भगवान परशुराम – संन्यासी , योद्धा और गुरु | Lord Parshuram – Monk , Warrior and Guru

0
2477
Parshuram

नमस्कार दोस्तों , आज हम जिस भगवान के बारे में आपको बताने जा रहे है , वह भगवान विष्णु के छटवे अवतार है व कथाओ के अनुसार वह आज भी इस धरती में विचरड़ कर रहे है | जी हाँ आप लोगो ने सही समझा मैं बात कर रहा हुँ , भगवन परशुराम(Parshuram ji) जी की .

कौन हैं भगवान परशुराम? | Who is Lord Parshuram?

Lord Parshuram
Source – Internet

हमारे यहाँ भगवान परशुराम जी के जन्म को लेकर बहुत सी कहानियाँ प्रचलित हैं , परन्तु सबसे ज्यादा प्रचलीत कथा अनुसार भगवान परशुराम जी (Parshuram ji) का जन्म एक ब्राह्मण साधु के घर हुआ था. उनके पिता का नाम जमदगिनी (यह सात सप्त ऋषियों में से एक थे) और माता का नाम रेणुका (जो की एक क्षत्रिय थी) के घर हुआ था | भगवान परशुराम जी का जन्म स्थान जनापाव की पहाड़ी माना जाता है , जो की मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में आता है। भगवान परशुराम जी के जन्म की तिथि वैशाख शुल्क तृतीया माना जाता है।

कैसे पड़ा इनका नाम परशुराम? | how he got his name parshuram?

Parshuram
Source – Internet

भगवन परशुराम(Lord Parshuram) जी के माता और पिता ने उनका नाम पहले राम रखा था। परन्तु जब वह बड़े हुए तब उनके पिता ऋषि जमदागिनी ने उन्हें हिमालय जाकर भगवान शंकर की आराधना करने का आदेश दिया। भगवान परशुराम पिता का आदेश पाकर हिमालय चले गए. वहाँ जाकर भगवान शंकर की कठोर तपस्या की और जिससे प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उन्हें दानवों और असुरो के संघार का आशिर्वाद प्रदान किया।उन्होंने अपने पराक्रम और शौर्य के बल से असुरो का संघार किया। यह देख भगवन शंकर उनसे बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें परशु नाम का अस्त्र प्रदान किया। इसी अस्त्र के मिलने के बाद उनका नाम राम से परशुराम हो गया।

क्यों भगवान परशुराम ने अपनी ही माता का सिर काट दिया था ? | Why did lord parshuram behead his own mother?

Parshuram behead his mother
Source – Internet

भगवान परशुराम जी(Lord Parshuram) के बारे में ये कथा बहुत प्रचिलित है , की उन्होंने अपने चारो भाई व माता का गला काट दिया था. परन्तु उन्होंने ऐसा क्यों किया था यह बहुत ही काम लोगो को मालूम है।चलिए जानते है ऐसा क्या हुआ की भगवान परशुराम को अपनी ही माता व भाइयों का गाला काटना पड़ा ?

एक बार महाऋषि जमदागिनी  ने अपनी पत्नी रेणुका को जल लाने का आदेश दिया , जब माता रेणुका नदी में जल लेने गई तो वहां चित्ररथ, अप्सराओं के साथ स्नान कर रहे थे. उन्हें स्नान करता देख माता रेणुका वहीं रुक गयी और महाऋषि जी के यज्ञ का वक़्त समाप्त हो गया।जब उन्होंने अपनी दिव्या दृष्टि से देखा की माता रेणुका के विलम्ब का कारण क्या हैं।  कारण जानकर वह अत्यधिक क्रोधित हुए और अपने बेटो को माता का सर काटने का आदेश दिया। परन्तु मात्र प्रेम के चलते चारों माता को न मर सके।  

जब परशुरामजी(Lord Parshuram) वहाँ आये और पिता का आदेश सुना तो उन्होंने अपने चारो भाइयो और माता का सर काट दिया।

