Swami Vivekananda:- Top 12 unknown facts about Swami Vivekananda in Hindi

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Swami Vivekananda Unknown Facts

Swami Vivekananda जी ऐसा नाम है जिन्होंने पूरे दुनिया के सामने भारत को विश्व गुरु बनाया था।

वह स्वामी जी ही थे जिन्होंने विश्व के समक्ष दुनिया को असल मायनों में समझा-या था की  हिंदुत्व क्या है?(What is Hinduism?) 

स्वामी विवेकानंद जी की ऐसी कई बातें जिसे हम नहीं जानते , या जिसे हम गलत समझते है। 

आज हम आपको स्वामी विवेकानंद जी से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताएँगे (Facts About Swami Vivekananda) जिसे आप  शायद ही जानते होंगे।

ये ऐसी बातें है जिसे जाने के बाद आप Swami Vivekananda जी से प्रेरित और प्रोत्साहित होंगे

1. Who is Swami Vivekananda?

Swami Vivekananda जी का जन्म January 12, 1863 को एक कुलीन परिवार में हुआ था। उनका असली नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। आज उन्ही महान संत के जन्म दिवस के उपलक्ष में पूरा देश ‘National Youth Day’ मनाता है।

2. विश्व को हिन्दू वेदांत का दर्शन समझाना :-

Swami Vivekananda जी ने ही पाश्यात समाज को ‘Hindu Vedanta Philosophy’ से अवगत कराया।

स्वामी जी अपने जीवन के बहुत कठिन समय से गुजर रहे थे जब उनकी मुलाकात, उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस जी से हुई थी

स्वामी जी ने आपने गुरु के शरीर त्यागने के बाद पूरे देश की यात्रा का मन बनाया।  उनका मानना था की एक सन्यासी को एक स्थान में कभी भी नहीं रहना चाहिए क्योंकि इससे समाज में मौजूद कुरीतिया उससे जुड़ने लगती है।  

स्वामी जी ने अपने गुरु के शरीर त्यागने के 15 दिनों बाद अपनी यात्रा की शुरुआत की थी।

3. स्वामी जी का परिवार; Swami Vivekananda’s Family :-

स्वामी विवेकानंद जी एक समृद्ध परिवार में पैदा हुए थे। उनके पिता श्री विश्वनाथ दत्ता एक Attorney थे।  उनकी माता जी का नाम भुवनेश्वरी देवी था। उन्हें मिलाकर वह 3 भाई थे।  उनकी एक बेहेन भी थी।  

उनके दोनों भाइयों का नाम क्रमशैः भूपेंद्र-नाथ दत्ता (1880-1961) और महेंद्र-नाथ दत्ता था।  उनकी बेहेन का नाम स्वर्णमोयी देवी (16 फरवरी 1932 को मृत्यु) था।  

उनके पिता की अचानक मृत्यु होने से उनका समस्त परिवार घोर गरीबी की चपेट में आ गया था।

गरीबी कुछ इस प्रकार बढ़ चुकी थी की स्वामी जी रात को यह बहाना बनाते थे की उनके दोस्त उन्हें खाने में बुलाया है ताकि उनका परिवार पेट भर खाना खा सके।  

परन्तु इस कारण उन्हें भूख की अत्यंत तेज़ पीड़ा से गुज़ारना पड़ता था।

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4. विवेकानंद जी का पढ़ाई में रुझान :-

जब शिक्षाविदों की बात आई, तो नरेंद्र नाथ दत्त अंक पाने में महान नहीं थे। उन्होंने तीन विश्वविद्यालय परीक्षाएं लीं – प्रवेश परीक्षा, प्रथम कला मानक (एफए, जो बाद में इंटरमीडिएट आर्ट्स या IA) और बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) बन गया। अंग्रेजी भाषा में उनका स्कोर प्रवेश स्तर पर 47 प्रतिशत, एफए में 46 प्रतिशत और बीए में 56 प्रतिशत था।

5. स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहँस मुलाक़ात :-

एक वक़्त ऐसा भी था जब Swami Vivekananda जी spiritual crisis से गुज़र रहे थे।ऐसा इसलिए हो रहा था क्योंकि वह लम्बे समय से बेरोज़गार चल रहे थे।

तब उनकी मुलाकात 1881 में उनके गुरु श्री राम कृष्ण परमहंस जी से हुईं। उनकी यह मुलाकात उनके English Professor ने करवाई थीं।  

वह रामकृष्ण परमहँस ही थे जिन्होंने विवेकानंद जी को आध्यात्मिक स्पष्टता प्रदान की थी। वह रामकृष्ण जी से इतने प्रभावित हुए की वह उनके शिष्य बन गए।

विवेकानंद जी से जुड़े कुछ आया रोचक तथ्य :-

6. कैसे पड़ा नाम Swami Vivekananda?

वर्ष 886 में उन्होंने और रामकृष्ण जी के अन्य शिष्यों ने अपने गुरु के समान जीवन जीने की शपथ ली।और नरेंद्र नाथ दत्ता बन गए Swami Vivekananda .

7. बंगाली गीतों का संकलन :-

स्वामी जी वर्ष १८८७ में एक बंगाली गीतों को संकलित कर एक album निकला था जिसका नाम था ‘‘संगीत कालपतरू”। ऐसा वह जिस व्यक्ति की मदद उनका नाम था वैष्णव चरण बसक।

8. स्वामी विवेकानंद जी का ऐतिहासिक भाषण ; Swami Vivekananda Speech :-

11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद जी का शिकागो में बोला गया भाषण। (11 September 1893 Vivekananda Chicago speech) . जिसमें उन्होंने “शिव महिमा स्त्रोतम” के आधार पर मनुष्य के विभिन्न मार्गों की तुलना की है, आज भी याद किया जाता है .

9. स्वामी जी ने मठ कब छोड़ा?

स्वामी जी ने 1888 को मठ छोड़ कर सन्यासी जीवन को चुना। यही कारण रहा की अगले 5 सालों तक जीवन एक सन्यासी की तरह भिक्षा माँगकर व्यतीत किया था। इस यात्रा में उन्होंने बहुत सारे शिक्षक संस्थानों, मंदिरों और अन्य बड़े साधुओं से भेट की।

10. वेदांता सोसाइटी की स्थापना :-

स्वामी विवेकानंद जी ने जून 1899 में उन्होंने न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिसको में Vedanta Society की स्थापना की।

11. विवेकानंद जी की प्रमुख साहित्यिक रचना :-

संगीत कालपतरू’ (1887), ‘कर्म योग’ (1896), ‘राजा योग’ (1896), ‘वेदांता दर्शन’ (1897), ‘जनाना योग’ (1899), ‘माई मास्टर’ (1901), ‘वेदांता दर्शन: जनाना योग व्याख्यान’ (1902) और ‘वर्तमान भारत’ जो बंगाली भाषा में हैं।

12. स्वामी विवेकानंद जी ने कब शरीर त्यागा ? Swami Vivekananda Death :-

स्वामी विवेकानंद जी ने अपना शरीर 4 जुलाई 1902 को त्यागा था। शाम करीब 7 बजे वह अपने सहयोगियों समक्ष वैदिक कॉलेज की स्थापना के बारे में चर्चा करने के बाद अपने कमरे में गए। वह जाकर उन्होंने ध्यान मुद्रा लगाई और शरीर त्याग दिया।

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