रक्षा बंधन का त्यौहार क्यों मनाया जाता हैं? : Raksha bandhan ka tyohar kyu manaya jata hai?

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Raksha Bandhan 2020 -: रक्षा बंधन का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?इस सवाल का जवाब सब जानना चाहते है। हमारे भारत देश में रक्षा बंधन बहुत हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है।  भारत में मुख्यतः यह मध्य और पश्चिमी भाग में मनाया जाता हैं। भारत में इस त्यौहार को मनाने का स्वरूप भले ही एक न हो परन्तु भावनायें एक सामान है। भाई-बहन के प्रेम को दर्शाने वाले इस पर्व में बहुत ही प्यार और आत्मीयता का भाव होता है।  

इस साल रक्षा बंधन का त्यौहार कब मनाया जा रहा है?

रक्षा बंधन यु तो हमेशा अलग-अलग समय में पड़ता है।  परन्तु अधिकतर यह पर्व अगस्त महीने में पड़ता है। अगर बात करे हिन्दू पंचांग अनुसार तो रक्षा बंधन का त्यौहार प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यही कारण है की इस पर्व को हम राखी पूर्णिमा भी कहते है। इस साल यह पर्व 03 August को पड़ रहा है। 

राखी बाँधने का सही मुहूर्त?

वैसे तो बहन अपने भाई को राखी कभी भी बाँध सकती है।परन्तु यदि कोई पंचांग देख कर शुभ मुहूर्त में राखी बांधना चाहे तो हम आपको यह बता सकते है. राखी बंधवाने का मुहूर्त अलग-अलग स्थानों में एक दूसरे से अलग हो सकता है।

हिंदू बनारस पंचांग के अनुसार सावन मास की पूॢणमा तिथि 21 अगस्त दिन शनिवार को शाम 7 बजे से प्रारंभ हो रही हैं। जबकि इसका समाप्ति आगामी 22 अगस्त दिन रविवार को शाम 05 बजकर 31 मिनट पर होगा। उदयातिथि 22 अगस्त को प्राप्त है, इसलिए रक्षाबंधन का त्योहार 22 अगस्त को धूमधाम से मनाया जाएगा।

कई वर्षो के बाद ऐसा संयोग आया है कि राखी के दिन भद्रा नक्षत्र नहीं है। भद्रा में भाई को राखी नहीं बांधना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि रावण को उसकी बहन ने भद्रा नक्षत्र में ही राखी बांधी थी। इससे उसका अनिष्ट हुआ। पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन पर सुबह 06.15 बजे से लेकर 10.34 बजे तक शोभन योग रहेगा। वहीं शाम 07.40 मिनट तक धनिष्ठा योग रहेगा। इसमें राखी बांधना सबसे उत्तम है।

रक्षा बंधन का त्यौहार मनाने सही विधि.

रक्षा बंधन का त्यौहार  मनाने की विधि भारत के अलग-अलग स्थानों में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। हम आपको जो भारत में सबसे ज्यादा प्रचलित है उससे वाक़िफ़ कराते है।  

रक्षा बंधन का त्यौहार मनाने  की विधि कुछ इस प्रकार है।रक्षा बंधन के दिन सुबह-सुबह सभी परिवार वाले नाहा के त्यार हो जाते है।बाद में मुहूर्त समय अनुसार भाई-बहन एक दूसरे के सामने बैठते है।बहन भाई को तिलक लगाती है , फिर उसकी आरती उतरती है।आरती उतरने के बाद वह भाई की कलाईयों में रक्षा सूत्र बांधती है। कलाईयों में रक्षा सूत्र बांधते वक़्त इन मंत्र का उच्चारण भी करना चाहिए – 

मंत्र –

” ॐ एन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:

तेन त्वा मनुबधनानि रक्षे माचल माचल “

राखी बंधवाते वक़्त भाई अपनी बहन को हर स्थिति और परिस्थितियों में रक्षा का वचन देता है।भारत के कई जगहों में रक्षा बंधन के एक दिन पहले लड़कियाँ उपवास रहती है और अगले दिन भाई को राखी पहनती है।   

क्यों मनाया जाता है रक्षा बंधन का त्यौहार?आइये जानते है इससे जुड़ी कुछ कथाएँ 

भारत में रक्षा बंधन के पर्व को लेकर कई पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियाँ है।आइये जानते है इन कहानियों के बारें में।   

रक्षा बंधन का त्यौहार  बनाने के पीछे भविष्य पुराण की कथा अनुसार समझते है।  

भारत में पुराणों की कथाओं का अनुसरण करे तो हमे रक्षा बंधन से जुडी एक कथा मिलती है।  इस कथा अनुसार पृथ्वी में एक बार देवताओं और दानवों के समक्ष लगातार १२ साल युद्ध हुआ। इस युद्ध में एक तरफ थे दानवों के राजा बलि और दूसरी तरफ थे देवताओं के राजा इन्द्र।  इस युद्ध में देवता परास्त्र हुए और दानवों ने तीनों लोकों की सत्ता हासील कर्ली। 

