Navratri 2020:कब है नवरात्री का शुभ मुहूर्त? kab hai Navratri ka Subh Muhurt?

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kab hai navratri ka subh muhurt

इस बार सूर्य तुला राशि में प्रवेश कर रहे है. तुला राशि में बुध पहले से ही वक्री रहेंगे. इस कारण बुध-आदित्य योग बनेगा. इसके साथ ही 58 साल बाद शनि-गुरु का भी दुर्लभ योग बन रहा है. इस नवरात्रि में शनि मकर में और गुरु धनु राशि में रहेंगे. ये दोनों ग्रह 58 साल बाद नवरात्रि में एक साथ अपनी-अपनी राशि में स्थित रहेंगे. 1962 के बाद इस बार नवरात्रि में ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है.

17 October से 25 अक्टूबर तक क्रमशः किन-किन माताओ की पूजा करनी चाहिये

  • 17 अक्टूबर- मां शैलपुत्री पूजा घटस्थापना
  • 18 अक्टूबर- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
  • 19 अक्टूबर- मां चंद्रघंटा पूजा
  • 20 अक्टूबर- मां कुष्मांडा पूजा
  • 21 अक्टूबर- मां स्कंदमाता पूजा
  • 22 अक्टूबर- षष्ठी मां कात्यायनी पूजा
  • 23 अक्टूबर- मां कालरात्रि पूजा
  • 24 अक्टूबर- मां महागौरी दुर्गा पूजा
  • 25 अक्टूबर- मां सिद्धिदात्री पूजा

Navratri 2020 – आखिर वर्ष मे कितनी बार Navratri पड़ती है?

Navratri 2020:– हमारे देश में यह बहुत कम लोगो को ही ज्ञात होगा,कि नवरात्र साल में एक 4 बार आती है| साल के पहले महीने यानि चैत्र नवरात्र, साल के चौथे माह यानि आषाढ़ मे दूसरी बार| आश्विन महीने मे प्रमुख शारदीय नवरात्र, साल के अंत मे माघ माह मे गुप्त नवरात्र मनाया जाता है | आपको देवी-भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में इन सभी का जिक्र अवश्य मिलेगा | बात करें हिंदू कैलेंडर की तो इनके हिसाब से चैत्र माह हिंदू नव वर्ष की शुरुआत होती है | और इसी दिन से नवरात्र भी शुरू होती है, इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि चारों में से चैत्र और शारदीय नवरात्र प्रमुख माने गए हैं |

आइए बात करते हैं कि साल में दो नवरात्र मनाने के पीछे क्या अलग-अलग तरह की बातें हैं?

Navratri 2020 – क्या है प्राकृतिक वजह साल में दो बार नवरात्र मनाने की?

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अगर हम बात करें कि नवरात्र साल में दो बार क्यों मनाई जाती है? इसके पीछे का प्राकृतिक कारण आप यूं देख सकते हैं कि दोनों नवरात्र के समय ऋतु का परिवर्तन होता है| गर्मी और ठंड हमारे यहां, यह दो प्रमुख मौसम है और दोनों के प्रारंभ से बहुत ही बड़े प्राकृतिक परिवर्तन पाय जाते हैं | और इसी प्रकृति मां की अपार शक्ति को प्रणाम करने के हेतु हम नवरात्रि का वर्ष, हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं |

यह इस बात से भी सिद्ध होता है कि दोनों ही नवरात्रि के समय प्रकृति कुछ यूं मेहरबान रहती है कि ना तो अधिक गर्म ना अधिक ठंड का हमें एहसास होता है जो कि पर्व को हर्षोल्लास से मनाने के लिए एक उत्कृष्ट समय है|

Navratri 2020 – भौगोलिक तौर पर हम, ऐसा कैसे कह सकते हैं कि नवरात्र साल में दो बार क्यों मनाई जाती है?