यह देख ऋषि बड़े प्रसन्न हुए और परशुराम से वरदान मांगने को कहा , यह सुनकर परशुराम ने अपनी माता और भाइयो को पुनः जीवित करने और यह सब जो हुआ है उन्हें वह कभी याद न रहे इसका आशीर्वाद माँगा। यह सुन भगवान परशुराम (Lord Parshuram) के पिता ने वैसे ही किया और सब पहले जैसा हो गया।

क्यों भगवान परशुराम जी ने २१ बार क्षत्रियो का विनाश किया? | Why did parshuram vanished kshatriya 21 times from earth?

Source – Internet

यह कथा भी अत्यंत प्रचलित है की भगवान परशुराम(Parshuram) ने २१ बार क्षत्रियो का इस समूची धरती से अंत किया था। कथा कुछ यु है की एक बार हैहय कुल के राजा कार्तवीर्य अर्जुन जमदगिनी ऋषि आश्रम आये और महर्षि के स्वागत सत्कार से आती प्रसन्न हुए और जब उन्हें ये ज्ञात हुआ की इन सब सत्कार आदि ऋषिमुनि की अध्भुत गाय सुरभि की वजह से हुआ है जो की कामधेनु गाय की पुत्री है , वह उससे अपने साथ ले जाने की आज्ञा मांगी जिससे ऋषिमुनि ने मना कर दिया , बाद में सिपाहिओं के साथ आकर गाय ज़बरदस्ती ले गए।

 जब इसका पता परशुराम जी को चली , तब उन्होंने कार्तवीर्य अर्जुन को ललकार उसका वध कर दिया। जब भगवान परशुराम गाय लेके आये और सारा वृतांत बताया। महर्षि जमदगिनी यह सब सुनकर बोले ब्राह्मण का काम क्षत्रिय वध नहीं है और उन्हें हिमालय जाकर तप  करने को कहा। जब भगवान परशुराम (Lord Parshuram) हिमालय गए तब हैहय वंश के अन्य राजाओ ने बदला लने हेतु ,महर्षि और उनकी पत्नी की हत्या करदी।  

परशुराम जी को वापिस आके जब इस घटना का पता चला तब उन्होंने इस पृथ्वी से हैहय क्षत्रिय वंश का नाश करने की प्रतिज्ञा ली। इस प्रतिज्ञा के तहत उन्होंने सभी हैहय वंश के विनाश किया और केवल गर्भवती स्त्रियों को ही छोड़ते थे। इतना नरसंघार देख, महर्षि ऋचक ने उन्हें ऐसा करने से रोका।

क्यों हुआ था गणेश जी और परशुराम जी में युद्ध ? | Why was there a war between Ganesha and Parashurama?

Source – Internet

यह किस्सा भी भगवन परशुराम जी (Lord Parshuram) जी के गुस्से को दर्शाता है।  प्रचलित कथा अनुसार प्रसंग कुछ इस प्रकार है , एक बार परशुरामजी भगवान शंकर से मिलने हिमालय पर्वत गए।  जब वह वह पहुंचे तब शंकरजी ध्यान में लीन थे इसलिए गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने नहीं दिया और द्वार पर ही रोक दिया।  काफी समझने और वार्तालाप से भी बात नहीं बानी तो भगवन परशुराम जी को गुस्सा आ गया और उनकी और गणेश जी के बिच भीषड़ युद्ध हुआ।  

दोनों के बीच युद्ध होते-होते भगवान परशुराम जी के फरसे के वार से गणेश जी का एक दांत टूट गया और यही कारण एक दन्त भी कहा जाता है। मान्यता अनुसार इसी टूटे हुए दांत से ही गणेश जी ने महाभारत लिखी थी।

यह कुछ बातें थी भगवान परशुराम (लार्ड परशुराम) जी के बारे में। ऐसे ही कुछ प्रेरणा दाई कथाएं और बातों को पढ़ने और सुनने हेतु दिए गए लिंक पर Click करे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here