इस युद्ध के बाद राजा इंद्रा की पत्नी शची भगवन विष्णु के पास गई।जब उन्होंने भगवान विष्णु को सब बताया तब विष्णु जी ने माता शची को सूती धागे से बना हुआ एक वयल दिया।इस वयल को उन्होंने पवित्र करके दिया और कहा की इसे भगवान इंद्र की कलाई में बाँध दे।जब उन्होंने भगवान इंद्रा की कलाई में इस वयल को बाँध दिया।  

इस वयल को बांधने के बाद भगवान इंद्रा ने दानवों के राजा बलि को हरा कर , अमरावती में पुनः अपना आधिपत्य स्थापित किया।  

राजा बलि और माँ लक्ष्मी की कहानी

इस कथा का उल्लेख हमे भागवत पुराण और विष्णु पुराण में मिलता है।यह कथा कुछ इस प्रकार है की एक बार राजा बलि ने भगवान विष्णु जी के साथ उनके महल में रहने की ईक्षा जाहिर की जिसे भगवान विष्णु ने सहर्ष मान लिया।  और वह भगवान विष्णु के साथ उनके महल में रहने लगे। 

तब माता लक्ष्मी जी ने विष्णु जी के साथ वैकुण्ठ में रहने का निश्चय किया।उन्होंने राजा बलि की कलाई में रक्षा सूत्र बाँधकर उन्हें भाई बना लिया।  तब राजा बलि ने लक्ष्मी जी से कुछ भी मांगने को कहा।  इसमें माँ लक्ष्मी ने उन्हें भगवान विष्णु को अपने वचन से मुक्त करने को कहां।

यह सुनकर राजा बलि बोले मैंने आपको अपनी बहन मन है। आप जैसा बोलेंगी वैसा होगा। यह कहकर उन्होंने विष्णु जी को आपने वचन से मुक्त कर दिया। 

भगवान श्री कृष्ण और द्रौपदी की कथा।    

rakshabandhan ka tyohar kyu manaya jata hai?
Credit – Internet

यह कथा कुछ इस प्रकार है की जब भगवान श्री कृष्ण शिशु पाल का वध कर रहे थे। तब उनकी तर्जनी ऊँगली में चोट लग गई और खून निकलने लगा था।  यह देख द्रौपदी जी ने आपने पल्लू का कपडा फाड़कर श्री कृष्ण जी की ऊँगली में बांध दिया था।यह समय श्रावण पूर्णिमा का दिन था।    

यह देख भगवान कृष्ण ने द्रौपदी जी को अपनी बहन माना था और रक्षा करने का वादा किया था। महाभारत में जब द्रौपदी जी का चीरहरण हो रहा था, तब श्री कृष्ण ने आकर उन्हें बचाया था। रक्षा बंधन का त्यौहार इस कथा से भी सम्बन्ध रखता है।

माँ संतोषी की कथा से संबंधित रक्षा बंधन का पर्व 

माँ संतोषी की कथा से सम्बंधित रक्षा बंधन का पर्व कुछ इस प्रकार है , भगवान विष्णु के दो पुत्र थे – शुभ और लाभ।  परन्तु दोनों भाइयो को एक बहन की कमी  खलती थीं ।क्योंकि वह रक्षा बंधन का पर्व नहीं मन पते थे।  दोनों यह विषय को लेकर गणेश जी और एक बहन की मांग की। 

 इस विषय में नारद मुनि ने भी गणेश जी के समक्ष बात राखी।  तब गणेश जी  और  की कामना की।   रिद्धि-सिद्धि की ज्योति से एक बिटिया का जन्म हुआ जो की माँ संतोषी थी।  और फिर शुभ-लाभ को बहन मिल गई और वह रक्षा बंधन का पर्व मनाया।   

यम और यमुना की कहानी 

एक कथा यम और यमुना से भी सम्बंधित रखती है. इस कथा अनुसार यम जो की मृत्यु के देवता है , वह अपने काम में इतने मशगूल रहने लगे  बहन यमुना यमुना मिलने १२ साल नहीं गए।इस बात को लेकर यमुना जी माँ गंगा के पास गई।  

माँ गंगा ने यह बात यमराज जी को बताया। यमराज यह बात सुनकर अपनी बहन यमुना से मिलने गए. अपने भाई यमराज जी को देखकर बहुत खुश हुई और उन्हें बहुत सरे पकवान बना के खिलाया। यह सब देखकर  प्रसन्न  बहन से कुछ भी मांगने को कहा।  

यमुना जी ने बस यही कहां की आप हर साल आया करे।  यह सुन यमराज जी बहुत प्रसन्न हुए और यमुना जी को अमरत्व का वरदान दिया।    

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