Kartik Purnima 2020 :- Kartik Purnima कब है? क्यों मनाया जाता है ये त्यौहार?पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त कब है?

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Kartik Purnima kab hai

Kartik Purnima 2020 -: हमारे हिन्दू धर्म को अगर त्योहारों को धर्म कहा जाये तो गलत नहीं होगा।  हमारे धर्म के अनुसार हर साल में 12 पूर्णिमा होती है। परन्तु सभी पूर्णिमाओं में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। 

Kartik Purnima में गंगा में डुबकी या अन्य किसी भी पवित्र नदियों में डुबकी लगाने में विशेष महत्व है।  सिर्फ ये ही नहीं वस्त्र दान करना या कोई भी अच्छे काम को करने में कई गुना ज्यादा पुण्य प्राप्त होता है।  

आइये जानते है कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ी कुछ प्रचलित कथाएँ जानते है।  

वैष्णव मत के अनुसार कथा -:

वैष्णव समाज के लोगों के लिए Kartik Purnima का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि उनके अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने १० अवतारों में से पहला अवतार जो की मतस्य था . 

 प्रलय काल में वेदों की रक्षा के लिए इसी कार्तिक मास में लिया था। और वेदों की मानें तो इसी कार्तिक पूर्णिमा के दिन विष्णु जी अपने मत्स्य अवतार को त्याग कर बैकुंठ धाम वापस जाते है।  

इसलिए वैष्णव पंथ को मानने वालों के लिए कार्तिक  विशेष महत्व है।  

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शैव मत के लोगों के अनुसार कथा -:

Kartik Purnima का महत्व शैव भक्तों के लिए विशेष महत्व इसलिए रखता है , क्योंकि कथाओं के अनुसार इस दिन शिवजी ने तीनों लोकों में हाहाकार मचाने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था।  

इसी राक्षस के वध के बाद तीनो लोकों में धर्म की स्थापना एक बार फिर से की जा सकी।

इसी असुर के वध के बाद ही शिबजी को त्रिपुरारी के नाम से जाना जाने लगा।  

महाभारत  कथा के अनुसार Kartik Purnima का महत्व –

जब महाभारत के समाप्त होने के बाद पांडव बहुत दुखी हो गए थे।  उनके दुःख का कारण महाभारत के युद्ध में उनके रिश्तेदारों की असमय मृत्यु हो जाना था।  

उनके अनुसार अब उनके परिवार वालों की आत्मा को शांति कैसे मिलेगी? यह सब देखकर श्री कृष्ण जी ने उन सब को पितरों की शांति के लिए एक उपाय सुझाया।  

उन्होंने उन्हें एक विधि बताई जिसे कार्तिक शुक्ल अष्टमी  से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक करनी थी।  पांडवों ने उसे पूरी विधि को नियम अनुसार पूरा किया और कार्तिक पूर्णिमा के दिन गढ़ मुक्तेश्वर में तर्पण और दीप दान किया। 

यही कारण है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन से गढ़मुक्तेश्वर में तर्पण और दीप दान की परंपरा प्रचलित है। 

सिख धर्म के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा का महत्व।  

कार्तिक पूर्णिमा सिखों के लिए एक विशेष स्थान इसलिए रखता है क्योंकि इस दिन सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु गुरु नानक जी का जन्मदिन होता है।  

इसलिए सिख धर्म में इस दिन को प्रकाश पर्व के नाम से मनाया जाता है।  

२०२० में कब है Kartik Purnima का पर्व?

इस बार कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 30 नवंबर को पड़ रहा है।  इस दिन आप गंगा में डुपकी लगा कर विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है।  

इस दिन गुरु नानक जी का जन्मदिन होने के कारण यह दिन विशेष महत्व रखता है।  

कब है स्नान का शुभ मुहूर्त 

जैसा की हमने पहले ही चिन्हित किया है, इस बार पूर्णिमा ३० को है परन्तु इसमें एक बात ध्यान में रखने योग्य है की इसकी तिथि 29 तारीख को ही शुरू हो रही है और समाप्ति 30 को है।  

प्रारम्भ तिथि- 29 नवंबर रात 12 बजकर 47 मिनट से

समाप्त तिथि- 30 नवंबर रात 02 बजकर 59 मिनट तक 

गंगा स्नान – 30 नवंबर 

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