General Ian Cardozo – एक ऐसा भारतीय जवान जिसने युद्ध के दौरान अपनी खुर्की से खुद के पैर काटके जंग लड़ी | Indian Army’s first war-disabled major general

0
3304
Ian Cardozo

Ian Cardozo, 1971 के भारत पाक युद्ध में अपना पैर खो बैठे। उन्होंने अपनी आत्मा नहीं खोई और कृत्रिम पैर के साथ प्रशिक्षण शुरू किया। उन्होंने 7 अधिकारियों को पीछे छोड़ते हुए बैटल फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट लिया।

हमारी भारतीय सेना का इतिहास जबाज़ी और शौर्य की कहानियों से भरा पड़ा हैं | इन्ही मे से एक जवान की कहानी आज हम आप के समक्ष प्रस्तुत करने जा रहे है | इस जवान का नाम है मेजर जनरल Ian Cardozo, जिनके हौसले और साहस के आगे अपंगता नामक वज्र ने खुदको उनके समक्ष नतमस्तक किया |

कौन हैं Ian Cardozo?

Ian Cardozo का जन्म, पिता विन्सेंट कार्डोज़ो व माँ डायना कार्डोज़ो के घर 1937 में मुंबई प्रेसिडेंस उस वक्त के ब्रिटिश इंडिया में हुआ था |
मेजर जनरल ने अपनी स्नातक की पढ़ाई नेशनल डिफेंस एकेडमी से की , उसके बाद उन्होंने इंडियन मिलिट्री एकेडमी में भाग लिया , जहां से वह 5 गोरखा रायफ़ल्स में शामिल हुए | उन्होंने अपनी सैन्य वृत्ति में दो लड़ाई लड़ी 1965, 1971 indo-pak जंग | वह पहले ऐसे सैनिक छात्र थे जिन्हें सिल्वर और गोल्ड मेडल प्राप्त हुआ था|

1971 का भारत-पाक युद्ध

1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध शुरू हुआ तब (Ian Cardozo)कार्डोजो वैलेंटाइन कॉलेज ,तमिलनाडु में पढ़ाई कर रहे थे | उनकी पल्टन 4/5 गोरखा रायफ़ल्स युद्ध मे  पहले से ही तैनात कर दी गई थी | पल्टन के सहायक अध्यक्ष युद्ध के दौरान शहीद हो जाते हैं और तब उन्हे उनकी जगह पर बुलाया जाता है | जब कार्डोजो वहां पहुंचे तब भारतीय सेना अपना पहला हेलीबोर्न ऑपरेशन “सिहलेत की जंग”  करने जा रही थी |

नोट -: उन्हें उनके पल्टन के अन्य सैनिक “कारतूस साहब” के नाम से पुकारते थे, उन्हें उनका नाम लेने मे बहुत कठिनाई महसूस होती थी|

जब युद्ध खत्म हुआ और भारतीय सेना युद्ध बंदियों को गिनने जा रही थी, तभी कुछ ऐसा हुआ जो मेजर कार्डोजो(Ian Cardozo) की जिंदगी हमेशा के लिए बदल के रख दिया और उनका नाम भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से लिखवा दिया | जब काटजू युद्ध बांधियो की गिनती करने जा रहे थे तभी उनका पैर गलती से एक लैंड माइंड के ऊपर रखा गया एक बहुत ही तेज धमाका हुआ, उनका उनके पैर का एक बहुत बड़ा हिस्सा फट के बाहर चला गया| 

इस धमाके से जो बचा हुआ पैर का हिस्सा शरीर के साथ जुड़ा था उसे काटना जरुरी था ,क्योंकि अगर ऐसा नहीं करते तो गैंग्रीन हो जाता | परंतु उस वक्त स्थिति कुछ यूं थी कि एनएसथीसिया ना होने के कारण और सर्जिकल सामान ना होने कारण उस पर शल्यक्रिया के द्वारा अलग नहीं किया जा सकता था |

वक्त बर्बाद होता देख उन्होंने पैर खुद की खुर्की से ही अपना पैर काट लिया और उस कटे हुए पैर को कहीं दफ़नाने के लिए कहा | बाद में उनके पैर का इलाज एक पाकिस्तानी मेजर मोहम्मद बशीर था उन्होंने किया |

इस हादसे के बाद किसी भी एक आम जवान की भारतीय सेना से छुट्टी हो जाती है परंतु कार्डोज़ो ने इसे एक चुनौती की तरह स्वीकार किया और आदम्य सहस से अपनी अपंगता को हराया |

महानता का रास्ता आसान नहीं होता इसमें चलने के लिए लोहे का हौसला और पहाड़ो सा अटल विश्वास चाहिए होता है 

Ian Cardozo

Ian Cardozo पहले युद्ध-अक्षम सेना अधिकारी बने,जिन्होंने न केवल पल्टन का बल्कि एक ब्रिगेड का भी नेतृत्व किया | स्वास्थ्य परीक्षण मैं सफल होने के के बावजूद मेजर कार्डोज़ो को परीक्षण में आगे नहीं बढ़ने दिया | यह देख कार्डोज़ो ने अपना मामला उस वक्त के भारतीय सेना के प्रमुख तपेश्वर रहना के पास ले गए | मेजर कारडोसो के आत्मविश्वास से खुश होकर, सेना प्रमुख ने उन्हें अपने साथ लद्दाक आने का अवसर दिया

जब उन्होंने देखा कि Major Cardozo बहुत ही आसानी से पथरीले पहाड़ और बर्फीले रास्तों में बिना किसी मुश्किल के आसानी से चल और चढ़ पा रहे हैं उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उन्हें एक बटालियन कमांड करने के लिए प्रस्तावित किया |

यह कहानी एक बार फिर दोहराई गई, जब Major Ian Cardozo ने ब्रिगेड की भी कमान संभालने का प्रस्ताव रखा और वह फिर से विजेता साबित हुए | उन्होंने यह तर्क रखा कि जब वह बहुत ही आसानी और कुशलता पूर्वक एक बटालियन की कमान संभाल सकते हैं तो वह एक ब्रिगेड को भी उतनी ही कुशलता से संभालने का मादा रखते हैं|

सेवानिवृत्ति के बाद Major General Ian Cardozo ने भारतीय पुनर्वास परिषद की अध्यक्षता 2005 से 2011 तक की |ऐसे महान सेनानायक को अपनी जिद बहादुरी और कुशलता से जीवन के तमाम और बाधाओं को सफलतापूर्वक हटा कर एक नया मुकाम हासिल किया शत शत नमन

भारत के एक और सपूत के शौर्य की कहानी पढ़े – Captain Vikram Batra

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here