भौगोलिक दृष्टिकोण से अगर बात की जाए तो मार्च और अप्रैल का महीना सितंबर और अक्टूबर के समान ही होता है | इस महत्वपूर्ण भौगोलिक समानता के कारण ही वर्ष में दो बार नवरात्र मनाई जाती है | इस भूगौलिक परिवर्तन का असर  हमारे शरीर और मस्तिष्क में भी पड़ता है, इसी बदलाव को नियंत्रड मई रखने हेतु हम व्रत या उपवास रखते है हम वर्ष के दो समय हम अपने मन और शरीर को काबू में रख सके |

Navratri 2020 – पौराणिक मान्यताएं इस बारे में हमें क्या संकेत देती हैं?

साल में दो बार नवरात्र मनाने का जिक्र हमारे पुराणों मई भी पाया जाता है| यह माना जाता है कि पूर्व समय में चैत्र नवरात्र थी यानी वह नवरात्र जो ग्रीष्म काल के समय मनाया जाता था| रामजी ने जब रावण का वध किया और असत्य पर सत्य की विजय हुई| तब विजय  ध्वज फहराने के बाद श्री राम जी परंतु उसके लिए मां नवरात्रि प्रतीक्षा नहीं करना चाहते थे | इसी के मद्देनज़र उन्होंने एक विशाल दुर्गा पूजा का आयोजन किया, इसी से दो बार नवरात्रि मनाई जाने लगी|

Navratri 2020 – क्या है आध्यात्मिक पहलू?

Spiritual

कौन सी बात की जाए तो नवरात्र गर्मी की शुरुआत में आती है वहीं दूसरी तरफ यह सर्दी के प्रारंभ में आती है| जब सूर्य की ऊर्जा  हमें सबसे ज्यादा प्रभावित करती है इसका कारण यह है कि इसी समय फसल पकने की भी अवधि होती है| मनुष्य को वर्षा ठंड व जल से राहत मिलती है | उत्तम समय में मां की आराधना करने से या यूं कहें शक्ति की आराधना करने का सबसे उचित समय होता है|

कब है घट स्थापना का शुभ मुहूर्त?

नवरात्रि का पर्व 17 अक्टूबर से शुरू हो रहा है. पंचांग के अनुसार इस दिन आश्चिन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी. इस दिन घट स्थापना मुहूर्त का समय सुबह 06 बजकर 27 मिनट से 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. घटस्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सुबह 11बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा.

कब है नवरात्री का मुहूर्त -: इस नवरात्री को 58 साल बाद एक अध्बुध योग बन रहा है।

इस बार माता के आगमन के समय एक ऐसा दुर्लभ योग बन रहा है जो इससे पहले वर्ष 1962 में बना था। इस बार नवरात्री 17 October से शुरू हो कर 25 October तक मनाया जाएगा। इस बार ऐसा योग बैठ रहा है की सूर्यदेव नवरात्र के पहले दिन अपनी राशि परिवर्तन कर रहे है। इस बार सूर्य तुला राशि में प्रवेश कर रहे है. तुला राशि में बुध पहले से ही वक्री रहेंगे. इस कारण बुध-आदित्य योग बनेगा. इसके साथ ही 58 साल बाद शनि-गुरु का भी दुर्लभ योग बन रहा है. इस नवरात्रि में शनि मकर में और गुरु धनु राशि में रहेंगे. ये दोनों ग्रह 58 साल बाद नवरात्रि में एक साथ अपनी-अपनी राशि में स्थित रहेंगे. 1962 के बाद इस बार नवरात्रि में ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है.

यह  कुछ मुख्य बिंदु थे जिस वजह से साल में दो बार नवरात्रि मनाने का सौभाग्य प्राप्त होता है | अगर आपको भी कुछ अन्य कारण अज्ञात में जी की क्यों हमें नवरात्रि साल में दो बार सौभाग्य प्राप्त होता है |

नोट – उपलब्ध जानकारी इंटरनेट व अन्य संसाधनों द्वारा प्राप्त की गई है |

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