Commerce and Economics में बतौर प्राध्यापक नियुक्त किया गया , वह भी उन्हें अपने साथी कर्मियों से भेदभाव का सामना करना पड़ता था।   

आंबेडकर जी को Southborough Committee के सामने अपनी राय रखने बुलाया गया , यह समिति Government of India  Act 1919 की संरचना त्यार करने का कार्य कर रही थी | इस समिति के समछ बाबासाहेब ने अछूतों और अन्य धार्मिक समुदायों के लिए अलग निर्वाचक मंडल बनाने की मांग की। 

 जब साहेब बॉम्बे हाई कोर्ट में कार्यरत थे तब उन्होंने अछूतो और दबे कुचले लोगो के उत्थान के लिए कई कार्य किये।इसकी ओर उनका पहला महत्वपुर्ण कार्य था , “बहिष्कृत हितकारणी सभा” का निर्माड करना। इस सभा का केवल एक ही उद्देश्य था , जो लोग शोषित और सामाजिक कुरीतियों से परेशान और सताए हुए है उनके उत्थान के लिए कार्य करना।

 बाबासाहेब ने कालाराम मंदिर के नाम से भी एक आंदोलन चलाया था।  यह आंदोलन १९३० में शुरू हुआ था जिसमे १५००० स्वयंसेवक शामिल हुए थे।  यह नासिक में उस वक़्त का सबसे बड़ा जुलुस था यह जुलुस सेना के किसी बेंड की तरह चलाया गया था जिसमे बच्चे, बूढ़े और महिलाये शामिल थी, परन्तु जब यह जुलुस मंदिर के सामने पंहुचा तो मंदिर का दरवाज़ा उन्हें बंद मिला | 

ऐतिहासिक संधि-Poona Pact

साल १९३२ में अंग्रेजों ने शोषित वर्ग के लिए अलग से निर्वाचन मंडल बनाने की घोषणा की, जिसे ‘Communal  Award’ नाम दिया गया।यह बात गाँधीजी को बिलकुल पसंद नहीं आई , क्योंकि उन्हें यह डार था की ये मंडल हिन्दुओ के बीच विभाजन का कार्य करेगा और वह पुणे की यरवडा जेल में भूख हड़ताल पर बैठ गए। 

यह सब देखते हुए कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बाबासाहेब अंबेडकर और उनके कार्यकर्ताओं के साथ पुणे की जेल में एक बैठक करने बुलाया गया। २५ सितम्बर १९३२, ये वह ऐतिहासिक दिन है, जब शोशित वर्ग का प्रतिनिधित्व बाबासाहेब कर रहे थे और बाकी हिन्दुओ का प्रतिनिधित्व मदन मोहन मालवीय जी कर रहे थे। यह समझौता poona pact कहलाया जिसके तहत हिन्दुओ के शोषित वर्ग को अनंतिम विधायिका में 148 सीटें आरक्षित रहेंगी जो के ब्रिटिश प्रधानमंत्री Ramsay MacDonald के ‘Communal अवॉर्ड से कही ज्यादा थी।

बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी के बारे में अगर लिखना शुरू करे तो कई किताबे कम पड़ जाएँगी इसलिए निचे कुछ मुख्य बिंदु आप सब के समक्ष लाना चाहूँगा जिससे बाबासाहेब के व्यक्तित्व की एक झलक आप सब को दिखा सकू  | 

  • बाबासाहेब के पास व्यक्तिगत पुस्तकालय भी थीं , जिसमे ५०,००० से भी ज्यादा पुस्तकें थीं | 
  • वर्ष १९३६ में उन्होंने ‘Independent Labour Party’ का गठन किया और 1937 के बॉम्बे के चुनाव में भाग भी लिया जिसमे उन्हें १३ आरक्षित सीटों में ११ में जीत हासिल हुई व ४ अनारक्षित सीटों में से ३ में विजय मिली। 
  • बाबासाहेब अनुच्छेद ३७० के सख्त खिलाफ थे , उनका कहना था ‘अगर भारत कश्मीर के लिए सड़के बनाये , खाना-राशन पहुचाये परन्तु उसका कश्मीर की जमीन में एक सिमित अधिकार हो, कानून मंत्री होने के नाते में यह स्वीकार नहीं कर सकता’. 
  • बाबासाहेब आंबेडकर स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री थे।  
  • बाबासाहेब भारत के ऐसे पहले नागरिक थे जिन्होंने विदेश से अर्थशास्त्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि हासिल की थी।  

बाबासाहेब की मृत्यु 

बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर जी को मधुमेह की बीमारी थी |  बाबासाहेब राजनीतिक गतिविधियों को लेकर बहुत ज्यादा परेशान रहते थे , और यह व्यस्तता और परेशानियाँ उनके स्वास्थ पर असर करने लगी थी।  बाबासाहेब जब अपनी अंतिम पुस्तक The Buddha and His Dhamma, ख़तम ही किये थे तब ६ दिसंबर १९५६ को नींद मई ही वह शांत हो गए।  

ऐसे ही कई प्रेरणादायक जीवनियों को पढ़ने के लिए बगल में दिए गए लिंक में क्लिक करे ⇨ Click Here

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here